सजा नहीं संवाद है, समाधान; बच्चों के झूठ बोलने की छुड़ाएँ आदत - कुम कुम काबरा
आज के समय में बच्चों की परवरिश माता-पिता के लिए एक बड़ी चुनौती बनती जा रही है। बदलते सामाजिक परिवेश, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और तकनीक के प्रभाव के बीच बच्चों के व्यवहार में भी कई तरह के बदलाव देखने को मिलते हैं। इन्हीं में से एक है छोटी-छोटी बातों पर झूठ बोलने की आदत। कभी होमवर्क पूरा न करने पर, कभी गलती छिपाने के लिए तो कभी डाँट या सजा के डर से बच्चे सच बताने से बचने लगते हैं। यह स्थिति कई अभिभावकों को परेशान कर देती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों के झूठ बोलने की आदत को केवल डाँट-फटकार से नहीं, बल्कि धैर्य, समझदारी और सही मार्गदर्शन से सुधारा जा सकता है। यदि माता-पिता समय रहते कारणों को समझ लें और उचित व्यवहार अपनाएँ, तो बच्चे धीरे-धीरे ईमानदारी की ओर बढ़ सकते हैं।
गुस्से के बजाय शांत तरीके से करें बात—जब बच्चा झूठ बोलते हुए पकड़ा जाए तो अधिकांश माता-पिता की पहली प्रतिक्रिया गुस्सा होती है। वे डाँटने और सजा देने लगते हैं, लेकिन ऐसा करना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे अक्सर इसलिए झूठ बोलते हैं क्योंकि उन्हें सच बताने पर डाँट का डर रहता है। ऐसे में यदि माता-पिता शांत रहकर उसकी बात सुनें और समझने की कोशिश करें कि उसने झूठ क्यों बोला, तो बच्चा अधिक सहज महसूस करेगा। उसे यह भरोसा दिलाना जरूरी है कि सच बोलने पर उसकी बात सुनी जाएगी और उसे समझा जाएगा। इससे उसके मन का डर कम होगा और वह भविष्य में सच बोलने के लिए अधिक तैयार रहेगा।
सच बोलने पर करें तारीफ—बच्चों में सकारात्मक व्यवहार विकसित करने का सबसे प्रभावी तरीका उसकी सराहना करना है। जब बच्चा अपनी गलती स्वीकार कर ले या किसी मुश्किल स्थिति में सच बोलने का साहस दिखाए, तो उसकी प्रशंसा अवश्य करें। इससे उसे यह महसूस होगा कि ईमानदारी एक अच्छी बात है। छोटी-छोटी ईमानदार बातों पर भी उनकी तारीफ करनी चाहिए। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है और वह समझता है कि सच बोलने से सम्मान मिलता है, जबकि झूठ केवल स्थायी राहत देता है।
कुम कुम काबरा
बरेली (उत्तर प्रदेश)
मौ ० नं -7017805455

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