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| 28 September 2026 |
| मद्रास माहेश्वरी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा दिव्य एवं भव्य सुदर्शन हवन संपन्न |
| मद्रास माहेश्वरी चैरिटेबल ट्रस्ट के तत्वावधान में सुख-शांति, आरोग्य, समृद्धि एवं सर्वजन कल्याण की मंगलकामना को लेकर सोमवार, 28 सितंबर को श्री फूसाराम चंपालाल मूंदड़ा माहेश्वरी भवन में दिव्य एवं भव्य सुदर्शन हवन का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिमय वातावरण में किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: विधि-विधान एवं मंत्रोच्चार के साथ गौ पूजा से हुआ। गौ माता का पूजन एवं आरती कर समाज, परिवार एवं समस्त जनों के सुख, शांति, आरोग्य एवं समृद्धि की मंगलकामना की गई। इसके पश्चात वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सुदर्शन हवन की धार्मिक विधियां प्रारंभ हुईं। हवन की पवित्र आहुतियों एवं वैदिक मंत्रोच्चार से माहेश्वरी भवन का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हवन में आहुतियां अर्पित कर सर्वजन कल्याण की प्रार्थना की।ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी श्री महेंद्र मोहता ने बताया कि विशेष सुदर्शन हवन के लिए केरल से विद्वान एवं अनुभवी पंडितों का समूह चेन्नई आया था। पंडित मणिकंडन के नेतृत्व में वैदिक परंपरा एवं विधि-विधान के अनुसार धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराया गया। उन्होंने बताया कि सुदर्शन हवन के माध्यम से भगवान श्री सुदर्शन की आराधना करते हुए 'सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय' की भावना से मंगलकामना की गई। |
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| 28 September 2026 |
| श्री माहेश्वरी बालक छात्रावास संस्थान के द्वितीय तल का लोकार्पण |
| अंशल स्थित श्री माहेश्वरी बालक छात्रावास संस्थान, भीलवाड़ा के द्वितीय तल पर नवनिर्मित आठ कमरों का लोकार्पण समारोहपूर्वक किया गया। भगवान महेश के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन के साथ मुख्य अतिथि श्री गोपाल राठी (भीलवाड़ा) तथा विशिष्ट अतिथि मुरलीधर काबरा (कोटड़ी) एवं कमलेश चेचाणी (मुंबई) ने कर-कमलों से लोकार्पण किया।इस अवसर पर संस्था के अध्यक्ष सत्यनारायण मंत्री ने स्वागत भाषण में बताया कि छात्रावास में पूर्व में 20 विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था थी। द्वितीय तल पर आठ नए कमरों के निर्माण एवं लोकार्पण के बाद अब यहां 40 विद्यार्थियों के रहने की उत्तम व्यवस्था उपलब्ध हो गई है। उन्होंने बताया कि माहेश्वरी समाज के जरूरतमंद परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों के लिए छात्रावास में आवास, नाश्ता एवं भोजन की सभी सुविधाएं नि:शुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह सेवा वर्ष 2021 से भामाशाहों के सहयोग से निरंतर संचालित है।मुख्य अतिथि श्री गोपाल राठी ने छात्रावास के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए की जा रही सेवा की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए संस्था के कार्यों की सराहना की। विशिष्ट अतिथि मुरलीधर काबरा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए संस्था को शुभकामनाएं दीं। |
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| 28 September 2026 |
| जन्मदिन पर एडवोकेट नारायण लाठी ने महाराष्ट्र महेश सेवा निधि को 61,000 का सहयोग दिया |
