इंदौर में अ.भा माहेश्वरी समाज युवक युवती परिचय सम्मेलन का आयोजन सम्पन्न
परिचय सम्मेलन आज के समय की आवश्यकता है, इसमें समय और धन दोनों की बचत होती है वहीं सैकड़ो परिवार एक छत के नीचे एक समय में अनेक परिवारों से मिल सकते हैं। विचारों को साझा कर सकते है, देश में इंदौर शहर की अपनी अलग विशिष्ठ पहचान है। यहां आकर विचारों में सकारात्मकता आती है और संदेश भी आसानी से बड़े स्तर पर पहुंचता है। उक्त विचार कार्यक्रम के मुख्य अतिथि महासभा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष राजकुमार काल्या द्वारा व्यक्त किए गए।
श्री काल्या ने आगे कहा कि शादी की सही उम्र 21 से 24 वर्ष के बीच होना चाहिए, इस उम्र में शादी होने से संतान उत्पति भी सशक्त ओर मजबूत होती है विकृतियां भी नहीं रहती। वर्तमान समय में विकृतियां है, मन चाही पसंद और करियर के चक्कर में युवा 30 से 35 वर्ष तक कुंवारे नजर आ रहे है।
पश्चिम मध्यप्रदेश प्रादेशिक माहेश्वरी सभा एवं युवा संगठन द्वारा आयोजित दो दिवसीय युवा युवती परिचय सम्मेलन उद्घाटन समारोह के विशिष्ठ अतिथि श्री राधे तोषनीवाल ने अपने संबोधन में कहा कि आज परिचय सम्मेलन विवाह संबंध खोजने का एक सशक्त माध्यम बन चुके हैं, पहले के समय में समाज के वरिष्ठजन सम्बन्ध करवाने में बड़ी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे। आज वह कड़ी कहीं नजर नहीं आती, यही कारण है कि परिचय सम्मेलन उस कमी को दूर करते हैं और समाज बंधुओं के लिए यह आसान राह दिखाते प्रतीत होते है।
समारोह के विशिष्ठ अतिथि श्री आनंद नागौरी ने अपने विचार रखते हुए, आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि संबंध खोजना समाज की ज्वलंत समस्या बन चुकी है। प्रादेशिक सभा ने इस तरफ ध्यान देते हुए, एक सकारात्मक भूमिका निभाई है। आपने समाज के वरिष्ठजन से अपील करते हुए कहा कि आज जो हालात परिवारों में बन रहे हैं, उस पर भी चिंतन करना चाहिए कि छोटी छोटी बातों में परिवारों में अलगांव हो रहा है। उसे कैसे रोका जा सकता है, हमें उस दिशा में भी पहल करना चाहिए।
अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी युवा संगठन के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक ईनानी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जिस सोच और संकल्प के साथ प्रादेशिक सभा एवं युवा संगठन ने परिचय सम्मेलन को करने का मानस बनाया था, वह पूर्णता को प्राप्त हुआ। आपने बताया कि परिचय सम्मेलन में देश-विदेश में कार्यरत विभिन्न प्रोफेशनल एवं शैक्षणिक पृष्ठभूमियों के प्रतिभागियों द्वारा रजिस्ट्रेशन करवाया गया। जिनमें अधिकांश उच्च शिक्षित प्रत्याशी हैं तथा उच्च व मध्य आय वर्ग से संबंध रखते हैं। उच्च शिक्षित प्रतिभागियों की शैक्षणिक व प्रोफेशनल पृष्ठभूमि में लगभग 95 प्रतिशत प्रत्याशी स्नातक सहित, कुछ 12वीं उत्तीर्ण प्रत्याशी भी सम्मिलित हुए हैं।
ईनानी ने कहा कि यह आँकड़ा दर्शाता है कि यह सम्मेलन विविध क्षेत्रों के योग्य, शिक्षित एवं प्रतिष्ठित प्रत्याशियों को समाज की मुख्य धारा से जोडऩे का माध्यम बना। यह गुणवत्ता, योग्यता और सहभागिता की दृष्टि से एक उच्च स्तरीय सामाजिक समागम बनकर उभरा है।
समारोह के आरंभ में अतिथियों द्वारा भगवान उमा महेश की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं द्वीप प्रज्वलन किया गया, इस अवसर उपस्थित अतिथियों का स्वागत सर्व श्री पुष्प माहेश्वरी, अभिषेक बजाज, अजय झंवर, सपन माहेश्वरी, प्रकाश अजमेरा, राजेश मूंगड, रश्मि लढ्ढा, राम तोतला, प्रेमनारायण मालपानी, गोपाल न्याती, रूपेश भूतडा, सुरेश हेडा, दिलीप लोया, मनीष गगरानी, मधु मुंगड़, रजत लढ्ढा, गौरव दरक, बल्देव जाजू, ललित बियानी, मुरलीधर मोदी, अशोक जाजू, आदि ने किया। संचालन डॉ दीप्ति भूतड़ा एवं सपन माहेश्वरी ने किया एवं राष्ट्र गान के साथ उद्घाटन समारोह सम्पन्न हुआ।
द्वितीय सत्र में युवाओं ने अपने जीवन साथी के बारे में खुलकर मंच से अपनी बात रखी, युवाओं ने मंच से नि संकोच यह कहा की संयुक्त परिवार आज के समय की आवश्यकता बनते जा रहे हैं, संयुक्त परिवार में रहने से चुनौतियां कम होती हैं और विपरीत परिस्थितियों में संबल भी मिलता है।
परिचय सम्मेलन में मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र के साथ अन्य प्रदेश से 3 हजार बंधुओं की सहभागिता रही, वहीं व्यवस्था के लिए 200 समाज जनों की अलग अलग टीम पूरी जिम्मेदारी के साथ कार्य में लगी हुई थी।
इस परिचय सम्मेलन की खास बात यह रही की इसमें प्रतिभागियों ने जहां मंच से अपना परिचय दिया, दूसरी तरफ अलग-अलग ग्रुप डिस्कशन की उपयुक्त व्यवस्था भी की गई थी, जहां परिजन और युवा एक दूसरे से चर्चा कर आपसी जानकारीया ले रहे थे, सभा की और से पर्यवेक्षक एवं समन्वय टीम संवाद कराने में सहयोगी की भूमिका निभा रही थी।
दोपहर के सत्र में भोजन के दौरान अनूठा नजारा देखने को मिला जब मेहमान या आगंतुक अपनी प्लेट रखने डस्टबिन की ओर जा रहे थे तो युवाओं की टीम महेश राठी 'गुड्डाÓ एवं अशोक जाजू के नेतृत्व में उनकी प्लेट पर नजर बनाए हुए थी और उनसे भोजन को झूठ न छोडऩे का अनूठा आग्रह कर संकल्प दिला रही थी कि अन्न का अपमान ना करे। वहीं 3000 से ज्यादा संख्या वाले इस सामाजिक आयोजन में भोजन व्यवस्था की पूरी कमान महिलाओं के हाथ रही थी, जो की पूर्णता गरिमामय और सुव्यवस्थित रही।
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