सतत बाल साहित्य साधना के लिए डॉ. विमला भंडारी सम्मानित

अखिल भारतीय नवकिरण साहित्य साधना ट्रस्ट द्वारा आयोजित भव्य समारोह में देशभर के 11 साहित्यकारों को 'नव किरण साधना अलंकरण 2026' से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर राजस्थान के सलूंबर की प्रख्यात बाल साहित्यकार डॉ. विमला भंडारी को सतत श्रेष्ठ बाल साहित्य साधना के लिए सम्मानित किया गया। कार्यक्रम बस्ती के अर्श फैमिली रेस्टोरेंट, पटल चौराहा में आयोजित हुआ, जहां डॉ. भंडारी को स्मृति चिन्ह, सम्मान पत्र, अंगवस्त्र एवं 5100/- की पुरस्कार राशि प्रदान की गई।

ट्रस्ट के संस्थापक अध्यक्ष लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि इस आयोजन में देश के विभिन्न प्रांतों से आए साहित्यकारों को उनकी उत्कृष्ट साहित्य साधना एवं चयनित कृतियों के लिए अलंकृत किया गया। कार्यक्रम के दौरान आठ पुस्तकों का लोकार्पण एवं संगोष्ठी भी आयोजित की गई।

समारोह की मुख्य अतिथि राजमाता श्रीमती आशिमा सिंह रहीं, जबकि अध्यक्षता उत्तर प्रदेश शासन के पूर्व गृह सचिव एवं साहित्यकार डॉ. राकेश चंद्रा ने की। मंच पर हरीश देव दरवेश, अंकुर वर्मा, डॉ. डी.के. गुप्ता एवं योगेश शुक्ला सहित कई गणमान्य साहित्यकार उपस्थित रहे।

इस अवसर पर डॉ. विमला भंडारी की 49वीं कृति, पिक्चर बुक 'शांतिदूत गुटर-गूं' का लोकार्पण भी किया गया। साथ ही लाल देवेंद्र कुमार श्रीवास्तव की सात पुस्तकों का विमोचन हुआ। अपने उद्बोधन में डॉ. भंडारी ने कहा कि 'हम डिजिटल युग से आगे बढ़कर स्मार्ट युग में प्रवेश कर चुके हैं। आज लेखक और पाठक दोनों अधिक जागरूक और तकनीक-सक्षम हो गए हैं। सोशल मीडिया ने हिंदी साहित्य की पहुंच को व्यापक बनाया है और नए प्रकाशन के अवसर प्रदान किए हैं।'

डॉ. विमला भंडारी पूर्व में राजस्थान साहित्य अकादमी, राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी तथा मध्य प्रदेश हिंदी साहित्य परिषद द्वारा सम्मानित हो चुकी हैं। वे राजस्थान साहित्य अकादमी की पूर्व सदस्य एवं पंडित जवाहरलाल नेहरू बाल साहित्य अकादमी की संस्थापक सदस्य रही हैं।

उनकी रचनाएं कई भाषाओं में अनूदित हो चुकी हैं तथा उनकी कहानियां पाठ्यक्रम में भी शामिल हैं। उनकी पुस्तकें मध्य प्रदेश एवं हरियाणा साक्षरता अभियान में सम्मिलित रही हैं। डिजिटल लाइब्रेरी में भी उनकी रचनाएं उपलब्ध हैं। बाल साहित्य के क्षेत्र में उनके योगदान पर कई शोध कार्य हो चुके हैं।

सलिला संस्था से जुड़ी डॉ. भंडारी अब तक 17 राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन आयोजित करवा चुकी हैं तथा आठ पुस्तकों का संपादन भी कर चुकी हैं।

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