| जलगांव प्रतिनिधि मदन लाठी। जलगांव के एडवोकेट नारायण लाठी ने अपने जन्मदिन के अवसर पर प्रतिवर्ष सेवा कार्यों में सहयोग देने की परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष भी श्री ओंकारनाथ मालपाणी महाराष्ट्र महेश सेवा निधि को 61,000 का चेक प्रदान किया। उनके इस सेवाभावी सहयोग से सेवा निधि के विभिन्न सामाजिक एवं सेवा कार्यों को गति मिलेगी।इस अवसर पर श्री ओंकारनाथ मालपाणी महाराष्ट्र महेश सेवा निधि एवं जलगांव जिला माहेश्वरी सभा की ओर से एडवोकेट नारायण लाठी का जन्मदिन के उपलक्ष्य में अभिनंदन किया गया तथा उनके निरंतर सेवाभावी योगदान के लिए आभार व्यक्त किया गया।कार्यक्रम में श्री ओंकारनाथ मालपाणी महाराष्ट्र महेश सेवा निधि के मानद मंत्री प्रा. संजय दहाड़ सर, मनीष झंवर, जलगांव जिला माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष तेजस देपुरा, जिला सचिव अरुण लाहोटी, योगेश कलंत्री, विलास करवा, एडवोकेट राजेंद्र माहेश्वरी, विनय काबरा, विजय झंवर, सुनील बाहेती, डॉ. विश्वनाथ सोमाणी, विलास काबरा एवं अरविंद दहाड़ उपस्थित रहे।इस अवसर पर उपस्थित समाजबंधुओं ने एडवोकेट नारायण लाठी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएँ प्रेषित करते हुए उनके सेवाभावी सहयोग की सराहना की। |
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| 15 September 2026 |
| ऋषि पंचमी की एक और महत्ता |
| सूरत (पहले बोरसद) निवासी डॉक्टर नन्दलाल मानकलाल जी शाह, जो ढाट माहेश्वरी समाज से हैं, ने ऋषि पंचमी की एक और महत्ता पर एक बहुत ही विलक्षण जानकारी प्रेषित की है....आज भाद्रपद शुक्ल पंचमी है, जिसे हम ऋषिपंचमी अथवा सामा पंचमी के नाम से जानते हैं। यह व्रत महिलाओं द्वारा मासिक धर्म के दौरान अनजाने में हुई भूलों तथा उनसे उत्पन्न दोषों के निवारण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेष रूप से महिलाएँ इस दिन ‘सामा’ का आहार ग्रहण करके यह व्रत करती हैं।इस दिन ऋषिपंचमी का व्रत करते हुए सप्तर्षियों की श्रद्धापूर्वक पूजा करने से मनुष्य जाने-अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति प्राप्त करता है। यह हमारे उन महान ऋषियों और प्रतापी पूर्वजों का स्मरण करने का दिन है, जिन्होंने सदैव मानव समाज के सुख, समृद्धि और कल्याण की चिंता की।सप्तम मन्वंतर के सात ऋषियों ने मानवजाति को सुखी और समृद्ध बनाने में अद्वितीय योगदान दिया। आज इन सात ऋषियों का स्मरण कर उनके जीवन से प्रेरणा प्राप्त करने का पर्व है। नई पीढ़ी को इन सप्तर्षियों का संक्षिप्त परिचय अवश्य देना चाहिए।१. कश्यप ऋषिब्रह्माजी के मानसपुत्र मरीचि ऋषि के वे पुत्र थे। सृष्टि के निर्माण में उनके महत्वपूर्ण योगदान के कारण उन्हें प्रजापति के रूप में भी जाना जाता है। आज भी धार्मिक विधियों के समय यदि किसी व्यक्ति को अपने गोत्र की जानकारी न हो, तो उसे कश्यप गोत्र बताया जाता है।२. अत्रि ऋषिअत्रि ऋषि की पत्नी माता अनसूया की कथा सभी ने सुनी होगी। उन्होंने अपने तप के प्रभाव से ब्रह्मा, विष्णु और महेश को छोटे बालक बना दिया था। महान अत्रि ऋषि भगवान दत्तात्रेय और दुर्वासा ऋषि के पिता थे। उनके तीसरे पुत्र सोम ने सोमनाथ ज्योतिर्लिंग की स्थापना की थी।३. वसिष्ठ ऋषिवसिष्ठजी रघुवंश के कुलगुरु थे और इस प्रकार वे भगवान श्रीराम के भी कुलगुरु थे। वे महान ऋषि पराशर के दादा तथा महाभारत सहित अनेक ग्रंथों के रचयिता वेदव्यासजी के परदादा थे।