| हम कौन होते हैं - मधु भूतड़ा 'अक्षरा' |
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सुनो यार छोड़ दो ना यह अहंकार मत समझो स्वयं को परवरदिगार इक दिन तो सबको जाना ही है फिर क्यूँ मन में भर रखा है नफरतों का संसार उसने मेरे साथ बुरा किया नहीं छोडूंगा उसको देखना भगवान उसको निश्चित ही सजा देगा ऐसी मानसिकता का करो मन से नकार सब बंधे हैं अपने भाग्य और कर्मों से हम कौन होते हैं किसी को परिणाम देने वाले यही तो ईश्वर की माया है वही करता है न्याय देता किसी को घोर पीड़ा या फिर भरता सुख का अंबार तू तो मात्र कर्म से बंधा हुआ बस कर्म किए जा मत कर फल की चिंता यही है गीता का ज्ञान और सच्चे जीवन का आधार।
मधु भूतड़ा 'अक्षरा'
गुलाबी नगरी जयपुर से (Ek Pehal ब्लॉगर, साहित्यकारा, लेखिका, कवयित्री, समाज सेविका, सॉफ्टवेयर इंजीनियर) #ekpehalbymadhubhutra #EkPehal M : 9828153965 |
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