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समाज में चुनाव होते समय निर्णय सोच-समझकर लिया जाना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की नाराज़गी या कटुता उत्पन्न न हो। चुनाव न केवल सर्वसम्मति और सहमति की भावना से संपन्न हों, बल्कि समाज के लिए सर्वश्रेष्ठ एवं योग्य व्यक्ति का चयन भी सुनिश्चित हो। साथ ही, चुने गए पदाधिकारियों को अपने दायित्वों और कार्यों के प्रति पूर्ण निष्ठा रखनी चाहिए। चुनाव के बाद सभी पदाधिकारियों का समाज में घर-घर जाकर लोगों से मिलना, उनका हालचाल जानना तथा उनकी समस्याओं को समझना अत्यंत आवश्यक है। प्रत्यक्ष संवाद से समाज में विश्वास बढ़ता है और लोगों को यह अनुभव होता है कि उनके प्रतिनिधि वास्तव में उनके बीच हैं। यदि पदाधिकारी केवल चुनाव जीतने तक ही सीमित रह जाएँ और उसके बाद समाज से दूरी बना लें, तो समाज में निराशा और असंतोष का वातावरण बन जाता है। चुनाव के पश्चात पदाधिकारियों को समाज के प्रत्येक वर्ग—विशेषकर मध्यमवर्गीय एवं जरूरतमंद परिवारों—तक पहुँचना चाहिए। उनकी समस्याओं को सुनकर उनके समाधान के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। समाज के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए योजनाएँ बनाकर उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास होना चाहिए। इससे समाज में सकारात्मक वातावरण और आपसी विश्वास का निर्माण होगा। आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज के सभी सदस्य संगठन को केवल चुनाव तक सीमित न रखें, बल्कि उसे समाज सेवा का सशक्त माध्यम बनाएँ। समाज के विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, संस्कार और सामाजिक समरसता जैसे विषयों पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए। पदाधिकारियों का उद्देश्य केवल पद प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति तक पहुँचकर उसकी आवश्यकताओं को समझना और उनके समाधान के लिए कार्य करना होना चाहिए। पद किसी व्यक्ति की पहचान नहीं बनाता, बल्कि उसके कार्य और सेवा भावना ही उसे सम्मान दिलाते हैं। इसलिए प्रत्येक पदाधिकारी को अपने कार्यकाल में निष्पक्षता, पारदर्शिता और समर्पण के साथ समाज के हित में कार्य करना चाहिए। यदि ऐसा वातावरण बनेगा, तो समाज में चुनाव कभी भी विवाद का कारण नहीं बनेंगे, बल्कि विकास और संगठन की नई दिशा प्रदान करेंगे। समाज के सक्षम एवं संपन्न लोगों का भी यह दायित्व है कि वे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों, विद्यार्थियों और जरूरतमंदों की सहायता के लिए आगे आएँ। सामूहिक सहयोग और सहभागिता से ही समाज का समग्र विकास संभव है। केवल पद प्राप्त करना ही सफलता नहीं है, बल्कि उस पद के माध्यम से समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाना ही वास्तविक उपलब्धि है। इसी भावना के साथ यदि चुनाव लड़े जाएँ और पदाधिकारियों द्वारा समाज सेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, तो समाज निरंतर प्रगति करेगा। अंततः चुनाव केवल एक माध्यम हैं, लक्ष्य नहीं। हमारा वास्तविक लक्ष्य समाज का विकास, संगठन की मजबूती और प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाना होना चाहिए।
दिनेश गिलड़ा अध्यक्ष, मराठवाड़ा व्यापारी महासंघ, लातूर
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