परिवार परिवेदना निवारण समिति जोधपुर की बैठक आयोजित

समाज में बढ़ते तलाक एवं निरन्तर टूटते रिश्तों को बचाने के लिए यह नितांत आवश्यक है कि हम युवा पीढ़ी से विवाह पूर्व संवाद करें। प्रिवेंशन इस बेटर देन क्योर। उन्हें यह बताएँ कि अधिसंख्य रिश्ते टूटने के कगार पर आते हैं पर यह उन दम्पतियों अथवा परिवार वालों की दूरदर्शिता होती है कि वे परिपक्वता से इस टूटन से उबर जाते हैं। हम नयी पीढ़ी को इन समय सिद्ध तरीकों से अवगत करवाएं। यह बात समाजसेवी रामानन्द काबरा ने दिनांक 23/९/2024 सांय: 5 बजे हुई परिवार परिवेदना निवारण समिति जोधपुर की बैठक में कही। समिति संयोजक साहित्यकार श्री हरिप्रकाश राठी ने शायर वशीर बद्र के हवाले से कहा कि, जो कहा नहीं वो सुना करो। संवाद का पूरा होना जरूरी है। श्रीमती स्वाति जैसलमेरिया ने कहा कि अधूरा संवाद अनेक बार कयामत ढा देता है। श्रीमती आशा फोफलिया ने इस हेतु युवा पीढ़ी को विशेषज्ञ वक्ताओं के उद्बोधन सुनने अथवा उनसे परामर्श लेने की अनुशंसा की। मनोविद डॉ सुशीला राठी ने रिश्तों को समयानुकूल संभालने की बात की। उन्होंने कहा समय निकल जाने पर बैर एवं हठ दृढ़ बन जाते हैं। सभा में एडवोकेट नन्दकिशोर चाण्डक, महेंद्र मालपानी, विमल गट्टानी एवं मधु समदानी भी उपस्थित थीं।

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