डेगाना में तीन दिवसीय नानीबाई के मायरे का आयोजन सम्पन्न
![]() |
राकेश करवा, डेगाना | Mon, 26-May-2025 | ![]() |
|---|
डेगाना शहर में दिनाक 23 मई से 25 मई तक स्व. श्री भंवरलाल करवा परिवार एवं बहन बेटियों के द्वारा तीन दिवसीय नानी बाई के मायरा का आयोजन का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम के दौरान सर्वप्रथम शहर के गायत्री मंदिर से विशाल शोभा यात्रा का आयोजन किया गया। शोभा यात्रा में कथा वाचक संत श्री अमृतराम महाराज को बग्गी में बैठाकर भव्य स्वागत करते हुए नगर भ्रमण करवाया। शोभा यात्रा में करवा परिवार के सोहनलाल करवा, प्रकाश करवा, रामदेव करवा, रमेश करवा, प्रदीप करवा व परिवार की बहन बेटियों ने शिरकत कर शोभायात्रा का शुभारंभ किया। शोभा यात्रा गाजे बाजे के साथ शहर के श्री राम चोराया, मिडिल स्कूल, सदर बाजार होते हुए कथा स्थल माहेश्वरी भवन पहुंची। शोभा यात्रा में रथ में सवार कथा वाचक संत श्री अमृतराम महाराज का शहर वासियों ने जगह जगह पुष्प वर्षा कर स्वागत किया। शहर में जगह जगह भक्तो के लिए शीतल पेय की व्यस्था की गई। उसके बाद दोपहर 2 बजे से कथा स्थल पर नानी बाई के मायरे कथा वाचक संत श्री अमृतराम महाराज ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना करने के बाद कथावाचक व्यासपीठ पर विराजमान हुए और भजन से कथा की शुरुआत की। इस दौरान पूरा माहौल भक्तिमय नजर आया। संत श्री अमृतराम महाराज ने नानी बाई के मायरे की कथा की शुरुआत नरसी मेहता के जन्म से की। इसके बाद उन्होंने नरसी मेहता के बारे में विस्तार से श्रोताओं को जानकारी दी। संत श्री अमृतराम महाराज ने कहा कि नरसी जी का जन्म एक बेहद साधारण परिवार में हुआ था उन्होंने कहा कि जब भी किसी कथा कीर्तन का आयोजन होता है तो इसमें बड़े बुजुर्ग ही आते हैं। उन्होंने अपील की अपने बच्चों को बचपन से कीर्तन और भक्ति का ज्ञान सिखाना चाहिए। बच्चों को संस्कार देने की उम्र बचपन में होती है। माता-पिता का दिया हुआ ज्ञान उसका जीवन साकार करता है। उसी दिन रात्रि 8 बजे से महाराज जी के सानिध्य में विशाल भजन संध्या का आयोजन हुआ। महाराज जी एक से एक बढ़कर भजनों की प्रस्तुति दी। जिसमे भजन संध्या का अमृतराम महाराज ने गजानंद महाराज को मनाकर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। संत अमृतराम महाराज प्रवचन के साथ साथ एक से एक बढ़कर भजनों की प्रस्तुति दी। जिसमे गिरधर आवो तो सरी...........देना हो तो दीजिए जन्म जन्म का साथ........... दास ही थारो ही थारो भजन गाकर भक्तो को नाचने पर मजबूर कर दिया। महिलाओ पुरषों ने भजनों पर जमकर नृत्य किया। भक्तो की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। मायरे के दूसरे दिन सूरसागर रामद्वारा जोधपुर के संत श्री अमृतराम महाराज ने कहा कि भगवान के भरोसे पर नरसिंह मेहता ने मांगकर टूटी फूटी गाड़ी लेकर संतो के संग मायरा भरने निकल गए। भक्त की गाड़ी सुधारने के लिए द्वारकानाथ किशना खाती बनके प्रकट हुए। और सब को नगर अंदाज पहुंचाया। संत श्री ने कहा कि हम अगर अपने जीवन की डोर भी भगवान को सौंप दे तो ये जीवन यात्रा आनंदमयी बन जाती है। महाराज जी ने कथा के बीच में भजन गाकर भक्तो को नाचने पर मजबूर कर दिया। कथा में महिलाओ व पुरुषो की भीड़ उमड़ पड़ी। इस अवसर गीता बाल के बालक व बालिकाओं ने गीता पाठ का उच्चारण किया। महाराज जी ने कहा की छोटे छोटे बच्चो को इस तरह से गीता पाठ का करते देख के सभी को भी कुछ सीख लेना चाहिए। रात्रि 8 बजे से भक्त चरित्र का आयोजन हुआ। महाराज ने करमा बाई के जीवन के बारे में बताया। इस अवसर पर करमा बाई के भजनों की प्रस्तुति दी। जिसमे थाली भर कर लाई रे खिचड़ो.........भजन सुनाया तो भक्तो को नाचने पर मजबूर कर दिया। कथा के तीसरे दिन महाराज जी ने कहा की नानी बाई की सावरिया के प्रति विरह वथा का वर्णन करते हुए कहा की भगवान को अपने भक्तो से मर्यादा में प्रीति भरा संबंध बहुत अच्छा लगता है। केवल नानी बाई ने ही भगवान को भय नहीं माना। बल्कि भगवान ने ही नानी बाई को बहन मानकर छपन 56 करोड़ का मायरा भरा। हम भी अगर भगवान से अपनापन या कोई भी रिश्ता रखते है। तो भगवान हमारे लिए भी प्रकट हो सकते है। पर उसके लिए नरसी मेहता जैसा भरोसा और इंतजार चाहिए। नानी बाई के मायरे के समापन के भक्तो ने फूलो की होली खेली। सभी एक दूसरे पर पुष्प वर्षा कर होली खेली। महाराज जी एक से एक बढ़कर भजनों की प्रस्तुति दी। जिसमे मीठे रस से भरोड़ी राधा रानी लागे...... बरसाने वाले की जय राधा रानी की जय......आज ब्रज में होली रे रसिया भजन गाकर भक्तो पर फूलो की बारिश की गई। अंत में आरती कर भक्तो को प्रसाद वितरण किया गया।
Latest News

