मोक्ष प्रदायी पुरुषोत्तम मास - कुम कुम काबरा
पौराणिक मान्यता के अनुसार असुरराज हिरण्यकश्यप ने कठोर तपस्या करके ब्रह्माजी को प्रसन्न किया और ऐसा वरदान प्राप्त किया कि उसकी मृत्यु न किसी मनुष्य से हो, न पशु से; न घर के भीतर हो, न बाहर; न दिन में हो, न रात में; न किसी अस्त्र से हो, न किसी शस्त्र से। साथ ही यह भी कहा जाता है कि ब्रह्मा द्वारा निर्मित बारह महीनों में से किसी भी माह में उसकी मृत्यु न हो।
वरदान प्राप्त करने के बाद हिरण्यकश्यप अत्यंत अहंकारी हो गया और स्वयं को भगवान मानने लगा। भगवान विष्णु तथा उनके भक्त उसके सबसे बड़े शत्रु बन गए। भगवान विष्णु के परम भक्त अपने पुत्र प्रह्लाद को भी उसने अनेक बार मारने का प्रयास किया, किंतु हर बार भगवान की कृपा से प्रह्लाद की रक्षा हुई।
नरसिंह अवतार और अधिक मास -
हिरण्यकश्यप के अत्याचारों का अंत करने के लिए भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार धारण किया। लोकमान्यता के अनुसार उसके वध के लिए ब्रह्मा द्वारा निर्मित बारह महीनों से अतिरिक्त एक विशेष काल की आवश्यकता हुई। सूर्य और चंद्रमा की गति में अंतर के कारण प्रतिवर्ष लगभग 11 दिनों का अंतर उत्पन्न होता है, जो लगभग तीन वर्षों में एक अतिरिक्त मास के रूप में जुड़ जाता है। यही "अधिक मास" कहलाता है।
अधिक मास में सूर्य की कोई संक्रांति नहीं होती, इसलिए इसे लंबे समय तक मांगलिक कार्यों के लिए अनुपयुक्त माना गया। परिणामस्वरूप इसे "मलमास" कहकर तिरस्कृत किया जाने लगा। तब अधिक मास ने भगवान विष्णु से अपनी व्यथा प्रकट की कि पुण्य कार्यों के लिए उत्पन्न होने के बावजूद उसे सम्मान नहीं मिल रहा है।
भगवान विष्णु उसकी विनम्र प्रार्थना से द्रवित हुए और उसे अपना नाम "पुरुषोत्तम" प्रदान किया। तभी से अधिक मास "पुरुषोत्तम मास" के नाम से विख्यात हुआ और सभी महीनों में श्रेष्ठ माना जाने लगा।
पुरुषोत्तम मास की महिमा -
पुरुषोत्तम मास भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इस मास में किया गया जप, तप, व्रत, दान, सत्संग, कथा-श्रवण और भगवान के नाम का स्मरण विशेष फलदायी माना गया है। शास्त्रों में वर्णित है कि इस अवधि में किए गए पुण्य कर्म अनेक गुना फल प्रदान करते हैं तथा साधक को आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
अतः पुरुषोत्तम मास केवल एक अतिरिक्त मास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, भक्ति, साधना और ईश्वर के प्रति समर्पण का अनुपम अवसर है। यह हमें अहंकार का त्याग कर धर्म, भक्ति और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
कुम कुम काबरा
बरेली (उत्तर प्रदेश)
मौ ० नं -7017805455

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