ज्ञानमंदिर किशनगढ़ के संस्थापक श्री कृष्णचन्द्र टवाणी द्वारा रचित पुस्तक अध्यात्म और आरोग्य का विमोचन

श्री निम्बार्क पीठ काचरिया मंदिर प्रांगण में काचरिया पीठाधीश्वर जयकृष्ण देवाचार्य के कर कमलों द्वारा ज्ञानमंदिर किशनगढ़ के संस्थापक श्री कृष्णचन्द्र टवाणी द्वारा रचित पुस्तक अध्यात्म और आरोग्य का विमोचन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अशोक शर्मा द्वारा मंगलाचरण कर किया गया। श्री कृष्णचन्द्र टवाणी, घनश्याम अग्रवाल, रामकिशोर बाहेती, कंचन मणि भट्टड़, किशनगोपाल मालपानी ने काचरिया पीठाधीश्वर जय कृष्ण देवाचार्य का मालार्पण कर अभिनंदन किया। शास्त्री श्री बालमुकुंद सेवदा ने पुस्तक का परिचय प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारतीय साहित्य में वेद, वेदांग, उपनिषद स्मृति ग्रंथ आदि का भंडार है। आरोग्य के लिए शास्त्रों में तीन सूत्र बताए गए हैं हित, भुक्, मितभुक्, ऋत भुक् अर्थात शरीर के लिए हितकारी सात्विक भोजन करें, भुख से कम भोजन करें, ऋतु के अनुसार भोजन करें। समुचित आहार-विहार प्रतिदिन योग प्राणायाम ही स्वास्थ्य की कुंजी है। कृष्णचन्द्र टवाणी ने बताया कि मैंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कर्म योग एवं आध्यात्मिक आचार-विचार से प्रभावित होकर यह पुस्तक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को समर्पित की है तथा पुस्तके के माध्यम से यह संदेश देना चाहता हूँ कि अध्यात्म और आरोग्य का समन्वय जीवन में आवश्यक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी में अपने व्यस्ततम जीवन में निरंतर 18 घंटे पूर्ण ऊर्जा और उत्साह के साथ कार्य करने की क्षमता साथ ही आध्यात्मिक चिंतन द्वारा तनाव रहित जीवन शैली एवं सहजता से समस्याओं का समाधान एवं आत्म बल एवं आत्मविश्वास से ओतप्रोत व्यक्तित्व एवं कृतित्व से हम सभी को प्रेरणा लेनी चाहिए।
इस अवसर पर जयकृष्ण देवाचार्य ने अपने आशीर्वचन में कहा कि शरीर को स्वस्थ रखने के लिए हमारी प्राचीन भारतीय चिकित्सा पद्धति आयुर्वेद में योग एवं प्राणायाम द्वारा आरोग्य के साथ अध्यात्म का समन्वय किया गया है। क्षण प्रतिक्षण होने को ही शरीर कहते हैं। शरीर का संरक्षण करने वाला आयुर्वेद है शरीर में तेरह प्रकार की अग्नि है जठ में वैश्वानर अग्नि रहती है जो पाचन का कार्य करती है सुपाचन से ओज की प्राप्ति होती है और ओज का परिभ्रमण ही जीवन है। उत्तम स्वास्थ्य की प्राप्ति के लिए गौ दुग्ध, गौ घृत का सेवन करना चाहिए गाय के दूध और घी में स्वर्ण अंश होता है उन्होंने कहा कि इंद्रियों की संतुष्टि विषयों द्वारा होती है और आत्मा की संतुष्टि अध्यात्म द्वारा होती है। अतएव आत्मिक आनंद के लिए अध्यात्म की ओर प्रवृत होना चाहिए। इस अवसर पर सेवानिवृत्ति जिला शिक्षा अधिकारी दमयंती परमार, भजन गायक विष्णु सोमानी, रोशन भारत पत्र के संपादक विकास छाबड़ा, सत्यनारायण गोयल, गोविन्द पाटोदिया, जी.एल. सामरा साहित्यकार, डॉ. नीलम शर्मा सहित गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। अशोक शर्मा ने महानुभावों को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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