| आस्था और विकास का अनूठा संगम बना श्री बधर माता धाम, कानडखेड़ा-ताना गाँव |
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चित्तौडग़ढ़ (राजस्थान)। माहेश्वरी समाज की अनेक खाँपों की आराध्य कुलदेवी श्री बधर माता जी (बिजासन माता) का पावन धाम राजस्थान के चित्तौडग़ढ़ जिले के भूपालसागर तहसील अंतर्गत कानडखेड़ा–ताना गाँव की सुरम्य पहाडिय़ों पर स्थित है। आस्था, श्रद्धा एवं धार्मिक परंपराओं का यह प्राचीन केंद्र आज समाज की एकता, संगठन और सामूहिक सेवा का प्रेरणादायी उदाहरण बनकर उभर रहा है। श्री बधर माता सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सेवा ट्रस्ट के प्रयासों से यहाँ सड़क, आवास, भोजन एवं अन्य सुविधाओं का निरंतर विस्तार हो रहा है। अब भव्य भक्त निवास एवं मंदिर परिसर के विकास की महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। श्री बधर माता जी सोमानी, मर्दा, थिरानी, छापरवाल, मक्कड़, गादिया, बागड़ी, दुजारी, परसावत, मेनानी, हिंगड़, कसेरा, मेहनानी, बिलया सहित माहेश्वरी समाज की अनेक खाँपों की आराध्य कुलदेवी हैं। इन परिवारों में कुलदेवी के दर्शन, जात एवं झड़ूला संस्कार को अत्यंत पवित्र धार्मिक परंपरा माना जाता है। पूर्वकाल में अधिकांश परिवारों को अपनी कुलदेवी के मूल धाम की स्पष्ट जानकारी नहीं थी। ऐसे में पूर्वजों से चली आ रही परंपरा के अनुसार घरों की दीवारों पर कुलदेवी का प्रतीक स्वरूप अंकित कर पूजा-अर्चना की जाती थी। अष्टमी, नवमी, राता-जोगा तथा अन्य मांगलिक अवसरों पर श्रद्धापूर्वक धोक लगाकर माता जी का आशीर्वाद प्राप्त किया जाता था। धाम से जुड़ी धार्मिक मान्यता के अनुसार वर्ष 2000 में मध्यप्रदेश के अलीराजपुर निवासी श्रद्धेय श्री रामचन्द्र सोमानी को स्वप्न में श्री बधर माता जी ने दर्शन देकर अपने मूल धाम का संकेत दिया। इस दिव्य दृष्टांत से प्रेरित होकर उन्होंने माता जी के वास्तविक स्थान की खोज प्रारंभ की। लंबे प्रयासों के बाद वे राजस्थान के ताना गाँव के निकट कानडखेड़ा की पहाडिय़ों पर स्थित प्राचीन मंदिर तक पहुँचे। यहाँ माता जी अपनी बहन एवं भैरवजी (भेरूजी) के साथ विराजमान हैं। इस मंदिर की पूजा-अर्चना एवं सेवा का दायित्व स्थानीय भील समाज के भोपाजी परिवार द्वारा पीढिय़ों से निभाया जा रहा है। वर्तमान में भी उसी परिवार के वंशज अपनी पारंपरिक धार्मिक जिम्मेदारियों का श्रद्धा एवं निष्ठा से निर्वहन कर रहे हैं। लगभग 70 वर्ष पूर्व पंचकुलों के पंचों के सहयोग से इस पहाड़ी मंदिर का निर्माण कराया गया था। उस समय मंदिर तक पहुँचने के लिए सड़क की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। श्रद्धालुओं को दुर्गम पगडंडियों से होकर पहाड़ी पर चढऩा पड़ता था। कठिन मार्ग के बावजूद भक्तों की अटूट आस्था उन्हें माता के दरबार तक ले आती थी। मंदिर में बनी दो विशेष खिड़कियाँ स्थानीय श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। स्थानीय मान्यता में इन्हें दवाखाना कहा जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इन खिड़कियों से होकर निकलने पर शारीरिक कष्टों एवं बाधाओं से राहत मिलती है। आसपास के ग्रामीण आज भी अपने बच्चों के स्वास्थ्य, सुख एवं मंगल की कामना लेकर माता के दरबार में पहुँचते हैं।
स्थानीय जनश्रुति में श्री बधर माता जी को बिजासन माता के नाम से जाना जाता है। यहाँ माता जी की आरोग्य एवं कल्याण प्रदान करने वाली देवी के रूप में विशेष श्रद्धा के साथ आराधना की जाती है। कुलदेवी के मूल धाम की जानकारी समाज के अधिकाधिक परिवारों तक पहुँचाने में अनेक श्रद्धालुओं एवं समाजबंधुओं का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। भोपाजी परिवार से प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के जलगाँव जिले के पालदी निवासी सोमानी परिवार का वर्षों से इस धाम पर आना-जाना रहा है। माता जी के अनन्य भक्त एवं ट्रस्ट अध्यक्ष श्री शामसुंदर सोमानी (संभाजीनगर, महाराष्ट्र) ने अगस्त 2005 में तत्कालीन औरंगाबाद में कुलदेवी श्री बधर माता जी के प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से प्रथम भव्य जागरण आयोजित किया। इस अवसर पर लगभग 1000 से 1200 श्रद्धालुओं को माता जी के चित्र वितरित किए गए। इस पहल से समाज के अनेक परिवारों को अपनी कुलदेवी के मूल स्वरूप का परिचय मिला और देश के विभिन्न भागों में माता जी के प्रति श्रद्धा एवं आस्था का व्यापक विस्तार हुआ। