सातूड़ी तीज : भारतीय संस्कृति, सौभाग्य और पारिवारिक मूल्यों का पावन पर्व - ज्योति मूंदड़ा
भारतीय संस्कृति में पर्व और त्योहार केवल धार्मिक आस्था के प्रतीक ही नहीं, बल्कि हमारी समृद्ध परंपराओं, संस्कारों और सामाजिक एकता के संवाहक भी हैं। इन्हीं पावन पर्वों में सातूड़ी तीज का विशेष महत्व है। विशेष रूप से राजस्थान एवं मारवाड़ क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व महिलाओं के लिए आस्था, प्रेम, सौभाग्य और पारिवारिक खुशहाली का प्रतीक है।
सातूड़ी तीज के अवसर पर महिलाएं अपने परिवार की सुख-समृद्धि तथा पति के उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की मंगलकामना करती हैं। इस दिन भगवान शिव एवं माता पार्वती की पूजा-अर्चना का विशेष महत्व माना जाता है। माता पार्वती का भगवान शिव के प्रति अटूट प्रेम, तपस्या और समर्पण भारतीय नारी शक्ति एवं आदर्श दांपत्य जीवन की प्रेरणा प्रदान करता है।
इस पर्व से जुड़ी अनेक सुंदर पारिवारिक और सांस्कृतिक परंपराएं भी हैं। विवाहित बेटियों को मायके से सिंजारा भेजना, श्रृंगार सामग्री एवं पारंपरिक व्यंजनों का आदान-प्रदान करना तथा परिवार के सदस्यों के साथ उत्सव मनाना हमारे सामाजिक और पारिवारिक संबंधों को और अधिक मजबूत बनाता है। सातूड़ी तीज का पर्व आपसी प्रेम, स्नेह और अपनत्व की भावना को भी सुदृढ़ करता है।
आज के आधुनिक और व्यस्त जीवन में हमारे पारंपरिक पर्व हमें अपनी जड़ों और संस्कारों से जुड़े रहने की प्रेरणा देते हैं। सातूड़ी तीज केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह प्रेम, विश्वास, समर्पण, सौभाग्य और पारिवारिक एकता का सुंदर संदेश देने वाला पर्व है।
आइए, इस पावन अवसर पर हम अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संजोने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लें तथा भगवान शिव एवं माता पार्वती से सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और सौभाग्य की कामना करें।
ज्योति मूंदड़ा, चेन्नई
9444556292

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