लाठी परिवार में बढ़ रही नेत्रदान की परंपरा, भगवान जाते-जाते दृष्टिहीन को दे गए उजियारा
बूंदी 9 जुलाई। शहर के लखोटियों की गली, धाबाईयों का चौक निवासी श्री भगवान लाठी का दिनांक 7 जुलाई को लंबी बीमारी के चलते देहान्त हो गया। विनम्र स्वभाव, सदाचारी और धर्म-कर्म में आस्था रखने वाले श्री भगवान लाठी ने न सिर्फ अपना नाम सार्थक किया बल्कि अपना जन्म भी नेत्रदान के माध्यम से सफल बनाया। नेत्रदानी लाठी शहर के कई सामाजिक संगठनों में सक्रिय थे। उन्होंने परिवार में आयी विपरित परिस्थितियों का दृढ़ता और आत्मबल से मुकाबला भी किया।
संस्था के ज्योति मित्र व पारिवारिक सदस्य संजय लाठी की पहल पर उनकी पत्नी श्रीमती रमा लाठी सहित दोनो पुत्र श्री प्रशांत एवं गौरव लाठी ने दिवंगत श्री भगवान लाठी के नेत्रदान की सहमति दे दी। इसके उपरांत कोटा से शाइन इंडिया फाउंडेशन की टीम बूंदी के लिए रवाना हुई और निवास स्थान पर ही टीम ने परिजनों की उपस्थिति में नेत्रदान की प्रक्रिया संपन्न हुई ।
उल्लेखनीय है कि 26 सितंबर 2010 को इनके अग्रज भ्राता श्री गणेश दत्त लाठी का भी नेत्रदान परिवार की ओर से संपन्न कराया गया था। ईबीएसआर के बीबीजे चैप्टर कोऑर्डिनेटर डॉ. कुलवंत गौड़ ने बताया कि बूंदी जिले में अभी तक 76 दिवंगतो के नेत्रदान शाइन इंडिया फाउंडेशन के माध्यम से प्राप्त हुए हैं। नेत्रदानी लाठी की श्रद्धांजलि सभा मे श्री महेश क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी लिमिटेड एवं हाड़ौती संभाग में नेत्रदान, अंगदान व देहदान का कार्य कर रही शाइन इंडिया फाउंडेशन की और से नेत्रदान जैसे पुनीत कार्य के प्रति परिजनों को सम्मान पत्र भेंट किए। लाठी परिवार में नेत्रदान व देहदान संकल्प की बढ़ रही परम्परा की उपस्थित जनों ने भूरी-भरी प्रशंसा की।
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