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या तथा मंदिर की व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से पालदी के सोमानी परिवार के सहयोग से श्री रामेश्वर सोमानी की अध्यक्षता में एक ट्रस्ट का गठन किया गया। वर्ष 2006 में पुणे निवासी श्री बी. बी. सोमानी के प्रयासों से श्री बधर माता सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक सेवा ट्रस्ट की स्थापना कर पूर्व ट्रस्ट का इसमें समावेश किया गया। वर्ष 2016 तक उनके नेतृत्व में ट्रस्ट ने अनेक महत्वपूर्ण विकास कार्य संपन्न किए। इस अवधि में श्री सुनील सोमानी (पुणे) ने सचिव तथा श्री प्रकाश बागड़ी (पुणे) ने कोषाध्यक्ष के रूप में जिम्मेदारी निभाई। इसी कार्यकाल में श्रद्धालुओं के लिए भविष्य में आवश्यक सुविधाएँ विकसित करने के उद्देश्य से भूमि क्रय की गई। वर्ष 2016 में सर्वसम्मति से श्री शामसुंदर सोमानी को ट्रस्ट का अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। उनके साथ श्री नितिन सोमानी (संभाजीनगर) सचिव, श्री गोविन्दप्रसाद सोमानी (हैदराबाद) सहसचिव तथा डॉ. गणेश सोमानी कोषाध्यक्ष नियुक्त किए गए। नई कार्यकारिणी ने मंदिर परिसर के सुनियोजित विकास के लिए विशेष प्रयास प्रारंभ किए। इस दौरान अतिरिक्त भूमि क्रय की गई, जिससे ट्रस्ट के पास लगभग दो लाख वर्गफुट भूमि उपलब्ध हो गई। इसके पश्चात भक्त निवास के निर्माण और कानडखेड़ा से पहाड़ी पर स्थित मंदिर तक सुगम सड़क निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई। वर्ष 2021 में श्री शामसुंदर सोमानी को पुन: सर्वसम्मति से अध्यक्ष निर्वाचित किया गया। नई कार्यकारिणी में श्री मनमोहन बागड़ी (मुंबई) सचिव, श्री गोविन्दप्रसाद सोमानी (हैदराबाद) सहसचिव तथा श्री नितिन सोमानी (संभाजीनगर) एवं श्री गोविन्दलाल गादिया (चित्तौड़) उपाध्यक्ष बनाए गए। श्री देवेन्द्र सोमानी (कपासन) को सांस्कृतिक कार्यक्रम संयोजक एवं भक्त निवास निर्माण मार्गदर्शक तथा श्री पूरणमल मर्दा को प्रचार-प्रसार एवं सड़क निर्माण समिति के संयोजक की जिम्मेदारी सौंपी गई। ट्रस्ट ने पहाड़ी तक सड़क निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इसके लिए निरंतर प्रयास किए। श्री गोविन्दलाल गादिया (चित्तौड़) एवं श्री भगवतीलाल हिंगड़ (आकोला, राजस्थान) के नेतृत्व, ट्रस्ट के सतत प्रयासों तथा चित्तौडग़ढ़ के तत्कालीन जिला कलेक्टर श्री पोसवाल के विशेष सहयोग से पहाड़ी स्थित मंदिर तक सीमेंट सड़क का निर्माण सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह उपलब्धि धाम के विकास में ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुई। सड़क बनने से श्रद्धालुओं को दुर्गम रास्तों से मुक्ति मिली और माता जी के दर्शन अत्यंत सुगम हो गए। इसके बाद देश के विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए वर्तमान में ट्रस्ट द्वारा किराये के भवन में भक्त निवास संचालित किया जा रहा है। यहाँ दर्शनार्थियों के लिए नि:शुल्क आवास एवं भोजन की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाती है। बढ़ती श्रद्धालु संख्या एवं भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट ने अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त भव्य भक्त निवास तथा मंदिर परिसर के निर्माण का निर्णय लिया है। इस महत्वपूर्ण परियोजना के वास्तु परामर्श के लिए उदयपुर के प्रसिद्ध वास्तुकार श्री सुनील लढ्ढा को नियुक्त किया गया है। प्रस्तावित चार मंजिला भक्त निवास में कुल 72 आधुनिक सुविधायुक्त कक्ष, दो