अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन द्वारा PST ट्रेनिंग प्रोग्राम गुरुकुल आयोजित
अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन के अंतर्गत अष्टसिद्धा व्यक्तित्व विकास व नेतृत्व प्रशिक्षण समिति द्वारा 5 सितंबर, 2023 शिक्षक दिवस के शुभ अवसर पर PST ट्रेनिंग प्रोग्राम 'गुरुकुल' जूम प्रांगण पर आयोजित किया गया।
आराध्य देव भगवान महेश की वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। राष्ट्रीय महामंत्री ज्योति राठी द्वारा कार्यक्रम की सफलता हेतू शुभकामनाएं प्रेषित की गई। राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजू बांगड़ द्वारा स्वागत उद्बोधन दिया गया।
गुरुकुल में पधारे सभी वक्तागण का स्वागत करते हुए कहा कि शिक्षक दिवस के सुअवसर पर राष्ट्र द्वारा विशेष रूप से आज का यह प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया है क्योंकि शिक्षक वह प्रकाश पुंज है जो हमें लक्ष्यो को प्राप्त करने के लिए सही दिशा में आगे बढऩे का रास्ता दिखाता है और हमारी अष्ट सिद्धा समिति द्वारा गुरुकुल में इसी भावना को चरितार्थ करने की संयोजना है जिसके लिए संपूर्ण टीम को हार्दिक बधाई। संगठन की बहनों एवं नेतृत्वकर्ताओं के लिए भी सीख देते हुए कहा। हमारी वाणी हमारा व्यवहार और हमारे विचार यह सब हमारे अपने ही उत्पाद हैं इसलिए इनकी गुणवत्ता जितनी ऊंची होगी उतना ही अधिक मान सम्मान मिलेगा क्योंकि संबंधों की मधुरता के लिए संबोधन की मधुरता आवश्यक है।
कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी समिति प्रभारी नम्रता बियाणी द्वारा दी गई। गुरुकुल में प्रमुख वक्ता के रूप में निवर्तमान राष्ट्रीय अध्यक्ष आशा माहेश्वरी ने अध्यक्ष की भूमिका एवं जिम्मेदारी पर प्रकाश डाला। अध्यक्ष द्वारा एक अच्छी शुरुआत ही आगे की सफलता का मार्ग प्रशस्त करती है। अध्यक्ष संगठन के हर सदस्य को साथ लेकर चलने वाला, आलोचना को भी धैर्य पूर्वक सुनने वाला, संगठन की सफलता का श्रेय सभी को बांटने वाला और विफलता को अपने माथे पर लेने वाला होना चाहिए। उसमें अपने सदस्यों के साथ मिलकर, किसी भी सभा की योजनाबद्ध तरीके से शुरुआत करके, अपने लक्ष्य तक पहुंचाने की काबिलियत होनी चाहिए।
राष्ट्रीय प्रकल्प विधान समिति की प्रभारी मंगल मर्दा द्वारा कार्य समिति की भूमिका एवं जिम्मेदारी जैसे गूढ़ विषय पर बहुत ही सरलता से प्रकाश डाला गया। कार्य समिति प्रदेश और राष्ट्र के बीच की बहुत ही महत्वपूर्ण एवं मजबूत कड़ी का काम करते हैं। ज्यादातर निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष को ही कार्य समिति सदस्य के रूप में चयनित किया जाता है, ताकि तीन वर्षों में अध्यक्ष के रूप में उनके द्वारा संजोई गई अनुभव की पूँजी से वह संगठन को सींच सके। उनके मुख्य दायित्व हैं कि वे प्रदेश अध्यक्ष व सचिव के साथ मिलकर प्रबंधकीय, सामाजिक एवं आर्थिक कर्तव्यों को निष्ठा पूर्ण ढंग से संपन्न करें। प्रदेश के सदस्यों को प्रोत्साहन व संरक्षण दें। संगठन में एक सौहार्दपूर्ण वातावरण का निर्माण करें, साथ ही अनुशासनात्मक दायित्व को भी निभा सकें।
अष्टसिद्धा समिति प्रदर्शक मधु बाहेती द्वारा संगठन में प्रोटोकॉल जैसे जटिल और पेचीदा विषय को बहुत ही सरलता से समझाया गया। किसी भी संगठन को सुचारू पूर्ण एवं सुव्यवस्थित तरीके से चलाने के लिए, बनाए गए शिष्टाचार एवं नियमों के समूह से को ही प्रोटोकॉल कहते हैं। स्थानीय, जिला, प्रादेशिक एवं केंद्रीय संगठनों में प्रोटोकॉल का पालन करना अत्यंत आवश्यक है। प्रोटोकॉल के प्रमुख घटक हैं समारोह, सभा या बैठक की पूर्व तैयारी, एजेंडा एवं डायस प्रोटोकॉल, बैठक व्यवस्था।
समिति प्रभारी नम्रता बियाणी द्वारा रिपोर्टिंग जैसे अति आवश्यक विषय पर प्रकाश डाला गया। रिपोर्टिंग संगठन द्वारा किए गए कार्यो की पहचान व प्रचार का काम करती है। रिपोर्ट क्या है, क्यों जरूरी है, कैसे बनाई जाए, कब बनाई जाए, कहां प्रेषित की जाए और इसे बनाने में कौन-कौन सी बातें महत्वपूर्ण हैं, इन सब के बारे में विस्तार से पीपीटी और वीडियो के माध्यम से समझाया गया। इससे सभी प्रदेशों को अपने-अपने कार्यों के उचित मूल्यांकन हेतु मार्गदर्शन मिलेगा।
सभी वक्ताओं के उद्बोधन के पश्चात प्रश्नोत्तरी सेशन रखा गया। ऑडियंस के प्रश्नों का आदरणीय लता लाहोटी, गीता मूंदड़ा, आशा माहेश्वरी, मंजू बांगड़, ज्योति राठी, मंगल मर्दा, मधु बाहेती एवं नम्रता बियानी द्वारा उचित समाधान किया गया।
समिति की उत्तरांचल सह प्रभारी डॉ. उर्वशी साबू द्वारा बहुत ही शानदार एवं कुशल मंच संचालन किया गया। सभी वक्ताओं के वक्तव्य के मध्य आंचलिक सह प्रभारी शोभा भूतड़ा, माधुरी मोदी, अनुजा काबरा एवं रितु मूंदड़ा द्वारा बहुत ही रोचक एवं ज्ञानवर्धक एक्टिविटीज भी करवाई गईं। संगठन मंत्री ममता मोदानी द्वारा आभार प्रकट किया गया और अंत में राष्ट्रगान के पश्चात इस ज्ञान की पाठशाला को विराम दिया गया। सभी प्रदेश अध्यक्ष एवं उनकी टीम के कुल मिलाकर 370 बहने जुड़ी थीं।
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