समाज की मजबूती का आधार - समाज अंतर्गत वैवाहिक संबंधों को बढ़ावा देने की आवश्यकता - श्रीगोपाल तापडिय़ा, अहमदाबाद

माहेश्वरी समाज अपनी गौरवशाली परंपराओं, उच्च संस्कारों, सामाजिक एकता और पारिवारिक मूल्यों के लिए सदैव जाना जाता रहा है। समय-समय पर समाज के पूर्वजों ने अपने दूरदर्शी विचारों और आपसी सहयोग से ऐसी मजबूत सामाजिक व्यवस्था का निर्माण किया, जिसने पीढिय़ों तक समाज को संगठित और समृद्ध बनाए रखा।

किन्तु वर्तमान कलियुग में बदलती जीवनशैली, व्यस्तता, सीमित सामाजिक संपर्क और आधुनिक सोच के कारण समाज के भीतर वैवाहिक संबंध स्थापित करना पहले की अपेक्षा अधिक चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। यदि समय रहते इस विषय पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया, तो भविष्य में समाज की एकता और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो सकती है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हम सभी व्यक्तिगत संकोच और औपचारिकताओं से ऊपर उठकर समाजहित में एक सकारात्मक पहल करें। विवाह योग्य युवक-युवतियों के बायोडाटा एवं आवश्यक जानकारी समाज के अधिकृत और विश्वसनीय सामाजिक मंचों, स्थानीय संगठनों तथा पारिवारिक समूहों के माध्यम से साझा की जाए, ताकि योग्य परिवार एक-दूसरे से सहज रूप से जुड़ सकें।

हमारे बुजुर्गों के समय आधुनिक तकनीक और संचार के साधन नहीं थे, फिर भी सामाजिक मेल-मिलाप, पारिवारिक कार्यक्रमों और विवाह समारोहों में आपसी परिचय से अनेक श्रेष्ठ वैवाहिक संबंध स्थापित हो जाते थे। आज जबकि मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया जैसे प्रभावी माध्यम हर व्यक्ति की पहुँच में हैं, तो उनका उपयोग समाज के हित में क्यों न किया जाए?

यह पहल केवल विवाह तय कराने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज को एक सूत्र में बाँधने, नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोडऩे और पारस्परिक विश्वास को मजबूत करने का भी सशक्त माध्यम बन सकती है। जब समाज के सदस्य एक-दूसरे के परिवारों से परिचित होंगे, तो सामाजिक सहयोग, आत्मीयता और अपनापन भी स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा।

विशेष रूप से इस पावन पुरुषोत्तम मास में यदि हम सभी नि:स्वार्थ भाव से इस समाजोपयोगी अभियान का संकल्प लें, तो यह आने वाले वर्षों में समाज के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकता है। यह किसी एक व्यक्ति या संस्था का कार्य नहीं, बल्कि प्रत्येक समाजबंधु की सामूहिक जिम्मेदारी है।

आइए, हम सभी मिलकर एक ऐसे अभियान की शुरुआत करें, जिसमें—

समाज का भला हो।

समाज का हित हो।

समाज का कल्याण हो।

समाज का सुंदर और सशक्त निर्माण हो।

जैसा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने कहा है—

सब नर करहिं परस्पर प्रीति, चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति।

यदि हम परस्पर प्रेम, सहयोग और समाजहित की भावना के साथ आगे बढ़ेंगे, तो निश्चित ही हमारा माहेश्वरी समाज आने वाली पीढिय़ों के लिए भी उतना ही संगठित, संस्कारित और गौरवशाली बना रहेगा।

श्रीगोपाल तापडिय़ा, अहमदाबाद

मो. 9328013421, 8000083421 


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