अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा शुभकामना संदेश

भरी दुपहरी में अंधियारा, सूरज परछाई से हारा,
अंतरतम का नेह निचोड़ें, बुझी हुई बाती सुलगाएं । 
आओ फिर से दिया जलाएं ।
हम पड़ाव को समझे मंजिल, लक्ष्य हुआ आंखों से ओझल, 
वर्तमान के मोहजाल में आने वाला कल न भुलाएं । 
आओ फिर से दिया जलाएं ।
आहुति बाकी, यज्ञ अधूरा, अपनों के विघ्नों ने घेरा, 
अंतिम जय का वज्र बनाने, नव दधीचि हड्डियां गलाएं । 
आओ फिर से दिया जलाएं।
'चलो जलाए दिया वहाँ जहां अभी अंधियारा हो'
दीपोत्सव के मंगलमय पर्व पर हार्दिक बधाई अनंत शुभकामनाएं।

 

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