पाक कला में प्रिया करवा ने राज्य स्तर पर प्राप्त किया प्रथम स्थान

वाराणसी की प्रतिभाशाली महिला श्रीमती प्रिया करवा, धर्मपत्नी श्री श्रवण करवा ने अपनी उत्कृष्ट पाक कला, रचनात्मकता एवं पारंपरिक खान-पान के प्रति समर्पण के बल पर 'कहीं गुम न हो जाएँ - सीजन 9' प्रतियोगिता में राज्य स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त कर समाज एवं वाराणसी का गौरव बढ़ाया है। इस उपलब्धि की विशेषता यह रही कि प्रिया करवा ने अपने सभी व्यंजन पूर्णत: शुद्ध मिलेट्स (श्री अन्न) से तैयार किए। इन व्यंजनों में न तो अतिरिक्त चीनी का उपयोग किया गया और न ही किसी प्रकार के कृत्रिम रसायन का। उन्होंने स्वास्थ्यवर्धक एवं पौष्टिक भोजन के साथ भारतीय पारंपरिक पाक कला का अनूठा संगम प्रस्तुत किया।

प्रिया करवा ने आधुनिक संसाधनों के स्थान पर सिलबट्टे एवं पारंपरिक घरेलू विधियों का उपयोग कर भारतीय रसोई की प्राचीन विरासत को जीवंत करने का सराहनीय प्रयास किया। उनकी इस पहल ने यह संदेश दिया कि हमारे पारंपरिक अनाज एवं घरेलू पाक विधियाँ आज भी स्वास्थ्य, स्वाद और पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

उल्लेखनीय है कि उनके पति श्री श्रवण करवा भी माहेश्वरी समाज के विभिन्न कार्यक्रमों में उत्कृष्ट खान-पान व्यवस्था के लिए विशेष पहचान रखते हैं। अब प्रिया करवा ने अपनी प्रतिभा एवं नवाचार से परिवार की इस परंपरा को नई ऊँचाइयाँ प्रदान करते हुए पारंपरिक भारतीय भोजन को विशिष्ट पहचान दिलाई है।

उनकी इस उपलब्धि से वाराणसी माहेश्वरी समाज में हर्ष एवं गौरव का वातावरण है। प्रिया करवा की सफलता न केवल महिलाओं की प्रतिभा और आत्मविश्वास का प्रेरक उदाहरण है, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध खान-पान संस्कृति, मोटे अनाजों के महत्व तथा स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूक करने का सार्थक संदेश भी देती है।

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