४. विश्वामित्र ऋषिविश्वामित्र पहले राजवीर थे और बाद में राजपाट त्यागकर तपस्या के मार्ग पर चले गए। वे भगवान परशुराम के पिता जमदग्नि ऋषि के मामा थे। जमदग्नि ऋषि की माता सत्यवती और विश्वामित्र, दोनों गाधि राजा की संतान थे।५. गौतम ऋषिगौतम ऋषि को न्यायशास्त्र का महान विद्वान माना जाता है। वे रसायन विज्ञान सहित विभिन्न विषयों के ज्ञाता थे। उनकी पुत्री अंजनी भगवान हनुमानजी की माता थीं। इस प्रकार गौतम ऋषि भगवान हनुमानजी के नाना थे।६. जमदग्नि ऋषिजमदग्नि ऋषि रुचिक ऋषि के पुत्र थे। उनकी माता सत्यवती, विश्वामित्र की बहन थीं; इसलिए वे विश्वामित्र ऋषि के भांजे थे। माता सत्यवती उन्हें तपस्वी बनाना चाहती थीं, लेकिन उनमें क्षत्रिय जैसे शूरवीर के गुण भी विद्यमान थे। भगवान परशुराम उनके पुत्र थे।७. भारद्वाज ऋषिभारद्वाज ऋषि यंत्र विज्ञान के महान ज्ञाता माने जाते हैं। उनके नाम से संबद्ध ‘विमानिकम्’ ग्रंथ में विमान निर्माण की विधि का विस्तृत वर्णन बताया जाता है। ‘यंत्र सर्वस्वम्’ नामक ग्रंथ में यंत्रों के विज्ञान का वर्णन मिलता है। भारद्वाज ऋषि के पुत्र द्रोणाचार्य कौरवों और पांडवों के गुरु थे।इन सप्तर्षियों का स्मरण और पूजन किया जाता है। मान्यता है कि ऋषिपंचमी का व्रत करने से मनुष्य विभिन्न दोषों से मुक्त होता है।ऋषिपंचमी के इस पावन पर्व पर सप्तर्षियों सहित हमारे सभी दिवंगत पूर्वजों के पावन चरणों में कोटि-कोटि प्रणाम।सभी को ऋषिपंचमी की हार्दिक शुभकामनाएँ। |
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| 11 September 2026 |
| सजा नहीं संवाद है, समाधान; बच्चों के झूठ बोलने की छुड़ाएँ आदत - कुम कुम काबरा |
| आज के समय में बच्चों की परवरिश माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। बदलते सामाजिक परिवेश, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तकनीक के प्रभाव के बीच बच्चों के व्यवहार में भी कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। इन्हीं में से एक है छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलने की आदत। कभी होमवर्क पूरा न करने पर, कभी गलती छिपाने के लिए तो कभी डाँट या सजा के डर से बच्चे सच बताने से बचने लगते हैं। यह स्थिति कई अभिभावकों को परेशान कर देती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के झूठ बोलने की आदत को केवल डाँट-फटकार से नहीं, बल्कि धैर्य, समझदारी और सही मार्गदर्शन से सुधारा जा सकता है। यदि माता-पिता समय रहते कारणों को समझ लें और उचित व्यवहार अपनाएँ, तो बच्चे धीरे-धीरे ईमानदारी की ओर बढ़ सकते हैं।गुस्से के बजाय शांत तरीके से करें बात—जब बच्चा झूठ बोलते हुए पकड़ा जाए तो अधिकांश माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया गुस्सा होती है। वे डाँटने और सजा देने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे अक्सर इसलिए झूठ बोलते हैं क्योंकि उन्हें सच बताने पर डाँट का डर रहता है। ऐसे में यदि माता-पिता शांत रहकर उसकी बात सुनें और समझने की कोशिश करें कि उसने झूठ क्यों बोला, तो बच्चा अधिक सहज महसूस करेगा। उसे यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि सच बोलने पर उसकी बात सुनी जाएगी और उसे समझा जाएगा। इससे उसके मन का डर कम होगा और वह भविष्य में सच बोलने के लिए अधिक तैयार रहेगा।सच बोलने पर करें तारीफ—बच्चों में सकारात्मक व्यवहार विकसित करने का सबसे प्रभावी तरीका उसकी सराहना करना है। जब बच्चा अपनी गलती स्वीकार कर ले या किसी मुश्किल स्थिति में सच बोलने का साहस दिखाए, तो उसकी प्रशंसा अवश्य करें। इससे उसे यह महसूस होगा कि ईमानदारी एक अच्छी बात है। छोटी-छोटी ईमानदार बातों पर भी उनकी तारीफ करनी चाहिए। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह समझता है कि सच बोलने से सम्मान मिलता है, जबकि झूठ केवल स्थायी राहत देता है। |
