युवाक्षी बिन्नानी, बीकानेर ने कूंची से लिखी कहानी
बीकानेर की आठ वर्षीय युवाक्षी बिन्नानी ने वो कर दिखाया है, जो बड़े-बड़े कलाकारों का सपना होता है। राज्य की प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका कला समीक्षा ने युगाक्षी के बनाए चित्र को अपने मई 2025 अंक के कवर पेज पर स्थान देकर उसकी प्रतिभा को देशभर में पहचान दी है।
युवाक्षी, जो वर्तमान में बीकानेर के युगांतर स्कूल की कक्षा 4 की छात्रा है बचपन से ही रंगों और रेखाओं के साथ खेलती रही है। उसके चित्रों में बच्चों की मासूम कल्पनाएं, प्रकृति की सौंदर्यता और भावनाओं की गहराई देखने को मिलती है। उसके दादा गोवर्धनदास विन्नानी बताते है कि युगांक्षी को जब भी खाली समय मिलता है, वह चित्र बनाने में डूब जाती है। परिवार ने उसकी रुचि को हमेशा प्रोत्साहित किया, और आज वही प्रोत्साहन उसकी पहचान बन गया।
कला समीक्षा के संपादकीय मंडल में देश के कई प्रतिष्ठित कला शिक्षाविद शामिल है, जैसे जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय के ललित कला विभाग के प्रोफेसर, सुखाडिय़ा विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के विशेषज्ञ और देवभूमि उत्तराखंड विश्वविद्यालय के विभागाध्यक्ष। इन सभी ने युगाक्षी के चित्र को न केवल सराहा, बल्कि उसे आवरण पृष्ठ पर स्थान देकर उसकी कला को राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता दी है। यह पहली बार है जब बीकानेर की किसी बालिका की कलाकृति को किसी राष्ट्रीय कला पत्रिका के कवर पर प्रकाशित किया गया है। यह न सिर्फ युवाक्षी के लिए, बल्कि पूरे बीकानेर के लिए गर्व की बात है। युवाक्षी की यह उपलब्धि यह साबित करती हैं कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती। कला के क्षेत्र में यह उसकी एक छोटी सी, लेकिन सशक्त शुरुआत है। आने वाले समय में यदि उसे उचित मार्गदर्शन और मंच मिलता रहा, तो वह और भी ऊंची उड़ान भर सकती है।
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