नेपाल भ्रमण - माहेश्वरी समाज के साथ एक यादगार अनुभव

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी युवा संगठन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्वाचल महावीर चांडक ने हाल ही में संगठन आप के द्वार के तहत नेपाल भ्रमण किया, जिसमें उन्होंने काठमांडू और विराटनगर में माहेश्वरी समाज के बंधुओं और युवा साथियों से मुलाकात की। इस दौरान, उन्होंने महिला सभा और युवा संगठन के सभी सदस्यों से मुलाकात की और उन्हें महेश नवमी की शुभकामनाएं दीं।

चांडक जी ने अपने भाषण में कहा, कि माहेश्वरी समाज के युवा भाइयों से निवेदन करने आया हूँ कि आप समाज से जुड़ो, संगठन से जुड़ो, अपनी संस्कृति से जुड़ो। आपने बड़ों को किसी ब्याह में जाते देखा होगा, वे नए रिश्ते बनाकर आते थे, एक दूसरे का परिचय देते थे और पूरे परिवार की कुंडली निकाल देते थे। आजकल हम लोग समाज से जुडऩा नहीं चाहते, घर में मारवाड़ी भाषा नहीं बोलना चाहते, नए लोगों से मिलना नहीं चाहते। हमें समझना होगा कि नई पीढ़ी समाज का भविष्य है। अगर वो अपने समाज से नहीं जुड़ेगी, तो हमारी संस्कृति और परंपराएं कैसे टिकी रहेंगी?

चांडक जी ने आगे कहा, नेपाल और भारत के माहेश्वरी समाज के बीच एक सेतु बनाना जरूरी है। जहाँ नेपाल से आया नौजवान भारत के माहेश्वरी समुदाय से मिल-जुल सके। नौजवानों को प्रोत्साहित करना चाहिए कि वे माहेश्वरी समाज के सामाजिक और व्यापारिक गतिविधियों में हिस्सा लें।

चांडक जी के जन्मदिन के अवसर पर, युवा संगठन के सदस्यों ने एक क्रिकेट कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें सभी साथियों के साथ मिलकर जन्मदिन का केक काटा गया। इसके बाद, उन्होंने बाबा पशुपति नाथ के दर्शन किए, जो उनके लिए एक अविस्मरणीय अनुभव था। इस दौरान, अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पूर्वाचल श्री कैलाश काबरा भी उनके साथ थे।

विराटनगर में, चांडक जी ने माहेश्वरी समाज के बंधुओं से मुलाकात की और उनके सामाजिक, धार्मिक, आर्थिक और राजनीतिक परिदृश्य को देखा। उन्होंने रक्तदान, चिकित्सीय सेवा और गो सेवा में समाज के योगदान की प्रशंसा की।

चांडक जी ने विशेष रूप से युवा साथियों के प्रति आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके जन्मदिन के अवसर पर एक यादगार कार्यक्रम आयोजित किया। इनमें भाई बीबेक राठी, भास्कर सोनी, अजय राठी, सतीश बागड़ी और तुषार ईनाणी सहित सभी साथियों का विशेष योगदान था। उन्होंने पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष रमेश तापडिय़ा के प्रति भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने उनके जन्मदिन को एक भावुक क्षण बना दिया।

चांडक जी ने कहा कि यह अनुभव उनके लिए एक अमिट छाप छोड़ गया है और उन्हें आगे भी समाज सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

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