राजस्थान के चुरू जिले में कानूता गाँव की माहेश्वरी बहन-बेटियों ने लिखा नया इतिहास
माहेश्वरी समाज की देश भर की 180 बहन-बेटियों ने कानूता गाँव में पहली बार गोशाला की सहायतार्थ नानीबाई रो मायरो का चार दिवसीय धार्मिक-सामाजिक अनुष्ठान कर नया इतिहास रच दिया। आशा है माहेश्वरी समाज की बहन-बेटियों की इस पहल से समाज के लोग भी प्रेरणा लेंगे। कानूता गाँव में श्रीकृष्ण गोपाल गोशाला की गायों के लिए गाँव के इतिहास में पहली बार गत 13 से 16 दिसंबर तक नानीबाई रो मायरो कथा का सफल आयोजन इसका प्रमाण है कि बहन-बेटियां भी यदि ठान लें तो बहुत कुछ सकारात्मक और सुंदर कार्य कर सकती हैं। इस कथा हेतु कथा व्यास गोवत्स राधाकृष्ण महाराज को कानूता गाँव में लाने की जिम्मेदारी रामविलास हुरकट ने निभाई। इस धार्मिक आयोजन का आरंभ 13 दिसंबर की सुबह 9.15 बजे कलश यात्रा से हुआ जिसमे बड़ी तादाद में महिलाएं अपने सिर पर कलश रखकर निकलीं और गाँव की परिक्रमा कर कथास्थल तक पहुँचीं। इसी दिन दोपहर दो से छह बजे तक कथाव्यास ने नानीबाई रो मायरो के कथानक की मीमांसा की। दूसरे दिन 14 दिसंबर को सुबह 9.15 बजे से सामूहिक सुंदरकांड का पाठ और सुप्रसिद्ध गायिका नम्रता करवा द्वारा भजनों की शानदार प्रस्तुति दी गई। दोपहर के सत्र में कथा का अगला सोपान समाप्त हुआ। 15 दिसंबर को सुबह के पहले सत्र में 10 बजे से दो बजे तक कथा और शाम 3.15 भाइयों का स्वागत समारोह आयोजित किया गया। 16 दिसंबर को हवन पूर्णाहुति व महाप्रसाद के साथ यह आयोजन संपन्न हुआ। इस आयोजन की नींव पिछले साल भागवत कथा के दौरान रखी गई जब मुंबई निवासी श्रीमती शांतादेवी रामविलास हुरकट (स्व.रामनिवासजी जाजू की बेटी) और मैनपुरी निवासी बसंतीदेवी शिवरतन तापडिय़ा (गणपतलालजी सोमानी की बेटी) की अगुवाई में निश्चय किया गया कि गोशाला की सहायतार्थ मायरो का आयोजन किया जाये। एक व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर गाँव की 180 बहन-बेटियों को जोड़ा गया जिनकी ससुराल गाँव से बाहर है। खास बात यह रही कि 50 साल के बाद गाँव की 180 बहन-बेटियां एक साथ इस आयोजन में सहभागी बनीं। इस आयोजन के माध्यम से एक करोड़ रुपये की धनराशि एकत्र कर गोशाला प्रबंधन को गोसेवा के लिए प्रदान की गई। इस बीच गोशाला में चल रहे 30 लाख रुपये के विकास कार्यों का उद्घाटन भी किया गया। आयोजन में गोशाला अध्यक्ष सतीश कुमार झंवर, शिवरतन सोमानी, घनश्याम झंवर, जगदीश सोमानी सहित कानूता के कोलकाता निवासी प्रेमसुख सोमानी का विशेष सहयोग रहा।
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