| भ्रष्टाचार की दीमक से खोखला होता विकास - मधु भूतड़ा 'अक्षरा' |
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भ्रष्टाचार आज हमारे देश के विकास पथ में सबसे बड़ा रोड़ा बन चुका है। यह एक ऐसी अदृश्य दीमक है जो देश के लोकतंत्र, अर्थव्यवस्था और नैतिक मूल्यों को अंदर ही अंदर खोखला कर रही है। देश हित में आज इस बात पर गहराई से मंथन करने की आवश्यकता है। आज देश का कोई भी कोना, कोई भी विभाग इस सामाजिक कोढ़ से अछूता नहीं है। आम नागरिक के जीवन का हर पड़ाव भ्रष्टाचार के चक्रव्यूह में फंसा हुआ है, पुलिस थाना हो या कोर्ट-कचहरी, न्याय के सबसे बड़े रक्षक ही आज सवालों के घेरे में हैं। थानों में शिकायत (FIR) दर्ज कराने, निष्पक्ष जांच करवाने से लेकर कोर्ट-कचहरी में तारीख बदलवाने और मुकदमों के रफा-दफा करने के लिए भारी घूस का चलन आम हो चुका है। यातायात स्थल पर नियमों का पालन न करने वाले भी चंद रुपयों की रिश्वत देकर छूट जाते हैं। आरटीओ (RTO), दफ्तरों में बिना टेस्ट दिए ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए दलालों का नेटवर्क सक्रिय है, तो वहीं पासपोर्ट ऑफिस के बाहर कार्य आसानी से हो जाता है। स्कूल और कॉलेजों में बच्चों के एडमिशन के लिए डोनेशन के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती हैं, सरकारी महकमों में एंट्री और फाइलों को आगे बढ़ाने के लिए हर स्तर पर अवैध पैसों का लेनदेन होता है। योग्य युवाओं के भविष्य के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ नौकरियों और परीक्षाओं में हो रहा है। पेपर लीक माफिया, फर्जी डिग्री और नौकरियों की खरीद-फरोख्त ने मेहनत करने वाले छात्रों की उम्मीदों को तोड़ दिया है। पास होने के लिए कॉपियों की हेरफेर से लेकर इंटरव्यू में पैरवी तक सब कुछ बिक रहा है। आस्था के केंद्रों पर कमर्शियलाइजेशन का प्रहार, भ्रष्टाचार और पैसों के लोभ ने अब हमारे पवित्र आध्यात्मिक स्थलों को भी नहीं छोड़ा है। आज देश के बड़े और प्रसिद्ध भगवान के मंदिरों में भी "अतिरिक्त पैसा जमा करवाएं और झटाझट VIP दर्शन प्राप्त करें" जैसी व्यवस्थाएं धड़ल्ले से चल रही हैं। भगवान के दरबार में यह कैसा भेदभाव है , जिस ईश्वर की नजर में हर इंसान, चाहे वह अमीर हो या गरीब, एक समान है, आज उसी ईश्वर के घर में पैसों के दम पर दूरी और समय तय हो रहा है। गरीबों की लाचारी और अमीर व्यक्ति मोटी रकम या "VIP पास" के जरिए कुछ ही मिनटों में सीधे गर्भगृह तक पहुंच जाता है, जबकि एक आम और गरीब श्रद्धालु घंटों कड़कती धूप और लंबी कतारों में अपनी बारी का इंतजार करता रहता है। कैसे खोखला हो रहा है देश? भ्रष्टाचार केवल पैसों का लेन-देन नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। जब बुनियादी ढांचे सड़क, पुल, अस्पताल के निर्माण में भ्रष्टाचार होता है, तो घटिया निर्माण के कारण आम जनता को जान से हाथ धोना पड़ता है। यह देश की आर्थिक प्रगति को रोकता है क्योंकि प्रतिभा और योग्यता की जगह भाई-भतीजावाद और रिश्वत ले लेती है। इससे गरीब और अमीर के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है। आज भ्रष्टाचार के जाल में समाज का एक बड़ा हिस्सा जुड़ा हुआ है। कुछ भ्रष्ट राजनेताओं, अधिकारियों और बिचौलियों के गठजोड़ ने इसे एक विकृत व्यवस्था का रूप दे दिया है। सरकारी कार्यालयों की स्थिति आज भी चिंताजनक है। ईमानदारी पर धूल जमी दिखाई देती है, आम नागरिक को अपने जायज काम, जैसे प्रमाण पत्र बनवाने, जमीन की रजिस्ट्री या पेंशन चालू कराने के लिए भी दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते हैं। टेबल के नीचे से होने वाली कमाई ही फाइलों की खुलने का निर्देश देती है। आपदा के समय गेहूं, चावल,अनाज के गोदाम भर दिए जाने और उसका ब्लैक किया जाना, कहाँ उचित है? ऐसे अनेकानेक मुद्दें हैं, जो भ्रष्टाचार को बढ़ाते हैं। भ्रष्टाचार का यह वायरस निजी संस्थानों (Corporate Sectors) में भी नौकरी के बदले रिश्वत, फर्जी बिलिंग और टैक्स चोरी के रूप में पैर पसार चुका है। आज देश के आम इंसान के भीतर भ्रष्टाचार के प्रति भारी रोष और व्यवस्था से त्रस्त हैं, लेकिन अक्सर लाचारी में उन्हें इस भ्रष्ट सिस्टम का हिस्सा बनना पड़ता है। ईमानदारी जैसे चंद लोगों के भीतर ही सिमट कर रह गई है। लोग शॉर्टकट अपनाने में गर्व महसूस करते हैं। यह सच है कि हाल के वर्षों में डिजिटल इंडिया, डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) और ऑनलाइन पोर्टल्स के आने से सरकारी योजनाओं में बिचौलियों की भूमिका कम हुई है। ऑनलाइन सिस्टम ने भ्रष्टाचार पर कुछ हद तक अंकुश जरूर लगाया है, लेकिन यह पूरी तरह प्रभावी नहीं हो पाया है। तकनीकी खामियों और डिजिटल साक्षरता की कमी के कारण भ्रष्ट तत्वों ने ऑनलाइन सिस्टम में भी हेरफेर करने के नए रास्ते ढूंढ निकाले हैं। आज भी जमीनी स्तर पर घूसखोरी और भ्रष्टाचार से पूरा देश परेशान है। इस राष्ट्रीय संकट से उबरने के लिए केवल कड़े कानून या तकनीक काफी नहीं हैं। इसके लिए एक बहुआयामी और ठोस समाधान की आवश्यकता है: 1. धार्मिक स्थलों पर वीआईपी कल्चर का अंत हो। मंदिरों और धार्मिक ट्रस्टों में पैसों के आधार पर दर्शन की प्राथमिकता को पूरी तरह बंद कर "पहले आओ, पहले पाओ" की पारदर्शी व्यवस्था लागू होनी चाहिए, ताकि ईश्वर के द्वार पर समानता बनी रहे। 2. भ्रष्टाचार के मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट होने चाहिए, ताकि भ्रष्टाचारियों को तुरंत और ऐसी सख्त सजा मिले जो दूसरों के लिए मिसाल बने। 3. सरकारी और निजी दोनों क्षेत्रों में हर निर्णय और फाइल के मूवमेंट की ट्रैकिंग सार्वजनिक होनी चाहिए। 4. हमारे स्कूली पाठ्यक्रम में नैतिक मूल्यों और ईमानदारी को प्राथमिकता देनी होगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई किसी एक सरकार या संस्था की नहीं है। जब तक देश का हर नागरिक स्वयं घूस न देने और न लेने का संकल्प नहीं लेगा, तब तक इस दीमक को मिटाया नहीं जा सकता। ईमानदारी को हमें अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाना होगा। जब समाज में भ्रष्टाचारियों का सामाजिक बहिष्कार होगा और ईमानदार लोगों को सम्मान मिलेगा, तभी भारत सही मायने में एक सशक्त और समृद्ध राष्ट्र बन पाएगा।
मधु भूतड़ा 'अक्षरा'
गुलाबी नगरी जयपुर से #ekpehal #ekpehalbymadhubhutra +91 9828153965 |
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