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| 05 September 2026 |
| देश हित की बात — आपदा में प्रबंधन और सेवा-सहयोग : मधु भूतड़ा 'अक्षरा' |
| आपदा कभी चेतावनी देकर नहीं आती। भूकंप, बाढ़, भूस्खलन, चक्रवात, बादल फटना या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा के सामने कुछ ही क्षणों में सामान्य जीवन अस्त-व्यस्त हो जाता है। ऐसे समय में सरकार की तैयारियों के साथ-साथ समाज की संवेदनशीलता, प्रशासन का समन्वय और नागरिकों की सेवा-भावना तीनों की परीक्षा होती है।भारत की पहचान केवल एक बड़े देश के रूप में नहीं, बल्कि “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को व्यवहार में उतारने वाले राष्ट्र के रूप में भी रही है। जब किसी दूसरे देश पर संकट आता है, भारत की सहायता की भावना सीमाओं तक सीमित नहीं रहती।अगस्त-सितंबर 2026 वर्तमान में नेपाल की भीषण बाढ़ के समय भी भारत ने मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए राहत सामग्री, बचाव विशेषज्ञों और तकनीकी दलों को भेजकर पड़ोसी धर्म निभाया है।25 अप्रैल 2015 को नेपाल में 7.8 तीव्रता का विनाशकारी भूकंप आया। हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में इमारतें तथा बुनियादी ढाँचा क्षतिग्रस्त हुआ। भारत ने बिना समय गंवाए “ऑपरेशन मैत्री” शुरू किया और राहत एवं बचाव दल नेपाल भेजे।राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF की 16 विशेष खोज एवं बचाव की संवेदनशीलता का एक उल्लेखनीय उदाहरण यह भी रहा कि मलबे से मिले सोने के आभूषण और मुद्रा जैसी मूल्यवान वस्तुएँ सुरक्षित रखकर नेपाली अधिकारियों को सौंप दी गईं। आपदा के बीच भी ईमानदारी और मानवीय मूल्यों की यह मिसाल अपने आप में बहुत कुछ कहती है।यह केवल पड़ोसी की सहायता नहीं थी, यह उस भारतीय संस्कार की अभिव्यक्ति थी, जिसमें संकट में पड़े व्यक्ति की सहायता करना अपना कर्तव्य माना जाता है।भारत कभी भी आपदाओं में पीछे नहीं रहा, अनेकों देश इसको बखूबी जानते हैं। नेपाल, तुर्किये, सीरिया, श्रीलंका, म्यांमार, बांग्लादेश, फिजी, फिलीपींस, इंडोनेशिया, मोजाम्बिक, मालदीव, मॉरीशस, मेडागास्कर, पापुआ न्यू गिनी, कोमोरोस, सेशेल्स, कांगो गणराज्य, यमन, लीबिया, ग्वाटेमाला इत्यादि जैसे दूसरे देशों की सहायता करने वाला भारत अपने देशवासियों के संकट में भी लगातार मोर्चे पर खड़ा रहा है।अपने देश में भी उत्तराखंड की त्रासदी, चेन्नई की बाढ़, केरल की बाढ़ और वायनाड के भूस्खलन जैसी अनेक आपदाओं में NDRF, सेना, वायुसेना, स्थानीय प्रशासन और स्वयंसेवी संगठनों ने मिलकर हजारों लोगों की जान बचाई और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुँचाई।इन उदाहरणों से स्पष्ट है कि आधुनिक भारत में आपदा प्रबंधन केवल राहत सामग्री पहुँचाने तक सीमित नहीं रहा। आज हमारे पास प्रशिक्षित बचाव बल, विशेष उपकरण, मेडिकल सहायता, खोजी श्वान दस्ते, नावें, पर्वतीय बचाव क्षमता और आपदा के अनुरूप प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हैं।आपदा के समय स्थानीय प्रशासन, पुलिस, सेना, NDRF, SDRF, चिकित्सा दल, स्वयंसेवी संस्थाएँ, सामाजिक संगठन और सामान्य नागरिक सभी की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।दवा, भोजन, सुरक्षित स्थान और जीवन के लिए सहायता, उनके परिजनों को ढूँढने में मदद करना मानवता का फर्ज भारत यूँ तो सदैव निभाता रहा है।दुर्भाग्य से हर आपदा के समय लूटपाट, चोरी, जमाखोरी, राहत सामग्री की कालाबाजारी, फर्जी राहत माँग और अफवाह फैलाने जैसी घटनाएँ भी मानवता को शर्मसार कर देती हैं।जिस समय किसी का घर उजड़ चुका हो, परिवार बिछड़ चुका हो और जीवन बचाने के लिए संघर्ष चल रहा हो, उस समय किसी की मजबूरी का लाभ उठाना केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि मानवीयता के विरुद्ध घिनौना कृत्य है।आपदा प्रबंधन अधिनियम में राहत के लिए रखी धनराशि या सामग्री के दुरुपयोग तथा फर्जी राहत दावों के लिए दंड का प्रावधान है। राहत कार्य में बाधा डालना और आपदा के संबंध में झूठी चेतावनी फैलाकर भय पैदा करना भी दंडनीय है।बचाव दलों के काम में बाधा न डालें।अनावश्यक भीड़ न लगाएँ।अफवाहों को आगे न बढ़ाएँ।राहत सामग्री केवल आवश्यकता के अनुसार लें।जरूरतमंद, बुजुर्ग, बच्चे, दिव्यांग और अकेले रह गए लोगों को प्राथमिकता दें।रक्तदान, भोजन, कपड़े और आवश्यक वस्तुओं का सहयोग अधिकृत संस्थाओं के माध्यम से करें।और सबसे महत्वपूर्ण है कि किसी की मजबूरी को अपने लाभ का अवसर न बनाएँ।आपदा में घर टूटते हैं, सड़कें और पुल भी, लेकिन उसी समय बनते हैं इंसानियत के पुल भी।आपदा की घड़ी में प्रशासन की तत्परता, बचाव दलों की बहादुरी, सामाजिक संस्थाओं की सक्रियता और नागरिकों की संवेदनशीलता, जब एक साथ आती है, तभी आपदा प्रबंधन प्रभावी बनता है।भारत ने संकट में अपने नागरिकों के साथ खड़े होकर और सीमाओं के पार भी सहायता का हाथ बढ़ाकर बार-बार यह सिद्ध किया है कि मानवता की कोई सीमा नहीं होती।भूकंप हो, बाढ़, भूस्खलन या चक्रवात, कुछ ही क्षणों में जीवन की पूरी व्यवस्था बदल जाती है। ऐसे समय में प्रशासन की तत्परता के साथ समाज की संवेदनशीलता और नागरिकों का सहयोग सबसे बड़ी ताकत बनता है।आपदा की घड़ी मानवता की भी परीक्षा होती है।"आपदा में जो हाथ बढ़ेवही सच्चा सहयोग हैदुख में जो साथ खड़ा रहेवही मानवता का योग हैटूटे घर फिर बन जाएँगेमिट जाएँगे घावसेवा और संवेदना से हीमजबूत होगा देश और समाज।"संकट की घड़ी में भारत ताकत है।देश हित की बात में अंत में यही याद रखना है कि किसी की पीड़ा मेंहमारा छोटा-सा सहयोग भीकिसी के जीवन की बड़ी उम्मीद बन सकता है। |
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| 28 September 2026 |
| पंचांग और राशिफल |
| श्री गणेशाय नमः आज का पञ्चाङ्गदिनांक:- 28 सितंबर 2026वार :- सोमवारविक्रम संवत् :- 2083अयन:- दक्षिणायनऋतु :- शरदमास:- भाद्रपदपक्ष :- शुक्लतिथि :- द्वितीया :- 07:12pm तक पश्चात:- तृतीयानक्षत्र :- रेवती :-10:16am अनुराधायोग : बवकरण :- कौलवसूर्यराशि :- कन्याचंद्रराशि :- मीनदिशाशूल :- पूर्वसूर्योदय :- 06:25amसूर्यास्त :- 06:33pmराहुकाल का समय 7:35am से 09:20am तक अभिजित मुहूर्त :-11:55pm से 12:45pm तकब्रह्म मुहूर्त:- 05:45am से 06:28amआज व्रत एवं त्यौहारवार विशेषआज का वार :- सोमवारअधिदेव :- जल* यदि कुंडली में चंद्रमा पीड़ित या कमजोर है तो सोमवार को मोती चांदी में धारण करना चाहिए, जब तक आप मोती धारण नहीं करते है तब तक आप चंद्रमा का मंत्र जाप कर सकते हैं । सफेद चंदन का तिलक लगा सकते हैं । खिरनी का जड़ धारण कर सकते हैं । मंत्र :-* ।। ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः ।।* यदि चंद्रमा फलादेश के हिसाब से किसी प्रकार की परेशानी दे रहा हो तो चंद्रमा का दान शिव मंदिर में करना चाहिए ।दान :-* पूर्णिमा की रात्रि को खीर बनाकर छत पर चंद्रमा की रोशनी में रखें ( चलनी से ढक देना चाहिए ताकि कोई कीड़ा उसमें ना पड़े ) दूसरे दिन प्रातः उसको प्रसाद के रूप में ग्रहण करें ।उपाय :-* चंद्रमा किसी भी ग्रह को शत्रु दृष्टि से नहीं देखता है । बहुत कम ही देखा गया है कि चंद्रमा प्रबल होकर किसी प्रकार की परेशानी करे । परंतु फिर भी यदि ऐसा होता है तो चंद्रमा से संबंधित दान एवं उपाय करना चाहिए । दान :-* सफेद वस्त्र , दूध , चावल , शंख , मोती , सफेद चंदन , मिश्रीसोमवार को करणीय कार्य :-* सभी कार्यों के लिए शुभवार संज्ञा : -* सोमवार को चर संज्ञा दी गई हैघात वार :-* दी गई राशि राशि वालो के लिए वार अशुभ होता है इन वार में वह जातक यथासंभव यात्रा का त्याग करेंवार:- सोमवारराशि :- मिथुनअशुभ फल नाशक पदार्थ :-* अगर किसी जातक का चंद्रमा अशुभ हो तो वह जातक दूध या खीर का सेवन अथवा दान कर सकता है जिससे की अशुभता नाश होगी।राशिफलमेष राशि :-आज कार्यक्षेत्र में अपने साहसिक निर्णयों से आप दबाव को कम कर सकते हैं। हालाँकि, आपको एकाग्रता बनाए रखने की आवश्यकता होगी। परिवार में किसी के साथ एक साधारण वार्तालाप भी एक नए पहलू को उजागर कर सकता है। रिश्तों में थोड़ी स्पष्टता के लिए यह सही समय है। मानसिक शांति को लेकर थोड़ी बेचैनी रह सकती है, जो दिन के अंत तक सुलझ जाएगी। स्वास्थ्य पर ध्यान दें, क्योंकि आज ऊर्जा थोड़ी कम हो सकती है।वृषभ राशि :-आज आपकी आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार देखने को मिल सकता है, लेकिन खर्चों पर नियंत्रण रखें। कार्यक्षेत्र में आपको नई जिम्मेदारियाँ निभाने का अवसर मिलेगा, जिसमें धैर्य और सावधानी की आवश्यकता होगी। परिवार में किसी सदस्य के साथ छोटी सी असहमति को शांति से सुलझाना महत्वपूर्ण है। कार्य में थोड़ी रुकावटें आ सकती हैं, लेकिन आप जल्द ही इसे पार कर लेंगे। स्वास्थ्य को देखते हुए अतिरिक्त सावधानी बरतें, विशेषकर वित्तीय कार्यों में।मिथुन राशि :-आज कार्यक्षेत्र में किसी सहकर्मी के साथ बातचीत से नए अवसर खुल सकते हैं। सावधानी से सुनें और अपने विचार साझा करें। वित्तीय मामलों में थोड़ी सावधानी बरतें, विशेषकर जब कोई नया निवेश सामने आए। परिवार में किसी प्रियजन के साथ समय बिताना मन को शांति देगा। शाम तक, आप परिवार के साथ आनंददायक समय बिता सकते हैं। स्वास्थ्य के मामले में थोड़ी सुस्ती रहेगी, इसलिए व्यक्तिगत योजनाओं को सीमित रखें।कर्क राशि :-आज आर्थिक मोर्चे पर कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन अनावश्यक खर्चों से बचें। कार्यक्षेत्र में आपको छोटी-छोटी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, लेकिन अपनी सूझबूझ से इन्हें पार कर लेंगे। परिवार के किसी सदस्य के साथ समय बिताना आपके रिश्ते को मजबूत बनाएगा। थोड़ा मानसिक तनाव हो सकता है, जिसे आप शाम तक कम कर सकते हैं। सेहत के लिहाज से गैर-जरूरी खर्चों से बचना जरूरी होगा।सिंह राशि :-आज वित्तीय मामलों में कुछ राहत मिल सकती है, लेकिन नई आर्थिक प्रतिबद्धताओं से बचें। कार्यक्षेत्र में कुछ दबाव महसूस हो सकता है, लेकिन धैर्य से काम लें। परिवार के किसी सदस्य के साथ समय बिताना आपके रिश्ते को बेहतर करेगा। दिन के अंत तक, पारिवारिक माहौल में सुधार हो सकता है। सेहत के दृष्टिकोण से नई आय प्रतिबद्धताओं से बचना महत्वपूर्ण होगा।