श्री महेश सेवा समिति, खामगांव द्वारा 'शेष जिंदगी विशेष जिंदगी' कार्यशाला आयोजित

श्री महेश सेवा समिति, खामगांव द्वारा समाज के वरिष्ठ जनो हेतू आयोजित 'शेष जिंदगी विशेष जिंदगी' कार्यशाला दिनांक 21-22 दिसम्बर को सफलतापुर्वक संपन्न हुआ। समिति द्वारा यह चतुर्थ आयोजन था। समिति द्वारा 230 वरिष्ठ जनो की नि:शुल्क रक्त जाच की गयी जिसमे औरंगाबाद के सुप्रसिद्ध हृदयरोग तज्ञ डॉ. कौस्तुभ सोडाणी द्वारा विशेष सहयोग मिला। डॉ. सोडानी द्वारा सभी रिपोर्टस् चेक करके उसमे अपने रिमार्कस् दिये गये। शिविर के उदघाटन सत्र मे ओंकारेश्वर के स्वामी ब्रह्मचारी प.पू. श्री. मोहन चैतन्यजी का आध्यात्म पर आर्शीवचनीय प्रबोधन हुआ। साथ ही प्रथम सत्र में पूना के लायन द्वारका जालान का 'चलती रहे जिंदगी' पर कहा कि जीवन के किसी भी चढाव उतार से ना कतराते हुए ये सोचना कि 'मैच अभी शुरु है'। नांदेड के सायकाट्रीट डॉ. नंदु मुलमुले द्वारा बढती उम्र में अपनी मानसिकता को कैसे नियंत्रण में रखना उस पर सुंदर तरीके से मार्गदर्शन हुआ। खामगांव के सुप्रसिद्ध नेज्ञतज्ञ डॉ. आनंद झुनझुनवाला द्वारा उर्वरीत जीवन आनंदमय बिताने हेतू आनंद मंत्र दिया। शाम 7 से 10 बजे तक अकोला के संगीतवाला टीम के श्री सुनील नावंदर द्वारा सभी का भजन, फिल्मी गीत द्वारा मनोरंजन किया गया। 22 दिसम्बर को सुबह दिल्ली के हास्ययोग गुरु हरीष रावत द्वारा सभी को एक घंटे तक खुब हसाया और अपने स्वास्थ्य मे हास्ययोग का महत्व बताया। डॉ. कौस्तुभ सोडानी एवं डॉ. सौ. सुधा सोडाणी द्वारा बढती उम्र मे अपने स्वास्थ्य का ध्यान कैसे रखना विविध बीमारियो से कैसे खुद का बचाव करना बताया। डॉ. सौ. सुधा ने विविध व्यायाम के प्रकार बताकर गिरने से कैसे बचे इस पर मुल्यवान मार्गदर्शन किया। अकोला के श्री महेश मूंदडुा ने कहा की वरिष्ठजन हनुमानजी की तरह है सिर्फ उन्हे याद दिलाना है की उनमे कितनी अनुभवरुपी शक्तिया है। मुंबई के श्री जयप्रकाश काबरा ने अपने इस उम्र मे पारिवारिक रिश्ते कैसे रखना इस पर सुंदर मार्गदर्शन किया। सभी वरीष्ठ जनो ने इस द्विदिवसीय शिविर का पूर्णकाल उपस्थित रहकर शिविर का आनंद लिया और समिति के इस उपक्रम के लिये आभार व्यक्त किया। सभी वक्ताओ ने भी समिति के इस वरिष्ठ जनो हेतू लिये जा रहे कार्यशाला को अखिल भारत में एक अनुठा उपक्रम बताकर अपनी भावनाए व्यक्त की। इस दो दिवसीय शिविर को सफल बनाने हेतू समिति अध्यक्ष किशोर चांडक, सचिव निलेश भैय्या, प्रकल्प प्रमुख डॉ. विजय टावरी, जगदीश नावंदर, प्रमोद मोहता, जितेंद्र झंवर, नवलकिशोर लोहिया, विजय चांडक, सी.ए. रतन राठी, कृष्णकांत भट्टड, सतीष भट्टड एवं माहेश्वरी मंडल की सभी इकाइयों का विशेष सहयोग रहा।

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