| कृषि नवाचार के आदर्श व्यक्तित्व - डॉ. विठ्ठलदास आसावा का वैश्विक स्तर पर सम्मान |
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चणेगांव (तहसील संगमनेर) के प्रगतिशील एवं नवोन्मेषी किसान डॉ. विठ्ठलदास बालकिसन आसावा को कृषि, पर्यावरण संरक्षण, ग्रामीण विकास एवं सामाजिक सेवा के क्षेत्र में किए गए उल्लेखनीय कार्यों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। राजस्थान के जोधपुर में आयोजित अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा के अंतरराष्ट्रीय महाअधिवेशन में उन्हें प्रतिष्ठित 'समाज गौरव' उपाधि से सम्मानित किया गया। समाज अलंकरण समारोह के समन्वयक मयूर माहेश्वरी ने जानकारी देते हुए बताया कि सभापति संदीप काबरा एवं महामंत्री अजय काबरा के मार्गदर्शन में पश्चिम राजस्थान प्रादेशिक माहेश्वरी सभा के आतिथ्य में समाज संगठन, महिला संगठन एवं युवा संगठन के सहयोग से जोधपुर स्थित एम.जी.सी. ग्राउंड पर यह भव्य अंतरराष्ट्रीय अधिवेशन संपन्न हुआ। अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, चीन, बांग्लादेश, स्वीडन सहित 24 देशों तथा भारत के 430 प्रांतों से 50 हजार से अधिक समाजबंधु इस अधिवेशन में शामिल हुए। महाअधिवेशन का उद्घाटन केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा एवं केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की प्रमुख उपस्थिति में हुआ। डॉ. आसावा के कार्यों को ध्यान में रखते हुए अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा द्वारा आयोजित समाज अलंकरण समारोह में राजस्थान के महामहिम राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े के शुभ हस्तों से, सर्वोच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी, भारत सरकार के नीति आयोग के अध्यक्ष दिनेश माहेश्वरी, सभापति संदीप काबरा एवं महामंत्री अजय काबरा की उपस्थिति में उन्हें 'समाज गौरव' उपाधि प्रदान की गई। महाराष्ट्र से प्रदेशाध्यक्ष मधुसूदन गांधी एवं प्रदेश मंत्री सत्यनारायण सारडा के नेतृत्व में अहिल्यानगर जिलाध्यक्ष मनीष बाहेती एवं जिला मंत्री अतुल डागा द्वारा भेजे गए प्रस्ताव की समाज अलंकरण चयन समिति ने जांच की। इस समिति में सेवानिवृत्त मुख्य सचिव श्रीकांत बालदी, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी ए.पी. माहेश्वरी, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति यू.सी. माहेश्वरी, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति दिनेशचंद्र सोमाणी, सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक विपिन माहेश्वरी, सेवानिवृत्त राजदूत (स्विट्जऱलैंड, स्वीडन) मोनिका कपिल मोहता तथा सेवानिवृत्त मुख्य आयकर आयुक्त दिनेश पटवारी शामिल थे। डॉ. वि_लदास आसावा ने अपने 27 एकड़ के खेत में जैविक एवं रासायनिक संतुलित खेती पद्धति का प्रभावी प्रयोग कर कई स्व-विकसित तकनीकों को सफलतापूर्वक अपनाया है। गन्ना बीज प्रक्रिया, हुमणी नियंत्रण हेतु प्रकाश जाल, साइकिल कोळपे, वनस्पति जन्य अर्क, वर्मी-कम्पोस्ट, जल संरक्षण एवं खुला गोठा जैसी तकनीकों के कारण उनका कार्य कृषि क्षेत्र में विशेष पहचान बना चुका है। खेत में काड़ेपेटी (माचिस) का उपयोग नहीं करने का संकल्प जैसी पर्यावरण-अनुकूल पहल के माध्यम से हजारों किसानों ने पराली जलाना बंद कर मिट्टी में जैविक कार्बन बढ़ाने पर ध्यान दिया है, जिससे मिट्टी की उर्वरता एवं उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। महाराष्ट्र शासन द्वारा वर्ष 2012 में आयोजित प्रथम विदेशी कृषि अध्ययन दौरे (चीन) के लिए उनका चयन किया गया था। इससे पूर्व वर्ष 2006 में उन्हें वसंतराव नाईक कृषि भूषण पुरस्कार तथा 2011 में पुणे के बालेवाड़ी में शेतकरी गौरव पुरस्कार से सम्मानित किया गया। हाल ही में अमेरिकन मेरिट काउंसिल, न्यू जर्सी (यूएसए) द्वारा उन्हें कृषि एवं पर्यावरण विषय में मानद डॉक्टरेट प्रदान की गई है। इसके साथ ही रेसिड्यू-फ्री एंड ऑर्गेनिक मिशन इंडिया फेडरेशन, नई दिल्ली ने उन्हें एसोसिएटेड मेंबरशिप प्रदान की है। कृषि तकनीक के प्रसार हेतु उन्होंने फार्म स्कूल, संगोष्ठियों, यूट्यूब चैनल ’Krushi Pandhari Asawa’, लेखन एवं साक्षात्कारों के माध्यम से निरंतर कार्य किया है। ग्रामीण विकास, महिला सशक्तिकरण, शिक्षा, स्वच्छता अभियान, रक्तदान एवं वृक्षारोपण जैसे सामाजिक कार्यों में भी उनकी अग्रणी भूमिका रही है। विषमुक्त खाद्य उत्पादन, जल साक्षरता, पर्यावरण संरक्षण एवं ग्राम विकास को लेकर उनकी भविष्य दृष्टि कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने वाली है। उनके इस उल्लेखनीय कार्य के लिए सभी स्तरों से उनका अभिनंदन किया जा रहा है। |
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