नशे में उलझता युवा - एक गंभीर चुनौती - मधु भूतड़ा 'अक्षरा'
सनातन भारत की मूलतः पहचान संस्कार और संस्कृति से जुड़ी हुई है। पाश्चात्य सभ्यता ने ज्यों ही पैर पसारना आरंभ किया, राष्ट्र निर्माण में सहयोगी युवाओं का ध्यान भटकने लगा है। यह भारतीय सभ्यता पर शत्रुओं का प्रहार है। आज देश का युवा तीव्र गति से नशे का गुलाम हो रहा है, सवाल यह है कि यह भारत को खत्म करने की सोची-समझी साजिश तो नहीं है!
समानता के नाम पर लड़कों के साथ-साथ लड़कियों ने भी सिगरेट, शराब, ड्रग्स का सेवन शुरू कर दिया है, यह स्थिति राष्ट्र के भविष्य के लिए गंभीर चुनौती बन गई है।सवाल यह है कि नशे के सामग्री की उपलब्धता कहां और कैसे हो रही है, तो यह पाते हैं कि देश कई राज्यों में भीड़ वाले मुख्य बाजारों में लाइसेंस प्राप्त हर दूसरी दुकान में शराब तथा पान की दुकानों में बीड़ी,सिगरेट, तंबाकू उपलब्ध है, ऐसे में इनका सेवन करना अत्यंत आसान है।
त्रासदी यह है कि प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में भी ड्रग्स की सप्लाई ने राष्ट्र के भविष्य को खतरे में डाल दिया है। बिहार, गुजरात, नागालैंड, मिजोरम, कच्छ और लक्षद्वीप राज्यों को ड्राई यानि सूखा राज्य बनाया गया, मजे की बात यह है कि जहां शराब प्रतिबंधित है, वहां सीमावर्ती राज्यों से स्मगलिंग होना साधारण बात है, यही भ्रष्टाचार देश को खोखला कर रहा है। सरकार को सबसे अधिक राजस्व आय कर इन्हीं से प्राप्त होने के कारण नशे के कारोबार में वृद्धि दिनों-दिन होती जा रही है।
अमेरिका सहित कई देशों में युवाओं में नशे की बढ़ती प्रवृत्ति चिंताजनक है और भारतीय युवा वर्ग उसी का अंधानुकरण कर रहा है। जागरूकता नहीं उत्पन्न होना गंभीर प्रश्न है। अगर ऐसे ही नशा लिप्त माता-पिता से नव संतान का जन्म होगा, भावी पीढ़ी के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव निश्चित है, सोच कर भयभीत करने वाला परिदृश्य तैयार होता है।
भारत युवा प्रधान देश है, यहां नशे की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। विभिन्न अध्ययनों के अनुसार देश में लगभग 16 करोड़ लोग शराब का सेवन करते हैं, जबकि तंबाकू उपभोक्ताओं की संख्या 26 करोड़ से अधिक है। युवाओं पर किए गए एक बहुराज्यीय अध्ययन में लगभग 32.8 प्रतिशत युवा किसी न किसी नशीले पदार्थ के संपर्क में पाए गए तथा उनमें से 75 प्रतिशत से अधिक ने वयस्क होने से पहले ही इसकी शुरुआत कर दी थी।
नशा केवल व्यक्ति ही नहीं, पूरे परिवार को प्रभावित करता है। इससे स्वास्थ्य, सोचने-समझने और निर्णय लेने की क्षमता पर बुरा असर पड़ता है। कई दुर्घटनाओं, अपराधों और पारिवारिक कलह के पीछे भी नशे की भूमिका होती है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह युवाओं की शिक्षा, प्रतिभा और भविष्य को नुकसान पहुंचाता है। देश भी इसके बढ़ते दुष्परिणामों के बावजूद प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं कर पा रहा है। ऐसे में नशे का जाल निरंतर फैल रहा है और युवा पीढ़ी इसका सबसे बड़ा शिकार बनती जा रही है।पार्टीज कल्चर ने हार्ड ड्रिंक को बढ़ावा दिया। एक समीक्षा है कि गरीब इंसान दुख और फ्रस्ट्रेशन को कम करने के लिए नशा करते हैं तो अमीर जश्न मनाने के लिए नशा करते हैं।
राज्यवार आंकड़े बताते हैं कि समस्या कितनी गंभीर है। त्रस्त पंजाब में किए गए विभिन्न वैज्ञानिक अध्ययनों के अनुसार लगभग 14.7 प्रतिशत आबादी किसी न किसी प्रकार के नशे की गिरफ्त में है। राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य सर्वेक्षण में भी पंजाब में अल्कोहल और अन्य नशा विकारों की दर लगभग 7.9 प्रतिशत पाई गई है, जो कई राज्यों की तुलना में अधिक है।
राजस्थान में भी नशे की समस्या गंभीर रूप ले चुकी है। सरकारी सर्वे के अनुसार राज्य में लगभग 24.7 प्रतिशत वयस्क किसी न किसी रूप में तंबाकू का सेवन करते हैं, जबकि 13.2 प्रतिशत लोग धूम्रपान की आदत के शिकार हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में भी नशे की प्रवृत्ति एक चौथाई आबादी तक पहुंचने के संकेत देती है, जो यह दर्शाता है कि यह समस्या अब शहरी ही नहीं, ग्रामीण समाज में भी गहराई से फैल चुकी है। ऐसे अनेकों राज्यों में यह समस्या अजगर की तरह विकराल रूप धारण कर चुकी है।
नशा किसी समस्या का समाधान नहीं, बल्कि अनेक नई समस्याओं का जन्मदाता है, इसलिए युवाओं को नशे से नहीं, अपने लक्ष्य, संस्कार और सपनों से जुड़ना होगा।युवा किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं, यदि युवा शक्ति नशे में डूबेगी तो राष्ट्र दुर्बल होगा, और यदि वही युवा संस्कार, शिक्षा एवं सकारात्मक सोच से जुड़ेंगे तो भारत विश्व का पथप्रदर्शक बनेगा। अतः समय की मांग है कि हम नशे के विरुद्ध केवल आवाज न उठाएं, बल्कि एक जनआंदोलन खड़ा करें।
मधु भूतड़ा 'अक्षरा' 
गुलाबी नगरी जयपुर से 
(Ek Pehal ब्लॉगर, साहित्यकारा, लेखिका, कवयित्री, समाज सेविका, सॉफ्टवेयर इंजीनियर) 
#ekpehalbymadhubhutra #EkPehal M : 9828153965

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