साहित्य संगम संस्थान के वार्षिकोत्सव में स्वाति जैसलमेरिया एवं स्वाति मानधना को मिली 'विद्यावाचस्पति' मानद उपाधि

साहित्य, संस्कृति एवं भाषा के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए समर्पित साहित्य संगम संस्थान का वार्षिकोत्सव गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर देश के विभिन्न राज्यों तथा विदेशों से जुड़े साहित्यकारों, कवियों और भाषा प्रेमियों की उल्लेखनीय सहभागिता रही, जिससे कार्यक्रम को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्वरूप प्राप्त हुआ।

समारोह के दौरान विभिन्न साहित्यिक कृतियों का लोकार्पण एवं समीक्षात्मक विमोचन किया गया। साथ ही साहित्य एवं भाषा के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले रचनाकारों को विभिन्न सम्मान एवं मानद उपाधियों से अलंकृत किया गया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण संस्थान की सर्वोच्च मानद उपाधियों का वितरण रहा। साहित्य साधना, रचनात्मक लेखन तथा हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार में उल्लेखनीय योगदान के लिए प्रख्यात साहित्यकारा स्वाति जैसलमेरिया जोधपुर एवं स्वाति मानधना बालोतरा को प्रतिष्ठित 'विद्यावाचस्पति' मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें साहित्यिक एवं सामाजिक क्षेत्र में उनके सतत योगदान तथा सृजनात्मक लेखन के लिए प्रदान किया गया।

इस अवसर पर स्वाति मानधना की पुस्तक 'स्वाति के मंथन मोती' का भी विधिवत विमोचन किया गया, जिसे उपस्थित साहित्यकारों एवं अतिथियों ने सराहा।

मुख्य अतिथि एवं संस्थान अध्यक्ष राजवीर सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि साहित्य समाज को नई दिशा देने की शक्ति रखता है और सम्मानित साहित्यकारों की लेखनी समाज को वैचारिक रूप से समृद्ध बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

कार्यक्रम के अंतिम चरण में आयोजित बहुभाषी कवि सम्मेलन में देशभक्ति, सामाजिक सरोकारों तथा समसामयिक विषयों पर आधारित रचनाओं का प्रभावशाली काव्यपाठ हुआ, जिसने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। समारोह के समापन पर मुख्य संयोजक डॉ. प्रशांत कृष्ण ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कार्यक्रम की सफलता में उनके योगदान की सराहना की।


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