विशाल सभागार, दो रसोईघर, भोजन कक्ष तथा सुंदर उद्यान (लॉन) का निर्माण प्रस्तावित है। इस परियोजना का उद्देश्य देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं को सुव्यवस्थित, सुविधाजनक एवं शांतिपूर्ण वातावरण में ठहरने तथा धार्मिक आयोजन करने की सुविधाएँ उपलब्ध कराना है। परिसर को हरित एवं पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में भी विशेष प्रयास किए गए हैं। राजस्थान सरकार के सहयोग से पहाड़ी पर जाने वाली सीमेंट सड़क के दोनों ओर तथा भक्त निवास परिसर में लगभग 1500 वृक्षों का रोपण किया गया है। ट्रस्ट द्वारा भक्त निवास परियोजना के प्रथम चरण में 32 आधुनिक कमरों का निर्माण पूर्ण कर लिया गया है। ट्रस्ट की योजना आगामी 17 एवं 18 नवंबर 2026 को आयोजित होने वाले पंचम वार्षिक गोपाष्टमी महोत्सव के अवसर पर इन कमरों का लोकार्पण करने की है।
उल्लेखनीय है कि पिछले चार वर्षों से श्री बधर माता धाम, कानडखेड़ा-ताना गाँव में गोपाष्टमी के पावन अवसर पर भव्य वार्षिक महोत्सव आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन में देश के विभिन्न राज्यों से हजारों श्रद्धालु एवं माहेश्वरी समाज के परिवार उत्साह और श्रद्धा के साथ सहभागी होते हैं। वार्षिक महोत्सव धार्मिक आस्था के साथ ही समाजबंधुओं के पारस्परिक परिचय, एकता, संगठन एवं सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण का महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है। आगामी पंचम वार्षिक महोत्सव को लेकर ट्रस्ट एवं श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है। मंदिर की स्थानीय व्यवस्थाओं एवं श्रद्धालुओं की सुविधाओं के संचालन में श्री ओमप्रकाश सोमानी का विशेष योगदान रहा है। वे पिछले लगभग 15 वर्षों से पूर्ण निष्ठा, समर्पण एवं सेवाभाव के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। उनकी निरंतर सेवाएँ ट्रस्ट परिवार एवं समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं। देश-विदेश में निवासरत कुलदेवी भक्तों तक धाम की जानकारी पहुँचाने के लिए ट्रस्ट डिजिटल माध्यमों का भी उपयोग कर रहा है। ट्रस्ट का आधिकारिक यूट्यूब चैनल 'Kuldevi Badhar Mataji Official' के नाम से संचालित है। इसके अतिरिक्त वेबसाइट www.badharmataji.org पर भी माता जी, मंदिर तथा संबंधित गतिविधियों की जानकारी उपलब्ध है। श्री बधर माता धाम की इस विकास यात्रा में विभिन्न राज्यों के समाजबंधुओं, दानदाताओं, ट्रस्ट पदाधिकारियों, स्थानीय सेवाभावी परिवारों एवं प्रशासनिक सहयोग का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। श्री बधर माताजी के पावन धाम में नवनिर्मित भक्त निवास परियोजना का कार्य प्रगति पर है। आगामी 17 एवं 18 नवंबर 2026 को आयोजित पंचम वार्षिक महोत्सव के अवसर पर नवनिर्मित भक्त निवास के प्रथम चरण में तैयार 32 कमरों का लोकार्पण प्रस्तावित है। यह उपलब्धि धाम के विकास में एक महत्वपूर्ण कदम होगी और देशभर से दर्शनार्थ आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर आवासीय सुविधाएँ प्राप्त होंगी। कुलदेवी के मूल धाम की पहचान से प्रारंभ हुई यह यात्रा अब सड़क, भक्त निवास, पर्यावरण संरक्षण और धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से व्यापक स्वरूप ले चुकी है। आस्था के साथ सेवा, संगठन और सामूहिक संकल्प का यह संगम श्री बधर माता धाम को माहेश्वरी समाज के प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक केंद्र के रूप में नई पहचान प्रदान कर रहा है। संपर्क एवं जानकारी - श्री बधर माता जी के इतिहास, कुलदेवी परंपरा, मंदिर दर्शन एवं धाम की सुविधाओं संबंधी अधिक जानकारी के लिए श्री गोविन्दप्रसाद सोमानी, हैदराबाद से मोबाइल नंबर 9394858498 पर संपर्क किया जा सकता है। मंदिर का पता - श्री बधर माता धाम (बिजासन माता), कानडखेड़ा-ताना गाँव, तहसील भूपालसागर, जिला चित्तौडग़ढ़, राजस्थान
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