कन्या राशि :-आज आपके कार्यक्षेत्र में कुछ सफलता मिल सकती है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा। वित्तीय मामलों में संतुलन बनाए रखें और सोच-समझकर निर्णय लें। परिवार के किसी सदस्य के साथ छोटी-मोटी असहमति हो सकती है, जिसे संभालना जरूरी होगा। शाम तक परिवार का माहौल बेहतर होगा। सेहत के मामले में कार्य की गति थोड़ी धीमी रह सकती है, इसलिए योजना बनाकर काम करें।तुला राशि :-आज यात्रा के लिए अनुकूल दिन है, इससे आपको नए अनुभव और लाभ मिल सकते हैं। कार्यक्षेत्र में भी कुछ नई संभावनाएँ खुल सकती हैं, जिनका फायदा उठाने से न चूकें। परिवार के साथ किसी कार्यक्रम में शामिल होकर खुशी प्राप्त कर सकते हैं। शाम तक पारिवारिक माहौल खुशनुमा रहेगा। सेहत के मामले में आज नए कार्यों से दूरी बनाए रखना सही होगा।वृश्चिक राशि :-आज आपके मानसिक शांति को लेकर कुछ तनाव हो सकता है, लेकिन ध्यान और प्रबंधन से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। कार्यक्षेत्र में आपके धैर्य की परीक्षा हो सकती है, इसलिए सावधानी बरतें। परिवार में किसी के साथ छोटी-मोटी असहमति हो सकती है, जिसे शांति से सुलझाना जरूरी है। शाम तक, घर में माहौल बेहतर हो सकता है। सेहत के मामले में केवल अत्यावश्यक कार्यों पर ध्यान दें।धनु राशि :-आज परिवार के साथ समय बिताने से आपको मानसिक शांति मिलेगी। हालांकि, कुछ पारिवारिक मुद्दे हल करने में धैर्य रखना होगा। मानसिक शांति के लिए ध्यान और योग का सहारा लें। कार्यक्षेत्र में आपके प्रयासों की सराहना हो सकती है। शाम तक, आप परिवार के साथ सुखद समय बिता सकते हैं। स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से रिश्तों में अतिरिक्त धैर्य की आवश्यकता होगी।मकर राशि :-आज आपकी शारीरिक ऊर्जा चरम पर रहेगी, जिससे आप सभी कार्य सुचारू रूप से कर पाएंगे। कार्यक्षेत्र में कुछ नई योजनाओं पर काम करने का मौका मिलेगा, जो आपके दीर्घकालिक लक्ष्यों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। परिवार में किसी के साथ समय बिताने से संबंधों में मधुरता आएगी। शाम तक, आप परिवार के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं। सेहत मजबूत रहेगी, जिससे दिनभर की चुनौतियों का सामना आसानी से कर सकेंगे।कुम्भ राशि :-आज शिक्षा के क्षेत्र में कुछ नया सीखने का अवसर मिल सकता है, जो आपके कौशल को बढ़ाएगा। कार्यक्षेत्र में कुछ तनाव महसूस हो सकता है, लेकिन आपका दूरदर्शी दृष्टिकोण इसे नियंत्रित करने में मदद करेगा। परिवार के किसी सदस्य के साथ समय बिताना आपके मन को शांति देगा। शाम तक, स्थिति बेहतर हो सकती है। सेहत को ध्यान में रखते हुए रचनात्मक कार्यों पर ध्यान केंद्रित रखें।मीन राशि :-आज परिवार में कोई मुद्दा सामने आ सकता है, जिसे संवेदनशीलता से संभालने की आवश्यकता है। शिक्षा के क्षेत्र में आपकी रुचि बढ़ेगी, और आप कुछ नया सीख सकते हैं। कार्यक्षेत्र में आपके प्रयासों की सराहना होगी। शाम तक, आप अपने लक्ष्यों की ओर एक कदम और बढ़ सकते हैं। स्वास्थ्य के मामले में घर के सबसे जरूरी काम पर ही ध्यान दें।*आज का विचार*जो हो रहा है जैसा हो रहा है सब भगवान की कृपा से ही हो रहा है |
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| 26 September 2026 |
| गणपति विसर्जन पर माहेश्वरी नवयुवक मंडल सूरत ने की शीतल जल, चाय व शरबत सेवा |
