भारत के 14 वें राष्ट्रपति महामहिम माननीय श्री राम नाथ जी कोविंद का मानस सिद्धि राष्ट्रीय कार्यक्रम (अयोध्या हेतु शुभकामना सन्देश)
अखिल भारतीय माहेश्वरी महिला संगठन कि माननीय राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती मंजू बांगड़, राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती ज्योति राठी, संगठन के समस्त राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय पदाधिकारीगण, विशेष आमंत्रितगण, अतिथिगण और सम्पूर्ण भारतवर्ष एवं नेपाल से एकत्रित हुई हमारी सम्मानित बहनों........
आज अखिल भारतीय माहेश्वरी महिला संगठन के मानस सिद्धि कार्यक्रम में आप सभी के बीच वर्चुअल रूप से उपस्थित होना मेरे लिए हर्ष का विषय है। यह कार्यक्रम सामाजिक चेतना नारी सामथ्र्य और सांस्कृतिक राष्ट्रीयता का एक दिव्य संगम है। आपका संगठन अपने स्थापना के 50 वर्ष पूरे करने के ऐतिहासिक पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, ऐसे में इस कार्यक्रम का महत्व और भी बढ़ जाता है। किसी भी संगठन के 50 वर्ष पूरा करना, यह उसके सदस्यों की तपस्या सेवा निरंतरता और सामाजिक उत्तरदायित्व को दर्शाता है और आज का यह आयोजन भी समाज की चेतना नारी की सामथ्र्य और राष्ट्र की सांस्कृतिक आत्मा का एक सशक्त अभिव्यक्ति पल है।
प्रिय बहनों..... आपका अधिवेशन अयोध्या की पावन धरती पर हो रहा है, यह अपने आप में अत्यंत अर्थपूर्ण है। अयोध्या केवल एक नगरी नहीं यह मर्यादा कर्तव्य और करुणा का जीवंत प्रतीक है। यह वह भूमि है जहां हमें यह शिक्षा मिलती है की शक्ति का सबसे ऊंचा रूप संयम और त्याग में निहित होता है। ऐसी भूमि पर नारी चेतना का यह संगम बहुत ही सौभाग्यपूर्ण है।
प्रिय बहनों...... आज का विश्व तेज परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है विज्ञान और तकनीक ने बहुत सी नई संभावनाएं खोल दी हैं, पिछले कुछ दशकों में भौतिक रूप से विश्व में बहुत तरक्की की है परंतु, इन सब के साथ ही समाज में भी बहुत सी नई चुनौतियां भी सामने आई है। ऐसे समय में यह प्रश्न स्वाभाविक है कि क्या विकास केवल भौतिक प्रगति से मापा जा सकता है या फिर उसका वास्तविक मूल्य मानव संवेदना सामाजिक संतुलन और नैतिकता में निहित होता है।
भारत की परंपरा हमें सिखाती है की संतुलित विकास वही है जिसमें प्रगति और जीवन मूल्य साथ-साथ चलते हैं और आदिकाल से हमारी संस्कृति में इसी संतुलन की सबसे बड़ी वॉहक रही है नारी, हमारी संस्कृति में माना जाता है की 'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता:' अर्थात जहां नारी का सम्मान होता है वहां देवत्व का वास होता है। यही कारण है कि हमारी संस्कृति में नारी को सम्मान व अधिकार मिला है और यहां तक की मार्गदर्शक का स्थान भी मिला है।
प्रिय बहनों..... मुझे बताया गया है कि आपका संगठन शिक्षा, आत्मरक्षा और स्वास्थ्य के कार्यों से लेकर पर्यावरण संरक्षण, डिजिटल साक्षरता व स्वरोजगार को भी बढ़ावा दे रहा है। आपके द्वारा संचालित आत्मरक्षा प्रशिक्षण, किशोरी संस्कार शिविर, वस्त्रम उपक्रम, वृक्षारोपण अभियान, स्वदेशी मेले, साइबर सुरक्षा जागरूकता, नेत्रदान और स्वास्थ्य मिशन जैसे कार्यक्रम यह दर्शाते हैं कि यह संगठन सामाजिक जरूरत की पूर्ति और समस्याओं के निवारण के लिए किसी भी किसी की राह नहीं देखता बल्कि समाधान की पहल करता है।
प्रिय बहनों...... आज मैं विशेष रूप से स्वदेशी की भावना के प्रति आपका ध्यान आकर्षित करना चाहता हूं स्वदेशी केवल आर्थिक नीति नहीं केवल वस्तुओं के चयन का प्रश्न नहीं है, यह राष्ट्रीय स्व अभियान आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक गौरव का संकल्प है जब एक परिवार स्वदेशी को अपनाता है तो वह केवल अर्थव्यवस्था को नहीं बल्कि देश के श्रमिक कारीगर और उद्यमी को भी सशक्त करता है। परिवार की आर्थिक प्राथमिकताओं को आकार देने में महिलाओं की केंद्रीय भूमिका होती है। यदि हमारी माताएं और बहने यह संकल्प लें कि वह अपनी खरीदारी में स्वदेशी को प्राथमिकता देगी तो आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य स्वत साकार होने लगेगा।
प्रिय बहनों..... महिलाएं शिक्षित आत्मविश्वासी जागरूक होती हैं तब समाज व राष्ट्र स्वाभाविक रूप से प्रगतिशील बनता है। भारत के भविष्य का निर्माण बड़े राजनेताओं सरकारी अधिकारियों और उद्योगपतियों के हाथ में नहीं है, भारत के भविष्य का निर्माण सही मायने में आप सबके हाथों में है, क्योंकि भारत का भविष्य हमारे घरों में गढ़ा जाता है भारत का भविष्य उन संस्कारों में आकार लेता है जो प्रथम गुरु के रूप में एक मां अपने बच्चों को देती है मुझे विश्वास है कि यह मानस सिद्धि कार्यक्रम अखिल भारतीय माहेश्वरी महिला संगठन के लिए नवचेतना नव दिशा और नव संकल्प का स्रोत बनेगा। इस आयोजन से जुड़ी सभी पदाधिकारी बहनों और कार्यकर्ता मातृशक्ति को इस सफल आयोजन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई आप सभी के उज्जवल भविष्य निरंतर सेवा और सामाजिक नेतृत्व के लिए भी मेरी शुभकामनाएं।
जय मातृशक्ति जय हिंद
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