| माहेश्वरी मण्डल भायन्दर जिला सभा ने महेश नवमी पर सेवा, संस्कार और सामाजिक सरोकार का दिया अनूठा संदेश |
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माहेश्वरी मण्डल भायन्दर जिला सभा द्वारा भगवान महेश के वंशोत्पत्ति दिवस महेश नवमी 2026 के उपलक्ष्य में 20 जून से 28 जून तक धार्मिक, आध्यात्मिक, स्वास्थ्य, सेवा एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की भव्य श्रृंखला का आयोजन किया गया। नौ दिनों तक चले इन आयोजनों में योग, प्रेरक व्याख्यान, शोभायात्रा, वैदिक चिकित्सा, तुलसी अर्चना, भजन संध्या, पैथोलॉजी जांच एवं मेगा रक्तदान शिविर जैसे विविध कार्यक्रमों के माध्यम से समाज को स्वास्थ्य, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिकता का संदेश दिया गया। कार्यक्रमों का शुभारम्भ 20 जून से 25 जून तक प्रतिदिन प्रात: 6:30 से 7:30 बजे श्री माहेश्वरी भवन, भायन्दर (पश्चिम) में आयोजित योग शिविर से हुआ। योग दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित इस शिविर का संचालन हंसाबेन योगेंद्र - द योग इंस्टीट्यूट की योग प्रशिक्षिका श्रीमती आरती बी. शुक्ला के सान्निध्य में किया गया। प्रतिदिन कार्यक्रम का शुभारम्भ श्रीमद्भगवतगीता के नित्य पठनीय पाँच श्लोकों से हुआ। योग शिविर में समाजबंधुओं एवं महिलाओं ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। योग प्रशिक्षिका ने सरल भाषा में योग के शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक लाभों की जानकारी दी। योग प्रशिक्षिका का स्वागत मण्डल अध्यक्ष नटवर डागा ने शॉल ओढ़ाकर, सचिव नारायण तोषनीवाल ने स्मृति-चिन्ह तथा कोषाध्यक्ष सुरेश दरक ने श्रीमद भागवत गीता भेंट कर किया। कार्यक्रम का संचालन कार्यक्रम संयोजक पुरुषोत्तम दरक ने किया, जबकि व्यवस्थाएँ सतीश तोषनीवाल, सुरेश बंग एवं राजेश राठी ने संभाली। 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर स्वस्थ, सुखी, सक्षम एवं शांत जीवन जीने की राह विषय पर विशेष प्रेरक सत्र आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता माइंडफिट के संस्थापक एवं निदेशक, पूर्व सैनिक तथा लीडरशिप कोच कैप्टन सुंदरचंद ठाकुर रहे। मण्डल अध्यक्ष नटवर डागा ने साफा पहनाकर, ट्रस्ट बोर्ड अध्यक्ष मदनलाल भूतड़ा ने शॉल, सचिव नारायण तोषनीवाल ने स्मृति-चिन्ह तथा कोषाध्यक्ष सुरेश दरक ने श्रीमद् भागवत गीता भेंट कर उनका स्वागत किया। लगभग डेढ़ घंटे चले इस प्रेरक सत्र में 200 से अधिक समाजबंधुओं ने भाग लिया। कैप्टन ठाकुर ने सकारात्मक सोच, मानसिक संतुलन, आत्मचेतना, योग एवं ऊँ के उच्चारण की आध्यात्मिक शक्ति पर प्रभावशाली व्याख्यान देते हुए स्वस्थ एवं आनंदमय जीवन के सूत्र बताए। कार्यक्रम की तैयारी संगठन मंत्री राजेश माहेश्वरी ने तथा मंच संचालन पुरुषोत्तम दरक ने किया।
23 जून को महेश नवमी के मुख्य अवसर पर बालाजी नगर, भायन्दर (पश्चिम) से सायं 4:30 बजे भगवान महेश की भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो स्टेशन रोड, राम भवन, कदमगिरी, कैलाश मानसरोवर, कस्तूरी गार्डन, सालासर बृजभूमि एवं डीमार्ट मार्ग से होते हुए रात्रि 7:30 बजे श्री माहेश्वरी भवन पहुँची। शोभायात्रा में 1000 से अधिक समाजबंधुओं, महिलाओं, युवाओं, बच्चों एवं वरिष्ठ नागरिकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। मार्ग में विभिन्न समाज परिवारों द्वारा श्रद्धालुओं के लिए आइसक्रीम, समोसे, शीतल पेय, ठंडाई एवं अन्य जलपान की उत्कृष्ट व्यवस्था की गई। विशेष उल्लेखनीय बात यह रही कि पूरी शोभायात्रा के साथ सफाई कर्मी भी चलते रहे, जिससे कहीं भी कचरा न फैले और स्वच्छ भारत अभियान का संदेश समाज द्वारा व्यवहारिक रूप में प्रस्तुत किया गया। नगरसेविका श्रीमती कोमल विठ्ठल नावंधर ने शत्रुंजय हाइट्स पर भगवान महेश की पूजा-अर्चना कर पुष्पवर्षा से शोभायात्रा का स्वागत किया। माहेश्वरी भवन पहुँचने पर भगवान महेश का पूजन एवं सामूहिक महेश वंदना का आयोजन हुआ। 