| गोदावरीबाई किशनलालजी बूब शैक्षणिक सहायता ट्रस्ट के सौजन्य से हुआ आध्यात्मिक आयोजन |
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नाशिक। श्रीमती गोदावरीबाई किशनलाल बूब (माहेश्वरी) शैक्षणिक सहायता ट्रस्ट, नाशिक के सौजन्य से अधिक मास के पावन अवसर पर श्री सटवाई माताजी मंदिर, चांदवड में 'श्री विष्णु सहस्रनाम यज्ञ' का दिव्य एवं भव्य आयोजन श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ सम्पन्न हुआ। महासभा की प्रेरणा से आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के बावजूद साधु-संतों, समाजबंधुओं, मातृशक्ति, विशेष अतिथियों, न्यासीगण, सनातन धर्मप्रेमियों एवं बच्चों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर यज्ञ में आहुतियां अर्पित कीं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीहरि से समाज के प्रत्येक परिवार के सुख, शांति, समृद्धि एवं कल्याण की प्रार्थना की। आयोजन ने समाजबंधुओं को एक सूत्र में जोडऩे के साथ पारस्परिक सद्भाव एवं आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने का संदेश दिया। इस अवसर पर अयोध्या निवासी पूज्य पं. श्री राघवशरणजी महाराज ने प्रेरणादायी प्रवचन दिया। उन्होंने कर्मेव गुरुरीश्वर: के गूढ़ संदेश की व्याख्या करते हुए कहा कि कर्म ही मनुष्य का वास्तविक सद्गुरु है। कर्म के माध्यम से ही मनुष्य अपने जीवन में महानता एवं आत्मोन्नति प्राप्त कर सकता है। उन्होंने श्रीमद्भगवद्गीता के सार को सरल एवं भावपूर्ण शब्दों में प्रस्तुत करते हुए श्रद्धालुओं को सत्कर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। आयोजन की सफलता में श्री सटवाई माताजी मंदिर के पूज्य महाराज श्री का स्नेहिल आशीर्वाद एवं सहयोग प्राप्त हुआ। ट्रस्ट की ओर से उनके प्रति आभार व्यक्त किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में समाजबंधुओं, शुभचिंतकों एवं सहयोगकर्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही। आयोजकों ने प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सहयोग देने वाले सभी लोगों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर ट्रस्ट के आधार स्तंभ एवं स्वर्गीय श्री प्रदीप बूब का श्रद्धापूर्वक स्मरण कर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई। उनके प्रेरणादायी व्यक्तित्व और समाजहित के संकल्प को सदैव मार्गदर्शक बताया गया। ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष श्री राजाराम भांगडिय़ा, सटाणा ने कहा कि पवित्र एवं जनकल्याणकारी संकल्प जब सामूहिक समर्पण से जुड़ता है, तो वह समाज में सकारात्मक ऊर्जा और नई प्रेरणा का संचार करता है। उन्होंने प्रार्थना की कि यह यज्ञ समाज, राष्ट्र एवं समस्त मानवता के लिए शांति, सद्भाव, समृद्धि और मंगल का कारण बने। वासुदेव: सर्वम् के आध्यात्मिक संदेश के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।
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