टेसू के फूल (लघु-कथा) - रामानंद काबरा

बसन्त ऋतु ने दस्तक दे दी है, मीठी सर्द हवाओं के साथ प्रकर्ति भी अपने यौवन पर है, महेंद्र के घर के पीछे की तरफ लगा फ्लाश का व्रक्ष पर लाल गुलाबी टेसू के फूल सूंदर आरकिटेक्ट डिज़ाइन होम की शोभा बहुगुणी कर रहे थे।
महेंद्र के छोटे बेटे के विवाह को अभी दो वर्ष ही नही हुए,छोटी बहू सुप्रिया ने अपने सजीव किरदार से घर का माहौल ही बदल दिया।
पहले भी घर मे स्नेह-आदर के भाव सभी मे कूट कूट के भरे थे।बड़ी बहू संध्या,बेटे अनुज, कीर्ति ओर संव्य महेंद्र की पत्नी सरोज सब को एक मुट्ठी की तरह बांधे कुशलता के साथ घर का सहज संचालन कर रही थी।सभी का उपर्युक्त सम्मान,सब की अहमियत सब की सलाह मशवरा से महेंद्र की ग्रहस्थी की गाड़ी निर्बाध-स्मूथ चल रही थी।
सुप्रिया एक बड़े उधोगपति की बेटी थी,उसके पिताजी ने शादी के समय खूब खर्च किया था।तो उसके पास पहनने ओढ़ने के अपेक्षाकृत ज्यादा वेरायटी होती। आज भी परिवार को किसी शादी में जाना था,सुप्रिया ने अपने  गहनों में से एक पोलकी का बड़ा हार ,उसका पूरा सेट अपनी भाभी संध्या के पास लेके गयी,भाभी के मना करने पर भी "आप "आज यह पहनो,आपके कपड़ो पर बहुत जमेंगे।मम्मी को एक लाइन डायमंड की चूड़ियां गजरा दे के आयी,ओर मम्मी के मना करने के बाद भी उसने पहना दिया।खुद बड़ी सादगी से रहती। 
मम्मी को कई बाजार जाना होता,उनके छोटे बड़े काम होते ,ड्राइवर नही होता तो वो छोड़ने की बात करती,या उनके साथ चली जाती।भाभी के बच्चो को स्कूल से लाना हो,वो हमेशा एक्टिव मोड़ में रहती भाभी में लेके आ जाऊं? भाभी के हर काम मे हाथ बंटाती। वो बड़ी है,उसके इस भाव,अहम को कभी नही भूलती,बल्कि भूल से भी नज़र अंदाज़ नही करती।अपने किसी भी एक्ट से  घर के किसी सदस्य के सम्मान को आंच नही आजाये,इसका बहुत खयाल रखती। घर कि सफाई वाली बाई से गेट कीपर तक का...
घर मे दादी जी को दवाई देनी हो,ससुर जी का जन्म दिन सेलिब्रेट करना हो,वो हमेशा इनेसेंटिव लेती।घर के हर सदस्य की छोटी से छोटी जरूरतों पर उसकी नज़र होती ।और उसका क्रियान्वयन परफेक्ट होता। बड़े भैया भाभी की शादी के वर्षगाँठ का दिन हो,उसे बड़े मनोयोग से उत्सव सा रूप दे देती।
महेंद्र के एक लड़की भी थी,विदेश  रहती थी।उनसे जब भी बात करती,'दीदी" इस बार जल्दी नही जाने देंगे..आप जीजू से लम्बी छुटी लेके आना।और आपको जीजू लेने आएंगे तो ही भेजेंगे।ऐसी मीठी शिकायत से सब का दिल हर लेती।दीदी इस बार आओ,हमने आपके साथ एक विशेष आउटिंग प्लान किया है।कोई भी रिश्तेदार घर आता..उसका विशेष ख्याल रखा जाता।याने उसको यह अहसाह होता कि मेरे लिए खास किया गया है। उनके साथ आये बच्चों को गिफ्ट..टॉफी. देना कभी नही भूलती।
आज सुप्रिया के मम्मी पापा किसी शादी में आये हुए थे।उनको लेने महेंद्र, अनुज दोनो गए..लाने को अनुज अकेला लेके आसकता था,लेकिन किसी को विशेष सम्मान देना कोई इस परिवार से सिख सकता था।घर पर आए तो सभी ड्राइंग रूम में बैठ गये..खूब हंसी मजाक हुई। 
जब समधी जाने लगे तो,महेंद्र ओर पत्नी ने कहा,समधी जी,आप ने क्या "हीरा"जना है.. क्या संस्कार दिए है।सुप्रिया की जितनी तारीफ करे कम है।इतने में जेठानी संध्या बोल पड़ी,सुप्रिया हम सब से छोटी है लेकिन यह घर में दादी अम्मा की तरह सब का ध्यान रखती है। महेन्द की पत्नी सरोज ने सुप्रिया को खींच के बगल से बाहुपाश में जकड़ लिया..यह हमारी बेटी से बढ़कर है जी।जेठ अनुज भी कन्हा खामोश रहने वाले थे,बोले साहजी आप एक संस्कारो की पाठशाला खोल दे, ओर शादी से पहले आपके यंहा का सर्टिफिकेट अनिवार्य कर दे।किस घर मे असन्तोष ,कलह नही रहेंगे।महेंद्र ने भी विदा करते कहा,
*हमारे बगिया में लगे टेसू के फूल तो एक विशेष ऋतु में अपना रंग बिखेरते है,पर आपकी बेटी ने हमारे घर को बारह मास के लिए इतना कलर फूल कर दिया है,यह कभी आपके यंहा भी आती है तो हमारा घर मुरझाने लगता है।
सुप्रिया की मम्मी की आंखों के पोरों पर गर्व, खुशी,संतोष के दो आँशु निकल आये,ओर उसके पिता का तो सीना तो जैसे गर्व से फूल गया था।

 

रामानंद काबरा
94140 70142

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