22 से 25 जून तक चार दिवसीय वैदिक शाश्वत हस्त चिकित्सा उपचार शिविर आयोजित किया गया। डॉ. भक्ति प्रकाश जी के सान्निध्य में आयोजित इस शिविर में पंचतत्वों के संतुलन एवं स्पर्श चिकित्सा द्वारा विभिन्न रोगों के उपचार की पारंपरिक वैदिक पद्धति की जानकारी दी गई। लगभग 500 लोगों ने इस चिकित्सा शिविर का लाभ उठाया। शिविर की व्यवस्थाओं में अध्यक्ष नटवर डागा, सचिव नारायण तोषनीवाल सहित श्रीकांता मालानी एवं अंजलि लोहिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 25 जून को निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर विशेष तुलसी अर्चना महोत्सव आयोजित किया गया। नापासर के परम पूज्य महाराज श्री पवनजी के सान्निध्य में भगवान विष्णु के 1008 नामों के उच्चारण के साथ भगवान शालिग्राम को 1008 तुलसी दल अर्पित किए गए। करीब 100 श्रद्धालुओं ने इस भक्तिमय आयोजन में भाग लिया। कार्यक्रम की सफलता में अध्यक्ष नटवर डागा, सचिव नारायण तोषनीवाल, कार्यकारिणी सदस्य जगदीश मालानी, पुरुषोत्तम दरक, महिला समिति अध्यक्षा सुधा कांकाणी एवं सचिव सुमन मालपानी का विशेष योगदान रहा। 27 जून को श्री माहेश्वरी भवन में भव्य भजन संध्या आयोजित की गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ गणेश वंदना एवं श्रीमद्भगवद्गीता के पाँच श्लोकों से हुआ। निकिता जाजू, गीता रामायण पाठशाला की सिया, राधिका मालानी, चांडक, पलक, वंशिका डागा, जानवी, मान्शवी झंवर एवं मोहक डागा सहित अनेक प्रतिभागियों ने मधुर भजनों की प्रस्तुति देकर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम के सफल आयोजन में अध्यक्ष नटवर डागा, सचिव नारायण तोषनीवाल, कोषाध्यक्ष सुरेश दरक, संगठन मंत्री राजेश माहेश्वरी एवं कार्यक्रम संयोजक पुरुषोत्तम दरक की विशेष भूमिका रही।
28 जून को आयोजित पैथोलॉजी जांच शिविर में 193 लोगों ने फुल बॉडी हेल्थ चेकअप कराया। समाज द्वारा यह जांच बाजार मूल्य से लगभग 75 प्रतिशत रियायती दर पर उपलब्ध कराई गई। कार्यक्रम का शुभारम्भ भगवान महेश की पूजा एवं गीता के पाँच श्लोकों के पाठ से हुआ। आयोजन में मण्डल अध्यक्ष नटवर डागा, सचिव नारायण तोषनीवाल, कोषाध्यक्ष सुरेश दरक सहित महिला एवं युवा समिति के सदस्य उपस्थित रहे। इस आयोजन में संगठन मंत्री राजेश माहेश्वरी एवं कार्यक्रम संयोजक पुरुषोत्तम दरक का विशेष सहयोग रहा। 28 जून को ही आयोजित मेगा रक्तदान शिविर महेश नवमी समारोह का सबसे प्रेरणादायी सेवा कार्यक्रम रहा। सुबह 9:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक चले इस शिविर में बॉम्बे हॉस्पिटल की टीम के सहयोग से 151 से अधिक रक्तवीरों ने रक्तदान किया। विशेष बात यह रही कि सिंगापुर से आए एक सज्जन तथा कोलकाता से मुंबई भ्रमण पर आए समाजबंधुओं ने भी इस सेवा अभियान से प्रेरित होकर रक्तदान किया। बॉम्बे हॉस्पिटल की टीम का श्रीमद् भागवत पुस्तक भेंट कर सम्मान किया गया। शिविर को सफल बनाने में मनीष भूतड़ा, संजीव जाखोटिया, जगदीश मालानी, संतोष जाजू, आशीष मल्ल, महेंद्र माहेश्वरी, प्रवीन करवा, राकेश जाजू, पीयूष करवा, श्याम मानधना, पंकज मल्ल, नारायण हुरकट, मुकेश जाजू सहित बॉम्बे हॉस्पिटल की मेडिकल सोशल वर्कर आकांक्षा मोरे एवं उनकी टीम तथा समाज के अनेक कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा। महेश नवमी महोत्सव के अंतर्गत आयोजित सभी कार्यक्रमों को सफल बनाने में माहेश्वरी मण्डल भायन्दर जिला सभा की कार्यकारिणी, ट्रस्ट बोर्ड, महिला समिति, युवा समिति तथा सैकड़ों स्वयंसेवकों ने कई दिनों तक निरंतर सेवा देकर आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप प्रदान किया। समाजजनों ने इन सभी कार्यक्रमों की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन समाज में धार्मिक आस्था, सामाजिक एकता, स्वास्थ्य जागरूकता, सेवा भावना एवं सनातन संस्कृति के संरक्षण को नई दिशा प्रदान करते हैं।
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