MSMED संशोधन से लघु उद्योगों को मिलेगी नई संजीवनी, भुगतान व्यवस्था में आएगा बड़ा बदलाव

केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास (MSMED) अधिनियम में किए गए बहुप्रतीक्षित संशोधन लघु उद्योग क्षेत्र के तीव्र और निर्बाध विकास में नई जान फूंकने का काम करेंगे।

"किसी भी छोटे या लघु उद्योग की सफलता का मूल आधार 'समय पर वित्तीय सहायता एवं तरलता (Working Capital))' का उपलब्ध होना है। न्यायालयों और परिसमापन परिषदों (Facilitation Councils) में वर्षों से लंबित भुगतानों के कारण लघु इकाइयां बंदी के कगार पर पहुंच जाती हैं। सरकार का यह कदम सूक्ष्म और लघु उद्योगों को नई संजीवनी देने वाला है।"

न्यायालयीन विचाराधीन या अदालती मामलों में 50% राशि का भुगतान तुरंत कराने का आदेश MSME इकाइयों को बड़ी वित्तीय राहत देगा।

रूस्रूश्व फैसिलिटेशन काउंसिल (MSME Facilitation Council) द्वारा विवादों का निपटारा 90 दिनों के भीतर करने की बाध्यता तय करना एक बेहद महत्वपूर्ण कदम है।

सबसे ज्यादा शोषण उन लघु उद्योगों का होता है, जो केवल सरकारी उपक्रमों (PSUs) के लिए माल बनाते हैं। एकाधिकारवादी मानसिकता (Monopolistic Buyer) के चलते 5 से 6 महीने या उससे भी अधिक समय तक भुगतान विलंबित करना साधारण बात है, जिससे कई बार सप्लायर औद्योगिक इकाई के डूबने की स्थिति आ जाती है।

सरकारी उपक्रमों द्वारा खरीद के बाद लघु उद्योगों को यथाशीघ्र भुगतान सुनिश्चित करने हेतु TReDS (ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम) को अधिक प्रभावी बनाने की सरकार की मंशा इस क्षेत्र के त्वरित विकास में नई ऐतिहासिक शुरुआत सिद्ध होगी।


डॉ. सुरेन्द्र बजाज  
कोषाध्यक्ष, राजस्थान  ट्रांसफॉर्मर
manufacturers एसोसिएशन, जयपुर

Recent News

Advertisement

Recent Edition

Copyrights © all rights reserved || Develop by : Deganahalchal