| शरद पूर्णिमा |
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एकटक निहार रही हूँ चांद को चुपके से ये मन छूना चाहता है पूर्णिमा की इन धवल किरणों को उजियारा करना बहुत भाता है। झूमते-नाचते शाखों पर पत्ते गुनगुनाती मुस्काती मंद हवाएं आँगन में उतरी ओस की बूंदे सितारें नभ पर झिलमिलाएं।
मधु भूतड़ा 'अक्षरा'
गुलाबी नगरी जयपुर से (संपादिका, लेखिका, कवयित्री) मोबाइल - 9828153965 #ekpehal #ekpehalbymadhubhutra M : +91 9828153965 |
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| 26 October 2026 |
| शरद पूर्णिमा |