| माहेश्वरी पुस्तकालय कोलकात्ता ने याद किया रवीन्द्र संगीत सुधा के भागीरथ - दाऊलाल कोठारी को |
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कोलकाता, 24 फरवरी 2026। विश्वकवि रवीन्द्रनाथ टैगोर की स्वरलिपि को यथावत रखते हुए, उनके गीतों को हिन्दी में भाषान्तरित कर देश-विदेश में रवीन्द्र संगीत सुधा के प्रवाहक दाऊलाल कोठारी को याद किया गया। माहेश्वरी सभा कोलकात्ता के अंतर्गत संचालित माहेश्वरी पुस्तकालय के तत्वाधान में आयोजित स्मरण सभा में कोठारी के कार्यों को विभिन्न वक्ताओं ने रेखांकित किया। सदीनामा के संपादक जितेंद्र जीतांशु ने अमेरिका में हुए विश्व हिन्दी सम्मेलन में कोठारी जी की भागीदारी को याद किया और उनके अनुवाद कार्य की सराहना की। अध्यापिका दुर्गा व्यास ने कोठारी को प्रवासी समाज की मिसाल बताते हुए कहा कि उन्होंने रवीन्द्र संगीत सुधा लिखकर आने वाली पीढ़ी को एक धरोहर दी है, जिसके लिए उन्हें सदा स्मरण किया जाएगा। माहेश्वरी सभा के सभापति बुलाकी दास मीमानी ने कहा कि उनकी कृति को कोई नहीं भूल पाएगा और माहेश्वरी समाज में उनके योगदान को भी भुलाया नहीं जा सकता। स्मरण सभा की अध्यक्षता करते हुए संगीत शिल्पी नीलमणि राठी ने कहा कि रवीन्द्र संगीत के हिन्दी अनुवाद करते समय वे मुझसे उसके बारे में बातचीत भी करते थे, क्योंकि मैं संगीत से जुड़ा हुआ हूँ। इस पुस्तक के छपने से पहले तक यह संवाद इसी प्रकार चलता रहा और स्वरलिपि के आधार पर शब्दों को लेकर यदि कोई दुविधा होती थी, तो वे मुझसे चर्चा करते थे। सभा का संचालन करते हुए पुस्तकालय मंत्री संजय बिन्नाणी ने कहा कि हिन्दीभाषियों की रवीन्द्र संगीत के प्रति उदासीनता के बावजूद कोठारी जी 'एकला चलो रे' को साधते रहे और हिन्दी को रवीन्द्र संगीत की अतुलनीय भेंट दी। कोठारी जी की पुत्रवधू विजया एवं पौत्र यश ने उनका गीत गाया। सभा में चण्डीपुर के श्याम सुन्दर डागा, सम्बलपुर के महेश दम्माणी, पूर्णिमा कोठारी, मनोहर मालानी, अरुण सोनी, गायक महेश दम्माणी सहित महानगर के कई विशिष्ट जन उपस्थित रहे।
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