सूरत में ऊब छठ पर सुहागिनों ने रखा निर्जला व्रत, चंद्र दर्शन तक किया भजन-कीर्तन

सूरत। ऊब छठ, जिसे चंद्र छठ और चंदन छठ के नाम से भी जाना जाता है, कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को श्रद्धा और आस्था के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सुहागिन महिलाओं ने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और परिवार की मंगलकामना के लिए निर्जला व्रत रखा। वहीं कुंवारी कन्याओं ने भी सुयोग्य वर की प्राप्ति की कामना से उपवास किया। ऊब छठ की अनूठी परंपरा के अनुसार महिलाएं सूर्यास्त से चंद्रमा के दर्शन होने तक बिना बैठे लगातार खड़े रहकर पूजा-अर्चना, भजन और कीर्तन करती हैं। लंबे समय तक खड़े रहकर व्रत करने की इसी परंपरा के कारण इसे 'ऊब छठÓ कहा जाता है। चंद्रमा के दर्शन के बाद विधि-विधान से पूजा कर व्रत का पारण किया गया।

पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी तिथि को भगवान श्रीकृष्ण के बड़े भाई भगवान बलराम का जन्म हुआ था। इस कारण कई क्षेत्रों में इस पर्व को हल षष्ठी के रूप में भी मनाया जाता है। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की।

सारथी हाईट्स सूरत से महेश पुंगलिया ने बताया कि ऊब छठ महिलाओं की आस्था, श्रद्धा और त्याग से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। महिलाएं पूरे उत्साह और भक्तिभाव के साथ निर्जला व्रत रखती हैं तथा चंद्र दर्शन तक पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन करती हैं। चंद्र दर्शन के साथ व्रत पूर्ण होने पर परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की जाती है।

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