माहेश्वरी महाकुम्भ - अपूर्व महाधिवेशन 2026
अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महासभा का सानिध्य, पश्चिम राजस्थान प्रादेशिक माहेश्वरी सभा का आतिथ्य, जोधपुर जिला माहेश्वरी सभा की भावभरी मनुहार, साफल्य-बीज 15 से 45 वर्ष के हजारों समर्पित कार्यकर्ता... सूत्रधार थे हमारे नौजवान सभापति श्री संदीप जी काबरा और उनकी उत्साही टीम...।
पचास हजार के करीब देश-दुनिया से आए हमारे-अपने सगे-संबंधी, भाई-बंधु वास्तव में मेहमान बनकर नहीं बल्कि मेजबान की भूमिका में नजर आ रहे थे। प्रत्येक बंधु-भगिनी-युवा तन्मयता से कार्यरत थे। शोभायात्रा हो या ढोल की थाप भजन हो या भोजन की पंगत, अधिवेशन हो या एक्सपो की स्टाल्स... सभी तरफ अनुशासन का माहौल... वाकई सिद्ध कर दिया कि हम माहेश्वरी निराले हैं।
सन् 2019 के महाधिवेशन का नारा कि उतना लो थाली में व्यर्थ न जाये नाली में आज यह नारा हमारी जीवन शैली बन गया, जूठन का नाम ही नहीं।
जीवनकाल में ऐसे विरल क्षण ही आते हैं जो अपनी गहरी छाप छोड़ जाते हैं। मैं बात कर रहा हूँ उस शख्स की जिसके हल्के से इशारे को कार्यकर्ता तो भांप जाते हैं, पर उसी इशारे को भामाशाह भी समझ कर अपनी तिजोरी के द्वार खोलकर अपने धन की सदुपयोगिता को प्रत्यक्ष देखने को तत्पर रहते हैं।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का यह समर्पित कार्यकर्ता, जिसके कृतित्व से राजनीति का जगत भी प्रभावित हैं। लोक लाडले हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र भाई मोदी का समाज को संबोधित संदेश हो या वर्तमान काल के चाणक्य हमारे गृहमंत्री श्री अमित शाह का साक्षात संबोधन -इस बात पर अपनी अमिट मोहर लगाता है।
समाज को आज इस शख्शियत की निरन्तरता चाहिए क्योंकि सन् 1891 में स्थापित महासभा के पुरोधाओं की अग्रिम सोच-समझ, नीति-निर्धारण की भावनाओं को आजतक के सभी अग्रजों ने सींचा है, समाज में सतत सुधार की प्रक्रिया की धारा बही है पर आज विकास के जो भाव उद्वेलित हो रहे हैं, स्तुत्य हैं।
आर एस एस की तरह अपंजीकृत हमारी महासभा जो सद्विचारों का सतत उत्पादन करती है, अपनी दूरदर्शिता और प्रेरणा से अनेकानेक न्यासों, योजनाओं, परिकल्पनाओं से समाजोत्थान-विषय को साकार रुप देने में हमारे युवा सभापति श्री संदीप जी काबरा की सकारात्मक गहराई समझने-समझाने का ज्वलंत विषय है। फ्लैगशिप योजना हो या अलंकरण समारोह, एक न्यास में अनेक न्यासों को जोडऩा, पाणिग्रहण की उम्र की बात हो या किशोर-किशोरी संगठन की आवश्यकता हो, प्री वेड शुटिंग हो या अनावश्यक दिखावा, प्रशासनिक शिक्षा हो या स्वरोजगार की राह... सभी विषयों पर अनुसंधान और फिर क्रियान्वयन इस ओर जो कदमताल हमारा यह नौजवान सभापति कर रहा है, यह समझने का विषय है।
यह कोई किसी की विरुदावली नहीं है बल्कि मन से उपजे भाव है। महाधिवेशन का जनसमूह उमड़-घुमड़ कर ऐसी ही बातें कर रहा था। महासभा की उपादेयता और उपयोगिता का विश्लेषण कर ही हमारी केन्द्र सरकार ने विशेष डाक टिकट का अनावरण किया। अति व्यस्त हमारे गृहमंत्री ने न केवल माहेश्वरीत्व की शोभा बढ़ाई बल्कि वास्तविक परिचय देते हुए हमें दाता बताया तो स्वभाषा के महत्व को भी बताया। आभार अमित भाई, आपने हमारे वर्तमान नेतृत्व को जांचा-परखा।
मैं माहेश्वरीत्व के उज्ज्वल भविष्य की कामना करता हूँ।
जय महेश - जयश्रीकृष्ण।
जुगल किशोर सोमाणी
प्रदेशाध्यक्ष - पूर्वोत्तर राजस्थान प्रादेशिक माहेश्वरी सभा
शांति कुंज, बी - 94, आर्यनगर विस्तार,
मुरलीपुरा, जयपुर 302 039 (राजस्थान)
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