14वां राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन आयोजित
राष्ट्रीय पुस्तक न्यास, भारत महाराणा प्रताप कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर एवं सलिला संस्था, सलूंबर के संयुक्त तत्वावधान में राजस्थान कृषि महाविद्यालय परिसर में आयोजित 14 वें राष्ट्रीय बाल साहित्यकार सम्मेलन की अध्यक्षता संचय जैन ने की। मुख्य अतिथि डॉ. संजीव कुमार, विशिष्ट अतिथि प्रो. उमाशंकर शर्मा, डॉ.ज्योतिपुंज, डॉ. के.एल. कोठारी एवं डॉ. शील कौशिक थी। संयोजक डॉ. विमला भंडारी ने सभी का स्वागत किया। प्रथम सत्र उद्घाटन, लोकार्पण, पुरस्कार सम्मान एवं समीक्षा का रहा। सम्मेलन के मुख्य विषय 'संस्कार निर्माण की पौधशाला है बाल साहित्य' पर गहन विचार विमर्श हुआ।
बाल साहित्य संस्कार निर्माण की पौधशाला है इस विषय को केन्द्र में रखते हुए 14 वें बाल साहित्यकार सम्मेलन के अवसर पर मुख्य अतिथि पद से सम्बोधित करते हुए इंडिया नेटबुक्स के निदेशक एवं साहित्यकार डॉ. संजीव कुमार ने कहा कि प्रत्येक बाल साहित्यकार को बालक बनकर बाल मनोविज्ञान को समझते हुए बाल साहित्य का सृजन करना चाहिए। आपने जोर देकर कहा कि बच्चों को पुस्तक पठन की ओर प्रेरित करना वतर्मान की बहुत बड़ी आवश्यकता है। महाराणा प्रताप कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. उमाशंकर शर्मा ने साहित्य को बालक के मानसिक पोषण व सर्वांगीण विकास में एक महत्वपूर्ण कड़ी बताया।
सलिला की ओर से सलिला विशिष्ट साहित्यकार सम्मान डॉ. सतीश कुमार को तथा साहित्य रत्न सम्मान लखनऊ की नीलम राकेश चंद्रा को प्रदान किय गया। जीवनी विधा की लेखन प्रतियोगिता में डॉ. शील कौशिक एवं नमिता सिंह को प्रथम एवं तरुण कुमार दाधीच, डॉ. इन्दु गुप्ता तथा डॉ. लता अग्रवाल को द्वितीय पुरस्कार दिया गया। इसके अलावा श्रेष्ठ लेखन के लिए नीरज शास्त्री एवं शिल्पी पांडे को पुरस्कार प्रदान किया गया। कार्यक्रम का प्रारम्भ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्वलन तथा शकुंतला सरूपरिया की सस्वर सरस्वती वंदना से हुआ। सलिला संस्था की अध्यक्ष डॉ. विमला भडांरी ने अतिथियों का स्वागत किया एवं सलिला संस्था के 30 वर्षीय सफर से अवगत कराया।
इस अवसर पर सलिल प्रवाह वार्षिकी, आत्मकथाओं का सागर, जीवनियों की गुल्लक एवं द ऑरबिट आई पुस्तकों का लोकार्पण मंचस्थ अतिथियों द्वारा किया गया। इन पुस्तकों की समीक्षा मधु माहेश्वरी, हरसन मेघवाल एवं डॉ. शील कौशिक द्वारा की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. इन्दु गुप्ता, फरीदाबाद ने किया। विशिष्ट अतिथि पं. जवाहरलाल नेहरु बाल साहित्य अकादमी के सचिव राजेन्द्र मोहन शर्मा ने सम्बोधित करते हुए अकादमी के कार्यो एवं उपलब्धियों की चर्चा की। आपने सलिला संस्था की बाल साहित्य की गतिविधियों की सराहना की। विज्ञान समिति के संस्थापक डॉ. के.एल. कोठारी, युगधारा के संस्थापक डॉ. ज्योतिपुंज ने डॉ. विमला भंडारी के कार्यक्रम को बालको के लिए अत्यन्त उपयोगी बताया। समारोह के अध्यक्ष बच्चों का देश पत्रिका के सम्पादक संचय जैन ने अपने उद्बोधन में बाल साहित्यकारों को कथनी ओर करनी में भेद नहीं रखने का परार्मश दिया। प्रथम सत्र के अन्त में जगदीश भंडारी ने आभार व्यक्त किया।
द्वितीय सत्र में नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा आयोजित पैनल चर्चा के अंतर्गत 'बाल साहित्य में जीवनी विधा लेखन' पर कार्यशला आयोजित हुई। जिसमें अध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार, विषय विशेषज्ञ डॉ. सतीश कुमार एवं प्रकाश तातेड़ ने विषय का विस्तार से विश्लेषण किया। चर्चा के प्रारम्भ में संयोजक द्विजेंद्र कुमार ने जीवनी विधा पर मूलभूत विचार प्रस्तुत किया। डॉ. विमला भंडारी ने इस सत्र में जीवनी विधा की दिशा में किये जा रहे कार्यो का उल्लेख किया। डॉ. शील कौशिक ने जीवनियों की गुल्लक पुस्तक की समीक्षा की। मेजर शक्तिराज कौशिक, कुसुम अग्रवाल, डॉ. लता अग्रवाल ने अपने विचार व्यक्त किये। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रीय गान के साथ हुआ।
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