पिता: धरती का सबसे निस्वार्थ रिश्ता - प्रो. आशा पंकज मूंदड़ा
पिता शब्द सुनते ही आँखों के सामने एक तस्वीर उभरती है। सुबह सबसे पहले उठकर ऑफिस जाने वाला, धूप-बारिश की परवाह किए बिना काम पर जाने वाला इंसान। उसने कभी अपनी थकान नहीं दिखाई, क्योंकि उसकी प्राथमिकता हम थे। उसने अपने सपने बाद में देखे, पहले हमारे सपने पूरे किए। पुराने जूते पहनकर भी उसने हमें नई ड्रेस दिलाई, बस इसलिए कि हमारा आत्मविश्वास कम न हो।
आज फादर्स डे है। हमें याद दिलाने की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं है कि हमारे जीवन की सबसे मजबूत नींव का नाम 'पापा' है। माँ की ममता हम सबको दिखती है, पर पिता का प्यार एक बरगद की तरह होता है—छाया देता है, पर शोर नहीं करता। पिता ज्यादा उपदेश नहीं देते, वे जीकर सिखाते हैं। ईमानदारी से कमाया एक रुपया, झूठ की सौ दौलत से भारी होता है। ऐसी महान प्रेरणा बनकर गिरकर उठना, हारकर फिर मेहनत करना और मुसीबत में भी मुस्कुराना तथा जिंदगी के मुश्किल हालातों में पहाड़-सा अडिग रहकर पूर्ण धैर्य व संयम का परिचय देना किसी किताब में नहीं मिलता। यह सबक पापा की जिंदगी से मिलते हैं। एक अच्छा पिता सिर्फ अपने बच्चों का नहीं, पूरे समाज का आदर्श होता है। वह अपने बच्चों के लिए चारित्रिक श्रेष्ठता का जीवंत साक्ष्य है।
हम बड़े होकर अक्सर भूल जाते हैं कि जिन कंधों पर बैठकर हमने दुनिया देखी, वे कंधे अब ढलने लगे हैं। जिन हाथों ने हमें गिरने से बचाया, अब उन हाथों को सहारे की जरूरत है। साथ ही, अपने खून-पसीने से सींच-सींचकर सम्पूर्ण जीवन अपने बच्चों पर समर्पित कर देने वाले उस पिता को मान-सम्मान और अपनापन दीजिए तथा उस पिता को आशा के पंख लगाकर पूर्ण विश्वास के साथ उन्मुक्त आकाश में उड़ने दीजिए, ताकि जिस प्यार व अपनत्व का वह हकदार है, उसे यह आत्मसंबल देकर स्वर्गीय सुख व आत्मसंतोष की अनुभूति करवा पाएँ, क्योंकि यह पूर्णतः सत्य है कि—
"पिता ही एक प्रेरणा,
पूजा, अर्चन, अरदास है।
पिता के चरणों में जन्नत,
मथुरा, काशी, कैलाश है।
पिता हिम्मत है, हौसला है,
जीवन का उजास है।
टेढ़ी-मेढ़ी पगडंडियों पर,
साथ चलने का अहसास है।
पिता है तो जीवन, जीवन
हर साँस, साँस है।
पिता के आशीष में ही,
रहता खुशियों का वास है।"
इस फादर्स डे पर बस इतना कीजिए, उनके पास बैठिए, उन्हें यह मधुर अहसास दिलाइए कि "पापा, मुझे आप पर गर्व है।" "आप ही हमारे असली हीरो हैं।" यह सम्मान उनके लिए उम्दा मेडल से कम नहीं।
पिता भगवान का वह रूप हैं, जो बिना पंखों के हमारे लिए फरिश्ता बनकर आते हैं।
प्रो. आशा पंकज मूंदड़ा
पाली, राजस्थान 

मो. 9983456846

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