राष्ट्रीय महिला संगठन के तत्वाधान में रामनवमी पर ज्ञान सिद्धा समिति द्वारा एक यक्ष प्रश्न टॉक शो राम राज्य का युवा का सफल आयोजन
रामनवमी के उपलक्ष में पूर्व संध्या पर 16 अप्रैल को वर्चुअल जूम सभागार में ज्ञान सिद्धा साहित्य समिति द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर युवाओं के लिए एक वैचारिक टॉक शो पॉडकास्ट का आयोजन किया। उपस्थिति 400 के करीब रही। मुख्य अतिथि श्रीमती मंजू बांगड़ राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन, विशिष्ट अतिथि श्रीमती ज्योति राठी राष्ट्रीय महामंत्री, सम्मानित अतिथि श्रीमती ममता मोदानी राष्ट्रीय संगठन मंत्री, श्रीमती किरण लढ्ढा राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष, विचार समीक्षक श्री शरद सोनी अध्यक्ष माहेश्वरी युवा संगठन थे। ज्योति राठी ने कार्यक्रम का शुभारंभ आत्म बलिदानी श्री शरद कोठारी, श्री राम कोठारी एवं श्री अविनाश माहेश्वरी को श्रद्धांजलि अर्पित कर महेश वंदना से किया। कार्यक्रम की संक्षिप्त रुपरेखा बताई। तत्पश्चात मंजू बांगड़ द्वारा स्वागत उद्बोधन किया गया। उन्होंने कहा राम जो लोकाभिराम है, लोकार्पण है, लोक रंजक है, मर्यादा पुरुषोत्तम है। सद्गुणों के स्वामी है। राम राज्य के संस्थापक हैं। उनका चरित्र हर युग में अभिनंदनीय है। विशेष रूप से हमारी युवा पीढ़ी के लिए अनुकरणीय है। संस्कारों की उत्तम पाठशाला है। हमें उनके आदर्शों को अपनाना चाहिए। सभागार में रत्नी मां सहित हमारे पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष, राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं विभूतियां उपस्थित थे। पैनलिस्ट में 30 से 35 साल तक के युवा पैनलिस्ट थे। अरुण लोया सिरपुर कागजनगर से, आंचल मूंदडा हिंगोली से, राधिका बाहेती रामपुरहाट से, आर्यन जाजू हैदराबाद जो अमेरिका से जुड़े थे।
अनुराधा जाजू के द्वारा इन युवाओं को साहित्यिक सामाजिक सांस्कृतिक संस्कारिक और पारिवारिक प्रश्न पूछे गए। सभी पैनलिस्ट ने बहुत सुंदर जवाब दिया। ऐसा समाज के द्वारा और माता-पिता के द्वारा कहा जाता है कि आज के युवा दिग्भ्रमित हो गए हैं मगर इस टॉक शो से पता चला कि आज के युवा बहुत ही क्लियर है। अनुराधा जाजू ने युवाओं को कहा कि उन्हें परिवार समाज व देश के हित के लिए अपना योगदान देना होगा। अंत में श्री शरद सोनी के द्वारा पूरी वैचारिक समीक्षा की गई। हर प्रश्न और हर उत्तर को उन्होंने बहुत ही बारीकी से अध्ययन कर समीक्षा दी जो सभागार में मुक्त कण्ठ से सराही गई। अंत में मंजू मानधना ने सभी का आभार व्यक्त किया। नेपथ्य में साहित्य समिति की पूरी टीम का सहयोग रहा।
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