| अधिक मास में माहेश्वरी मंडल वर्धा का भक्ति, संस्कार और प्रकृति के संगम का आध्यात्मिक महोत्सव |
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अधिक मास, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है, धर्म, साधना और दान-पुण्य का विशेष अवसर माना जाता है। इस पावन अवसर पर माहेश्वरी मंडल, वर्धा ने समाज को एक सूत्र में पिरोते हुए भक्ति, संस्कार और प्रकृति संरक्षण का प्रेरणादायी संदेश दिया। मंडल के समन्वयक श्री राजकुमार जाजू ने बताया कि माहेश्वरी समाज वर्षभर आध्यात्मिक, शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के माध्यम से समाज को संगठित रखने का कार्य करता है। इस वर्ष अधिक मास के रूप में प्राप्त अतिरिक्त समय को सेवा, साधना और संस्कारों के संवर्धन के लिए समर्पित किया गया। यह आयोजन केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित न रहकर प्रकृति एवं सामाजिक मूल्यों से जुडऩे का भी माध्यम बना। अधिक मास का शुभारंभ निकटवर्ती ग्राम लसनपुर स्थित गौशाला के भव्य शिव मंदिर में सामूहिक रुद्राभिषेक के साथ हुआ। मंदिर परिसर में संरक्षित लगभग 800 गौमाताओं को 56 भोग के रूप में पौष्टिक आहार अर्पित किया गया। इसके पश्चात समाजजनों ने समीप स्थित जागृत भवानी माता मंदिर में दर्शन-पूजन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। माहेश्वरी भवन में तीन दिवसीय संत परंपरा व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया, जो सर्वसमाज के लिए खुला रहा। अयोध्या से पधारे पंडित श्यामनारायण जी चौबे ने वारकरी संप्रदाय की संत जनाबाई, संत ज्ञानेश्वर, महाभारत की द्रौपदी, गुजरात के नरसी भगत तथा नानी बाई के मायरा प्रसंग का भावपूर्ण एवं सजीव प्रस्तुतीकरण किया। उन्होंने सरल एवं सारगर्भित शैली में इन महान विभूतियों के जीवन से मिलने वाली व्यावहारिक शिक्षाओं को वर्तमान जीवन से जोड़कर समझाया। विशेष रूप से नानी बाई के मायरा प्रसंग का मंचन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत भावविभोर करने वाला रहा। कार्यक्रम में धर्मप्रेमी जनों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। अधिक मास के समापन अवसर पर स्थानीय गौशाला परिसर में सावन उत्सव का आयोजन किया गया। इस दौरान गौमाता, विशाल बरगद वृक्ष एवं तुलसी माता की सामूहिक रूप से 108 प्रदक्षिणाएं की गईं। हरियाली से आच्छादित वातावरण में गौपूजन, दीपार्चन, आरती एवं प्रसाद वितरण सम्पन्न हुआ। सावन के झूलों पर झूलती महिलाओं और गूंजते भजनों ने पूरे परिसर को भक्तिमय बना दिया। संपूर्ण आयोजन चारों मंडलों के अध्यक्ष श्री नंदकिशोर भूतड़ा, सौ. सुनीता राठी, श्री वृषभ जाजू एवं कु. साक्षी चितलांगे तथा सचिव श्री हरीश गांधी, सौ. छाया पसारी, श्री अमित लदड एवं सौ. विशाखा टावरी के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम की सफलता में समन्वयक श्री राजकुमार जाजू सहित श्री विजय राठी, श्री संजय टावरी, श्री ललित राठी, श्री जुगलकिशोर मूंदड़ा, श्री संजय मोहता, श्री प्रमोद राठी, श्री रवि मूंदड़ा एवं श्री मनोज मूंदड़ा का विशेष सहयोग रहा। प्तप्त सामूहिक नेतृत्व से सफल आयोजन मंडल वर्धा के इस आयोजन ने समाज को यह संदेश दिया कि जब सेवा, साधना, संस्कार और प्रकृति संरक्षण का समन्वय होता है, तब अधिक मास वास्तव में पुरुषोत्तम मास के रूप में सार्थक हो उठता है।
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