और चाय का जायका ही बदल गया - मधु भूतड़ा 'अक्षरा'
अदरक इलायची का भरा हुआ कड़क स्वाद
चाय की चर्चा पर मंत्री महोदय से हुई मुलाकात
चापलूस जो इर्द-गिर्द बैठे थे
वाह-वाही का दम भर रहे थे
मंत्री महोदय अपने दिल को अपार खुशी से तर कर रहे थे
हंस-हंस कर सभी आपस में बात कर रहे थे
एक-एक घूंट जायका लेकर संवाद कर रहे थे
और कुछ लोग तो फोटो लेकर अपने मोबाइल की गैलरी भर रहे थे
तभी भीड़ से किसी एक की आवाज़ आई
मंत्री जी ने फट से अपनी नजरें घुमाई
सवाल आया
मंत्री जी कब खत्म होगा भ्रष्टाचार
कब गरीबों तक पहुंचेगी अन्न-धन योजना, खाद्यान्न योजना आवास योजना
कब बदलेगा देश में निर्धनों का संसार
कब आएगी थाली में
घी की रोटी, हरी सब्जी, मिठाई, रायता पापड़ और अचार
कब तक रहेगी चोरी घूसखोरी बेरोजगारी
और रहेगी जनता दीन दुखी लाचार
ऊंचे तबके से फरमान तो होते हैं जारी
सैकड़ों योजनाएं हैं सरकारी
निचले तबके से होती नहीं पूरी
कब हटेगी देश में यह बीमारी
इतना सब कुछ सुनते ही
विधायक जी के ठहाकों वाले तोते उड़ गए
जनता के सच्चे सवालों से वो कुढ़ गए
फटाफट चाय का घूंट गटकाया
अपना मंत्री वाला तेवर दिखाया
लाल बत्ती पर नजर डाली
अपने धोती की इज्जत बचाली
बोले ड्राइवर
सुनो!
और भी मीटिंग में जाना है
प्रगति पर मुझे भाषण सुनाना है
और फिर पलट कर कहा
विलंब हो रही है मुझको
फिर कभी मिलेंगे
और चाय पर चर्चा करेंगे
कहकर वह तो फुर्र हो गए
भीड़ भी कहने लगी
चले गए तो अच्छा ही हुआ
आज का माहौल संभल गया
मन ही मन सभी लोग जान रहे थे
एक सच्चे कटु सवाल से चाय का जायका ही बदल गया।

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