| माहेश्वरी सभा बेंगलुरू ने 730 विद्यार्थियों को दी शैक्षणिक सामग्री |
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शिक्षा को सामाजिक उत्थान और राष्ट्र निर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम मानते हुए माहेश्वरी सभा, बेंगलुरु ने अपने सेवा अभियान 'पढ़ेगा इंडिया... तभी तो बढ़ेगा इंडिया' के अंतर्गत कोलार जिले के बंगारपेट ताल्लुक स्थित बन्ना हल्ली क्षेत्र के 56 सरकारी प्राथमिक विद्यालयों के लगभग 730 विद्यार्थियों को स्कूल बैग, शैक्षणिक सामग्री एवं मध्यान्ह भोजन वितरित किया। प्रात: 6 बजे प्राइड हुलकुल, लालबाग मेन रोड, बेंगलुरु से तीन वाहनों के साथ सेवा यात्रा का शुभारंभ हुआ। सभा के भूतपूर्व सचिव अजय राठी ने हरी झंडी दिखाकर टीम को रवाना किया। विद्यालय परिसर में शिक्षा विभाग के अधिकारी वीरेन्ना, प्रधानाचार्यों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने स्काउट बैंड, पुष्पमालाओं एवं गुलाब के फूलों से प्रतिनिधिमंडल का आत्मीय स्वागत किया। दीप प्रज्ज्वलन के साथ आयोजित कार्यक्रम में सभा के अध्यक्ष भगवानदास लाहोटी ने कहा कि शिक्षा केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि यदि प्रत्येक सक्षम व्यक्ति एक जरूरतमंद बच्चे की शिक्षा का दायित्व उठाए, तो देश के विकास को नई गति मिल सकती है। सेवा, सहयोग और संस्कार माहेश्वरी समाज की पहचान हैं तथा सभा भविष्य में भी ऐसे जनहितकारी अभियान निरंतर चलाती रहेगी। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में विद्या को सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। शिक्षा व्यक्ति के चरित्र, संस्कार और व्यक्तित्व का निर्माण करती है, इसलिए किसी बच्चे को शिक्षा से जोडऩा वास्तव में राष्ट्र निर्माण में सहभागी बनना है।
प्रत्येक विद्यार्थी को दिए गए स्कूल बैग में चार नोटबुक, दो पेंसिल, एक स्केल, एक रबर, एक शार्पनर तथा रंगीन स्केच पेन का पाउच उपलब्ध कराया गया। साथ ही सभी बच्चों के लिए पौष्टिक मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था भी की गई। इस पहल से विद्यार्थियों में उत्साह का वातावरण दिखाई दिया तथा अभिभावकों ने सभा के प्रति आभार व्यक्त किया। सेवा परियोजना के सफल संचालन में संगठन मंत्री विनित कुमार बियानी, सह कोषाध्यक्ष राजीव समरिया तथा परियोजना संयोजक गोविंद बियानी, सूर्यप्रकाश इनानी, स्नेहकुमार जाजू, श्रीमती ममता इनानी एवं श्रीमती दीपाक्षी जाजू की विशेष भूमिका रही।
शिक्षकों एवं अभिभावकों ने कहा कि ऐसे सामाजिक प्रयास विद्यार्थियों में आत्मविश्वास, स्वाभिमान और आगे बढऩे की प्रेरणा जगाते हैं। उन्होंने माहेश्वरी सभा के इस अभियान को अनुकरणीय बताते हुए कहा कि यदि अधिक से अधिक संस्थाएँ शिक्षा के क्षेत्र में इसी प्रकार योगदान दें, तो कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित नहीं रहेगा। सभा ने अपने संदेश में कहा कि भारतीय संस्कृति में 'विद्यादान' को सर्वोत्तम दान माना गया है, क्योंकि इससे केवल वर्तमान ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढिय़ों का भविष्य भी उज्ज्वल होता है। संस्था ने भविष्य में भी ग्रामीण एवं वंचित क्षेत्रों के विद्यार्थियों के लिए ऐसे सेवा प्रकल्पों का विस्तार करने का संकल्प दोहराया।
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| 03 August 2026 |
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