हरिप्रकाश राठी 'श्रीमती बसंतीदेवी चांडक' साहित्य पुरुस्कार 2025 से सम्मानित

कला एवं साहित्य को प्रोन्नत करने हेतु अकोला माहेश्वरी समाज ट्रस्ट द्वारा प्रतिवर्ष दिया जाने वाला प्रतिष्ठित श्रीमती बसंती देवी चांडक साहित्य पुरस्कार-2025 के लिए इस बार जोधपुर के श्री हरिप्रकाश राठी के कहानी-संग्रह 'कॉर्बेल का उपहार' का चयन हुआ है। दिनाँक 24 अगस्त 2025 अपरान्ह चार बजे आकोला में आयोजित एक भव्य समारोह में उन्हें यह पुरस्कार प्रदान किया गया। पुरस्कार हेतु देशभर से प्रविष्टियां प्राप्त हुई थी। पुरस्कार स्वरूप उन्हें श्रीफल, शॉल, सम्मान-पत्र के साथ रूपये एक लाख का चेक भी दिया गया। श्री राठी ने अब तक दस कथा-संग्रह तीन नि:बन्ध-संग्रह एवं कतिपय लघुकथाएं लिखी हैं। अखबारों के संपादकीय पृष्ठ पर उनके पांच सौ से अधिक आलेख प्रकाशित हुए हैं। उन्हें पूर्व में भी राजस्थान साहित्य अकादमी का विशिष्ट साहित्यकार सम्मान, कमलेश्वर स्मृति श्रेष्ठ कथा-सम्मान, वीर दुर्गादास सम्मान, मानस सम्मान आदि अनेक सम्मान मिले हैं इस अवसर पर बोलते हुए श्री राठी ने कहा कि विश्वभर में क्रांति का सूत्रपात करने, उसे आगे बढ़ाने, आडम्बरों एवं कुप्रथाओं को हटाने आदि में कलम ने क्रान्तिबीज की तरह कार्य किया है। कलमकार हर युग में दीपस्तम्भ बनकर समाज की अंधेरी राहों को रोशन करते आए हैं। जिन समाजों ने कलमकारों को सम्मान दिया है, उन समाजों में न सिर्फ मनुष्य एवं मनुष्यता महफूज़ है, वहां की संस्कृति भी अनुदिन पल्लवित होती है। कलम इसीलिए सत्य की सबसे बड़ी संवाहक है। मुंबई से पधारे मुख्य अतिथि श्री सुभाष काबरा ने कहा कि राठीजी की कहानियां लोकरंजक हैं, साहित्य के मानदंडों पर भी खरी उतरती हैं। अकोला समाज के अध्यक्ष श्री विजय पनपालिया ने कहा कि समय आ गया है जब हम ऐसी कहानियों का सृजन करें जो समाज की चेतना को समृद्ध करें। वरिष्ठ आलोचक रामप्रकाश वर्मा ने कहा कि राठीजी की कमल पयस्विनी की तरह बहती है एवं हर कहानी का अंजाम आपको विस्मय विमुग्ध कर देता है।

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