भीनासर, बीकानेर के माहेश्वरी परिवार के श्री गौरी शंकर सारड़ा की ओर से भारतीय संस्कृति को अक्षुण्ण बनाए रखने की दिशा में एक अनूठा नवाचार

अवधूत संत श्री पूर्णानंद जी महाराज की 58वीं पुण्य तिथि पर आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों के अन्तर्गत सेठ ईश्वर दास सारड़ा स्मृति संस्कृत भाषा उन्नयन पुरस्कार, 2024 वितरण समारोह संपन्न हुआ। इस संबंध में जानकारी देते हुए बाबू ईश्वर दास सीता देवी सारड़ा चेरिटेबल ट्रस्ट, भीनासर के प्रधान ट्रस्टी श्री गौरी शंकर सारड़ा ने बताया कि सेठ ईश्वर दास सारड़ा की जन्म शति के अवसर पर उनकी स्मृति में प्रथम संस्कृत भाषा उन्नयन पुरस्कार, 2024 के अंतर्गत प्रथम पुरस्कार 15000, द्वितीय पुरस्कार 11000 एवं तृतीय पुरस्कार 5100 रूपये नगद राशि सहित मीमेंटो-ट्रॉफी एवं अभिनंदन-वंदन पत्र अर्पित किये गए। उन्होंने बताया कि इस पुरस्कार वितरण समिति के संयोजक वरिष्ठ साहित्यकार कवि-कथाकार राजेन्द्र जोशी और समन्वयक एक्स प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी थे। इससे पूर्व श्री गौरी शंकर सारड़ा ने सेठ ईश्वर दास सारड़ा की संपूर्ण जीवन यात्रा का संक्षिप्त विवेचन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि सेठ ईश्वर दास सारड़ा भारतीय धर्म, आध्यात्म व संस्कृति के संवाहक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन अत्यंत सादगी, सरलता और सहजता से जीया। वे गृहस्थी होते हुए भी त्याग व तपस्या की प्रतिमूर्ति थे। गौ सेवक और भगवद भक्त होने के कारण उनका अधिकांश समय गौ सेवा, संत-महात्माओं की सेवा एवं ईश आराधना में व्यतीत होता था। श्री गौरी शंकर सारड़ा ने बताया कि सेठ ईश्वर दास सारड़ा भीनासर नगर पालिका के अध्यक्ष रहे तथा वर्षों तक भीनासर स्थित श्री मुरली मनोहर गौशाला के अध्यक्ष एवं श्री पूर्णेश्वर महादेव चेरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं दी। श्री गौरी शंकर सारड़ा ने बताया कि सेठ ईश्वर दास सारड़ा का संस्कृत भाषा के प्रति अत्यंत लगाव था। अत: उनकी चिर स्मृति को बनाए रखने के लिए, उनकी जन्म शति के इस अवसर पर आगेे प्रतिवर्ष सेठ ईश्वर दास सारड़ा स्मृति संस्कृत भाषा उन्नयन पुरस्कार देने का निर्णय लिया गया है।
पुरस्कार वितरण समिति के संयोजक राजेन्द्र जोशी ने बताया कि प्रथम सेठ ईश्वर दास सारड़ा स्मृति संस्कृत भाषा उन्नयन पुरस्कार, 2024 श्री पूर्णेश्वर महादेव मंदिर परिसर में आयोजित एक भव्य धार्मिक समारोह में अर्पित किए गए। इस अवसर उन्होंने इस पुरस्कार की रूपरेखा बताई। राजेन्द्र जोशी ने संस्कृत भाषा की महत्ता को उजागर करते हुए कहा कि संस्कृत समस्त भाषाओं की जननी है। अत: संस्कृत भाषा के उन्नयन, विकास एवं प्रचार-प्रसार के उद्देश्य से यह पुरस्कार देना अत्यंत सराहनीय कार्य है। राजेन्द्र जोशी ने बताया कि इस पुरस्कार के अंतर्गत प्रथम पुरस्कार राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय, बीकानेर की शास्त्री तृतीय खण्ड परीक्षा 2023 में महाविद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली छात्रा सुश्री रिंकी राजपूत एवं द्वितीय पुरस्कार इसी परीक्षा में द्वितीय स्थान प्राप्त करने वाले छात्र रोहित व्यास को प्रदान किया गया।
पुरस्कार वितरण समिति के समन्वयक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी ने बताया कि संस्कृत भाषा के उन्नयन की दृष्टि से पुरस्कार वितरण समिति द्वारा लिए गए निर्णय के अनुसार एक तीसरा विशिष्ट पुरस्कार ओर दिया गया। यह पुरस्कार उदयरामसर रोड़ पर स्थित मुरली मनोहर धोरा पर गीता वाचन में श्रेष्ठ स्थान प्राप्त करने के उपलक्ष में उदयरामसर के तरुण वय के बालक महेश प्रजापत को दिया गया। इस अवसर पर बालक महेश प्रजापत ने कथा वाचक श्यामसुंदर महाराज द्वारा श्रीमद् भगवद्गीता के विभिन्न अध्यायों के पूछे गए अनेक श्लोकों का सस्वर धारा प्रवाह वाचन कर उपस्थित सभी भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसके अतिरिक्त बालक महेश प्रजापत ने कथा वाचक श्यामसुंदर महाराज द्वारा श्रीमद् भगवद्गीता के योगदान पर पूछे गए प्रश्नों के हाजिर जवाबी से सटीक उत्तर देकर उपस्थित भक्तों की खूब तालियां बटोरी द्य पुरस्कार वितरण समारोह स्वामी अखंडानन्द जी महाराज, कथा वाचक श्यामसुंदर जी महाराज, जमना दास जी सारड़ा, गौरी शंकर जी सारड़ा, शिक्षाविद ओम प्रकाश सारस्वत, पुरषोत्तम सारड़ा, गोकुल सारड़ा, पप्पू सारड़ा, चंद्र मोहन सारड़ा, व्यंग्यकार-संपादक प्रोफेसर डॉ.अजय जोशी, साहित्यकार कवि-कथाकार राजाराम स्वर्णकार, एक्स प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी, सेवानिवृत इंजीनियर दिनेश पांडिया, नोखा निवासी व कोयम्बटूर प्रवासी विजयराज सेठिया, भजन गायक नारायण बिहानी, सुप्रसिद्ध उद्योगपति देव किशन राठी आदि के सानिध्य में संपन्न हुआ। इस अवसर पर सेठ ईश्वर दास सारड़ा की सुपुत्रियों श्रीमती दुर्गा बिहानी व श्रीमती लक्ष्मी राठी ने अपने दिवंगत पिताश्री सेठ ईश्वर दास सारड़ा को समर्पित कविता पाठ प्रस्तुत कर सबको भावविभोर कर दिया। समारोह में अतिथि के रूप में उपस्थित शिक्षाविद ओम प्रकाश सारस्वत का माल्यार्पण व मूमेंटो भेंट कर अभिनंदन किया गया। समारोह में ऋषिकेश, हरिद्वार, बीकानेर आदि से पधारे अनेक साधु-संतों सहित सैकड़ों की संख्या में भक्त एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे। पुरस्कार वितरण समारोह का संचालन साहित्यकार कवि- कथाकार राजेन्द्र जोशी तथा सहयोग एक्स प्रिंसिपल, चिंतक व लेखक प्रोफेसर डॉ. नरसिंह बिनानी द्वारा किया गया। सभी का आभार ज्ञापन गोकुल दास सारड़ा ने किया।

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