घर में एक कोना पुस्तकों के लिए जरूर बनाएं
राजसमंद, राजस्थान में अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी द्वारा अपने गौरवशाली प्रकाशन राष्ट्रीय बाल मासिक 'बच्चों का देश' पत्रिका की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित बाल साहित्य समागम (16-18 अगस्त, 2024) के तत्वावधान में बाल साहित्य का पठन-पाठन - समाज और परिवार का दायित्व' विषयांतर्गत पंचम सत्र की अध्यक्षीय वक्तव्य में उन बिंदुओं को रेखांकित किया जिन पर अभी काम करना बाकी है। घर के कोने में एक पुस्तक का ना होना बाल परिवेश में आयी त्रासदी का कारण है। स्वाध्याय के लिए लाइब्रेरी का होना और उसको और पत्र पत्रिकाओं के लिए बजट रखना भी उतना ही आवश्यक है जिस तरह से इंटरनेट डाटा का लेना, तभी संस्कारों का निर्माण होगा। सद् साहित्य की पुस्तकें संस्कार देती है और सही मार्ग बताती हैं। इस अवसर पर अणुव्रत विश्व भारती समिति के अध्यक्ष अविनाश नाहर, बच्चों के देश पत्रिका के संपादक संचय जैन और सह संपादक प्रकाश तातेड़ तथा बाल सम्बल के संस्थापक पंचशील जैन द्वारा डॉ. विमला भंडारी को बाल साहित्य समागम का सम्मान पत्र भी दिया गया। कांकरोली के राजकीय उच्च बालिका विद्यालय की पुस्तकालय में उन्होंने अपनी कृतियों की पुस्तक उपहार में दी, बालिकाओं को पृथ्वी ने मांगी चप्पल नामक कहानी सुनायी। इस कहानी से उपस्थित छात्राओं ने भूगोल और पर्यावरण को समझा। 11वीं और 12वीं की लगभग 400 छात्राएं लाभान्वित हुई। विद्यालय की वाइस प्रिंसिपल ने डॉ. विमला भंडारी के इस योगदान के लिए आभार जताया।
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