अपना दिया खुद जलाना होगा
इस देश ने एक ऐसी संपदा भी जानी है जिनके सामने और सब संपदा फीकी पड़ जाती है, इस देश को ऐसे हीरों का पता है जिनके सामने वास्तविक हीरे कंकड़ पत्थर हैँ। इस देश ने ध्यान का धन जाना और जिसने ध्यान जान लिया उसके लिए फिर और कोई धन प्रासंगिक नहीं रह जाता। इस देश ने समाधि जानी और जिसने समाधि जानी वह सम्राटों का भी सम्राट हुआ, उसे आत्मा का अनूठा साम्राज्य मिला। यह उद्गार ओशो सन्यासी श्री सत्येंद्र जोहरी ने ओशो की प्रवचन-श्रृंखला 'एस धम्मो सनन्तनो' के नवप्रकाशन के लोकार्पण अवसर पर कहे। यह लोकार्पण उन्हीं के निवास 'शून्यम' जोधपुर पर रविवार 2 मार्च 2025 सांय: 5 बजे अनेक गणमान्य, प्रबुध्द जनों की उपस्थिति में हुआ। श्री जोहरी एवं उनकी पत्नी निशाजी ने इन पुस्तकों के पांच सौ सेट प्रकाशित कर प्रायोजित करवाए हैं। हर सेट में बारह पुस्तकें हैं।
इस अवसर पर वरिष्ठ कथाकार हरिप्रकाश राठी ने कहा कि भगवान बुद्ध ने जगत में पसरे दु:ख के मूल कारणों का गहन अध्ययन कर कुछ ऐसे अद्भुत सूत्र बताए जो दु:ख से पार तो ले जाते ही हैं, आत्मोत्सर्ग की दुर्लभ यात्रा भी करवाते हैं। आत्मतत्व वह दीपक है जो इस दु:ख रूपी अंधकार को जड़ से दूर करता है। बुद्ध कहते हैं लेकिन इस तत्व का अनुसंधान लेकिन स्वयं जातक को करना होगा, तृष्णा से तृप्ति की यात्रा करनी होगी, स्वयं को तपाना होगा, स्वयं को दीप बनकर जलना होगा।
बुद्ध के ये सूत्र 'एस धम्मो सनन्तनो' में बद्ध हैं। ओशो (आचार्य रजनीश) ने 22 नवंबर 1975 से 10 दिसंबर 1977 के मध्य इन धम्मसूत्रों पर 122 प्रवचन दिए जो उपरोक्त पुस्तकों में बद्ध हैं।
इस अवसर पर श्रीमती निशा जोहरी ने कहा कि ओशो से हमें जीवन जीने की कला एवं अध्यात्म की विरल दृष्टि मिली है। हम यह पुस्तक उन्हीं सद्गुरु ओशो के चरणों में हृदय के असीम अनुराग एवं कृतज्ञता के साथ समर्पित कर रहे हैं। हमारा उद्देश्य उस महनीय ज्ञान का प्रसार है जो अंधेरे से उजाले की ओर ले जाता है। लोकार्पण पश्चात जोहरी दम्पति ने कालजयी सूत्रों के प्रायोगिक तरीके भी बताए।
समारोह में गिरिशजी मेहता, विमला जी, सुधीरजी, नीलम मूंदड़ा, डॉ. सुशीला राठी, संध्या भाटी, तूलिका, सोनल नाहटा सहित अनेक चिंतक उपस्थित थे। धन्यवाद बालकृष्ण करनानी ने दिया।
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