| अदम्य साहस और सेवाभाव के लिए बाबुलाल सारड़ा कानपुर को 'राणा सांगा वीरता पुरस्कार' |
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सूरत। अदम्य साहस, असाधारण वीरता और नि:स्वार्थ समाजसेवा की मिसाल प्रस्तुत करने वाले छापर निवासी एवं कानपुर प्रवासी प्रतिष्ठित अनाज व्यापारी बाबुलाल सारड़ा को सूरत की सामाजिक संस्था टेक्सटाइल युवा ब्रिगेड द्वारा प्रतिष्ठित 'राणा सांगा वीरता पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। सूरत में आयोजित सम्मान समारोह में विभिन्न समाजसेवियों एवं संस्था पदाधिकारियों की उपस्थिति में उन्हें यह अलंकरण प्रदान करते हुए उनके साहस, संघर्षशील व्यक्तित्व और मानव सेवा के प्रति समर्पण की सराहना की गई। उल्लेखनीय है कि गत माह हुई एक गंभीर दुर्घटना में बाबुलाल सारड़ा बुरी तरह घायल हो गए थे। उनकी स्थिति इतनी गंभीर हो गई थी कि उन्हें जीवन और मृत्यु के बीच संघर्ष करते हुए वेंटिलेटर पर रहना पड़ा। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी उन्होंने अद्भुत साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया। स्वयं गंभीर स्वास्थ्य संकट से जूझने के बावजूद उन्होंने समाजसेवा और जरूरतमंदों की सहायता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता बनाए रखी। वेंटिलेटर पर रहते हुए भी उनके सेवाकार्य जारी रहने की भावना ने समाज के लोगों को विशेष रूप से प्रभावित किया। उनके इसी अदम्य साहस, जीवटता और सेवाभाव को देखते हुए संस्था ने उन्हें 'राणा सांगा वीरता पुरस्कार' से अलंकृत करने का निर्णय लिया। सम्मान समारोह में जापान मार्केट को-ऑपरेटिव सर्विस सोसाइटी लिमिटेड के अध्यक्ष ललित शर्मा ने बाबुलाल सारड़ा के व्यक्तित्व एवं सेवाकार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि सारड़ा एक प्रामाणिक, प्रतिष्ठित और सफल व्यापारी होने के साथ-साथ अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति भी हैं। उनका जीवन मानवीय संवेदनाओं, परोपकार और समाज के प्रति उत्तरदायित्व का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि सारड़ा गरीबों, दीन-दुखियों, पीडि़तों और असहाय व्यक्तियों की सहायता के लिए दिन-रात तत्पर रहते हैं। जरूरतमंद व्यक्ति की पीड़ा को अपनी पीड़ा समझकर उसकी मदद के लिए आगे आना उनके व्यक्तित्व की विशेष पहचान है। समाज में ऐसे व्यक्तित्व विरले ही मिलते हैं, जो स्वयं कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए भी दूसरों के कल्याण की भावना को सर्वोपरि रखते हैं। ललित शर्मा ने कहा कि वास्तविक शौर्य केवल विपरीत परिस्थितियों का सामना करने में नहीं, बल्कि अपनी जान की परवाह किए बिना पीडि़त और जरूरतमंद व्यक्ति की सहायता के लिए आगे आने में निहित है। बाबुलाल सारड़ा में साहस, संवेदनशीलता और परोपकार के ये गुण कूट-कूटकर भरे हुए हैं। उनके जीवन का संघर्ष और सेवाकार्य समाज के लिए अनुकरणीय हैं। उन्होंने कहा, ''ऐसे व्यक्ति विरले ही होते हैं। बाबुलाल सारड़ा अदम्य साहस की प्रतिमूर्ति हैं। इनके सेवाकार्य अद्वितीय हैं और ये गरीब, दीन-दुखियों तथा असहायों की मदद के लिए दिन-रात तत्पर रहते हैं। इन्हें राणा सांगा अलंकरण से सम्मानित करके हम स्वयं को सम्मानित महसूस कर रहे हैं।'' समारोह के दौरान वक्ताओं ने कहा कि इतिहास में राणा सांगा का नाम अद्वितीय वीरता, साहस, संघर्ष और दृढ़ संकल्प के लिए आदरपूर्वक लिया जाता है। बाबुलाल सारड़ा ने भी जीवन की अत्यंत कठिन परिस्थितियों में जिस प्रकार साहस और सेवाभाव का परिचय दिया, वह प्रेरणादायी है। इसी भावना के अनुरूप उन्हें राणा सांगा वीरता अलंकरण प्रदान किया गया। इस अवसर पर ललित शर्मा ने घोषणा की कि बाबुलाल सारड़ा को भविष्य में 'राणा बाबुलाल सांगा' के नाम से भी जाना जाएगा। उपस्थित समाजसेवियों एवं पदाधिकारियों ने इस सम्मान का स्वागत करते हुए उनके सेवाकार्यों और साहसिक व्यक्तित्व की भूरि-भूरि प्रशंसा की। सम्मान प्राप्त करने के पश्चात बाबुलाल सारड़ा ने टेक्सटाइल युवा ब्रिगेड, समारोह के आयोजकों, समाजसेवियों तथा उपस्थित सभी शुभचिंतकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि समाज की सेवा और जरूरतमंदों की सहायता करना उनके जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। वे भविष्य में भी अपनी सामथ्र्य के अनुसार गरीबों, पीडि़तों और असहायों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहेंगे। समारोह में उपस्थित समाजसेवियों ने बाबुलाल सारड़ा के शीघ्र पूर्ण स्वस्थ होने तथा उनके दीर्घायु एवं सेवामय जीवन की कामना की। वक्ताओं ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी मानवता की सेवा के प्रति उनका समर्पण समाज, विशेषकर युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत है। |
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| 26 October 2026 |
| शरद पूर्णिमा |