महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र यह नव निधि एवं अष्ट सिद्धि का अद्वितीय संगम — रा.अध्यक्ष श्रीमती मंजू बांगड़
अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन के अंतर्गत संस्कार सिद्धा बाल एवं किशोरी विकास समिति द्वारा नवरात्रि में 4, 5 और 6 अक्टूबर को तीन दिवसीय महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र प्रशिक्षण का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ प्रथम दिवस महेश वंदना और दुर्गा स्तुति से हुआ। इसके पश्चात समिति की राष्ट्रीय प्रदर्शक श्रीमती अनुसया मालू ने स्वागत उद्बोधन में कहा कि नारी स्वभावत: शांति का प्रतीक है, लेकिन आवश्यकता पडऩे पर वह महिषासुरमर्दिनी दुर्गा की तरह शक्ति का स्वरूप भी धारण करती है।
मुख्य अतिथि राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती मंजू बांगड़ ने समिति द्वारा आयोजित इस कार्यशाला की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मां दुर्गा के नौ रूपों में अष्ट भुजाओं का आशीर्वाद — बल, बुद्धि, ऐश्वर्य, सुख, स्वास्थ्य, शांति, यश, निर्भीकता और संपन्नता सभी को प्राप्त हो। महिषासुरमर्दिनी स्तोत्र के पठन से न केवल हमारी संस्कृति का संवर्धन होता है, बल्कि यह नव निधि और अष्ट सिद्धि का अद्वितीय संगम भी हैं।
प्रशिक्षण का मार्गदर्शन गीता परिवार की वरिष्ठ मार्गदर्शिका एवं संस्कृत पारंगत आदरणीय सुवर्णा मालपाणी ने किया। उन्होंने न केवल स्तोत्र का पठन कराया, बल्कि संस्कृत में अनुस्वार, विसर्ग और व्याकरण की बारीकियों का भी विस्तार से परिचय दिया ताकि सभी प्रतिभागी शुद्ध रूप से स्तोत्र का पाठ और गायन कर सकें। कार्यक्रम की संपूर्ण रूपरेखा समिति की राष्ट्रीय प्रभारी श्रीमती अंजलि तापडिय़ा ने तैयार की।
द्वितीय दिवस की मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती ज्योति राठी ने शारदीय नवरात्रि के महत्व पर प्रकाश डाला और कहा कि यह पर्व शक्ति और भक्ति का संगम है। आध्यात्मिकता के साथ संस्कारों का होना भी आवश्यक है। संस्कार सिद्धा समिति का कार्य उसके नाम के अनुरूप है 'यथा नाम तथा काम।'
समापन दिवस पर राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष श्रीमती किरण लड्ढा ने संस्कृत भाषा की महत्ता पर बल देते हुए कहा कि जब हम कोई स्तोत्र सीखकर उसका पाठ करते हैं, तो यह एक अनोखी आत्मिक अनुभूति प्रदान करता है। बचपन में बच्चों को यदी पठन सिखाया तो वे तुरन्त आत्मसात करते है।
तीनों दिनों में लगभग 2400 प्रशिक्षणार्थियों ने जूम लिंक, फेसबुक, और यूट्यूब के माध्यम से इस प्रशिक्षण का लाभ उठाया। कार्यक्रम के तकनीकी प्रबंधन का कार्य राष्ट्रीय संचार समिति की श्रीमती भाग्यश्री चांडक, सहप्रभारी श्रीमती सपना लाहोटी (दक्षिणांचल) और श्रीमती मनीषा सोमाणी (पूर्वांचल) ने संभाला। महेश वंदना और मां दुर्गा के मनमोहक वीडियो क्रमश: श्रीमती चंचल राठी और तान्या चितलांगिया द्वारा बनाए गए।
आंचलिक सह-प्रभारी चंचल राठी (पूर्वांचल), ज्योति बाहेती (मध्यांचल), हंसा चितलांगिया, आभा बेली (पश्चिमांचल), सुमन जाजू (उत्तरांचल), और अनुराधा मालपाणी (दक्षिणांचल) सभी ने सुत्रबद्ध संचालन कर कार्यक्रम को सफल बनाया ।
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