जगत माँ - कुम कुम काबरा
माँ - मॉ कहां हो तुम? देखो मैं तुम्हारे लिए क्या लाया हूं । रख दो बेटा, मैं अभी आ रही हूं । बहुत थक गई हूं । माँ ' ने उदासी भरे शब्द से  कहा ? क्या हुआ माँ इतनी थकी तो तुम कभी नहीं लगती थी बेटे ने चिंता जताते हुए  कहा। कुछ नहीं बस ऐसे ही । बेटा कुछ न बोला ,वह अपने घर के कामों को करने लगा और सोच रहा था कि मां कितना दर्द सीने में छुपाए रखती है । परंतु किसी के सामने प्रकट नहीं होने देती है । वैसे भी दिन भर गांव जाकर सबका हाल-चाल लेती है । कोई बीमार होता है तो उसकी दवा करती या कोई भूखा होता है तो उसको खाना बनाकर देती । किसी का दुख अपना दुख समझ कर बाँटती । स्वयं बीमार रहकर भी वह सबकी सेवा करती पर चेहरे पर जरा भी सिकन नहीं रहती । यह सोचते सोचते वह सो गया ।
मां ने अपने पुत्र रामू को आवाज दी । कोई आवाज न सुनकर उठी उसने देखा कि बेटा तो सो गया है। मां मन ही मन बुदबुदाई  कितना बड़ा हो गया है घर की कोई चिन्ता नहीं है। खाना भी नहीं खाया । मैं भी थक जाती हूं मां ने बेटे की तरफ देखा और रसोई की तरह चल पड़ी थोड़ी देर में खाना खिलाने के लिए बेटे को जगाया बेटा उठकर बैठ गया मां ने मुस्कुराकर कहा खाना तो खा लें । बेटे ने जल्दी से खाना खा लिया परन्तु मां को उसने पूछा भी नहीं माँ कुछ न बोली अब तो खाना बचा भी नहीं है । बेटे को खिला दिया मेरी भूख मिट गई । यह सोच पुनः माँ अपने बिस्तर पर लेट गई । माँ - माँ तुम कहां हो तुम जल्दी चलो चाची बुला रही है और तुम्हें याद  कर रही है गांव के लखन ने आवाज दी । मां आवाज सुनते ही खड़ी हो गई और बोली तुम्हारी मां जल्दी स्वस्थ हो जाएगी । मैं कुछ दवाई लेकर चल रही हूं इतना कह कर माँ ने चाची के लिए कुछ घरेलू दवाई बनाई और तैयार होकर चाची के घर पहुँच गई ।चाची ने उन्हें देखकर ही राहत की सांस ली क्योंकि मां के स्पर्श मात्र से ही हर व्यक्ति प्रसन्न हो जाता है । माँ की पायल की आवाज सुनकर ही गाँव के  प्रत्येक व्यक्ति समझ जाते थे कि माँ आ गई है। क्योंकि जगत माँ थी । माँ तो स्वयं सबके लिए खड़ी रहती है लेकिन उसको कौन जानता है कि उसने खाना खाया है या नहीं ।
अचानक एक दिन गांव में समाचार फैल गया कि माँ नहीं रही । डॉक्टर ने बताया कि वह कई दिन से बीमार थी उन्होंने खाना भी नहीं खाया था अब लोगों की समझ में आया कि जो माँ रात -दिन हम लोगों की सेवा करती थी हम लोगों ने कभी भी नही पूछा कि माँ ने कुछ खाया है या नहीं । मां शान्त थी। सब लोग उसकी क्रिया कर्म करने के बाद चले गए । कुछ दिन तक चर्चा चलती रही, बेटा बैठे-बैठे सोच रहा था कि मां कितनी महान थी उसकी बराबरी कोई नहीं कर सकता । माँ तो बस माँ ही होती है ॥
कुम कुम काबरा
बरेली( उत्तर प्रदेश)
मौ० नं -7017805455

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