| सेवा, त्याग एवं सदाचार के सिद्धांतों पर आधारित सूरत माहेश्वरी समाज की सबसे पुरानी संस्था माहेश्वरी नवयुवक मंडल की ओर से गणपति विसर्जन के अवसर पर गणेश भक्तों के लिए शीतल जल, चाय एवं शरबत सेवा का आयोजन किया गया। प्रति वर्ष की भांति इस वर्ष भी 25 सितंबर 2026 को गणपति बप्पा की विदाई के अवसर पर रिंग रोड स्थित पुराने आरटीओ के सामने, गांधी कॉलेज बस स्टैंड पर पूरे दिन सेवा शिविर लगाया गया। गणपति विसर्जन में शामिल होने वाले श्रद्धालुओं को शीतल जल, चाय एवं शरबत वितरित कर मंडल के सदस्यों ने सेवा एवं सामाजिक सरोकार का परिचय दिया।सेवा कार्य में गुजरात प्रान्त के सचिव पवन बजाज, सूरत जिला माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष अतीन बाहेती, सचिव भगवतीप्रसाद गग्गड़, माहेश्वरी नवयुवक मंडल के पूर्व अध्यक्ष विनोद बियानी, हनुमान लोहिया, योगेश भांगडिय़ा, विजय धूत, नारायण पेड़ीवाल एवं पवन चांडक सहित जिले के पदाधिकारियों की उपस्थिति रही।इस अवसर पर निवर्तमान अध्यक्ष हरिप्रकाश पेड़ीवाल, अध्यक्ष विष्णुप्रसाद राठी, उपाध्यक्ष गौरीशंकर राठी, सचिव मालचंद चांडक, कोषाध्यक्ष दिनेश चांडक सहित समस्त कार्यकारिणी सदस्य एवं आमंत्रित सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। सूरत की अन्य सामाजिक संस्थाओं के पदाधिकारियों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं की उपस्थिति भी सराहनीय रही।माहेश्वरी नवयुवक मंडल द्वारा आयोजित इस सेवा कार्य को उपस्थित सदस्यों एवं समाजबंधुओं का उत्साहपूर्ण सहयोग मिला। आयोजन के माध्यम से गणपति विसर्जन में शामिल श्रद्धालुओं को आवश्यक पेय पदार्थ उपलब्ध कराने के साथ सेवा भावना का संदेश भी दिया गया। |
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| 26 September 2026 |
| सूरत में गणपति विसर्जन पर जलसेवा |
| अड़ाजन घोड़दोड़ रोड माहेश्वरी सभा एवं श्री राम भक्त मंडल, सूरत के संयुक्त तत्वावधान में गणपति विसर्जन के अवसर पर गणेश भक्तों के लिए पानी की परब का आयोजन किया गया। सरदार कॉम्प्लेक्स, गुजरात गैस सर्कल, अड़ाजन में आयोजित इस सेवा कार्य के दौरान बड़ी संख्या में गणेश भक्तों को शीतल पेयजल उपलब्ध कराया गया।अड़ाजन घोड़दोड़ रोड माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष श्री सुनील माहेश्वरी ने बताया कि इस अवसर पर लगभग 8,000 पानी की बोतलों का वितरण गणेश भक्तों के बीच किया गया। उन्होंने बताया कि सभा द्वारा पिछले 27 वर्षों से गणपति विसर्जन के अवसर पर निरंतर इसी प्रकार जलसेवा की जा रही है। सेवा की यह निरंतरता सामाजिक सरोकार और जनसेवा के प्रति सभा की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।कार्यक्रम में गुजरात प्रांत के सचिव श्री पवन बजाज, सूरत जिला माहेश्वरी सभा के अध्यक्ष श्री अतीन बाहेती, कोषाध्यक्ष श्री रामसहाय सोनी, प्रचार-प्रसार मंत्री श्री महेश खटोड, संयुक्त मंत्री श्री पवन चांडक (नीलकंठ संभाग), संयुक्त मंत्री श्री कृष्ण कुमार तापडिय़ा (महादेव संभाग) तथा अड़ाजन घोड़दोड़ रोड माहेश्वरी सभा के सचिव श्री प्रवेश मोहता सहित समाज के अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।सेवा कार्य में श्री नारायण पेड़ीवाल, श्री बल्लू बाहेती, श्री योगेश भांगदिया, श्री ओमप्रकाश देवपुरा, श्री सुशील फोफलिया, श्री ओमप्रकाश बिड़ला, श्री राधाकिशन मूंदड़ा, श्री घनश्याम सोनी, श्री कमल बजाज सहित अनेक सेवाभावी कार्यकर्ताओं का विशेष सहयोग रहा। सभी कार्यकर्ताओं ने सक्रिय सहभागिता निभाते हुए गणेश भक्तों को पानी उपलब्ध कराया। |