परिवार परिवेदना निवारण समिति, जोधपुर की बैठक सम्पन्न

हर युग एक नये परिवर्तन का आगाज़ करता है। मनुष्य, समाज तदनुसार समायोजन भी करता है। इन दिनों लेकिन नयी उच्च शिक्षित पीढ़ी जिन्हें मोटी पगार मिल रही है अथवा फिर धनी परिवारों के विवाहित युवक-युवतियों में पारिवारिक विसंगतियाँ निरन्तर बढ़ रही हैं। ये बच्चे न तो समाज के किसी प्रतिनिधि की परवाह करते हैं न ही किसी तरह के परामर्श की ओर जाना चाहते हैं। इतना ही नहीं इसी के चलते विवाह के 6-12 माह के अल्प समय में तलाक के आवेदन दिए जा रहे हैं। देश भर में हमारे समाज मे ऐसे करीब 50 प्रकरण हैं जहां फकत एक वर्ष में तलाक की नोबत आ गई है। रविवार दिनांक 19 मई 2024 ख्यात समाजसेवी सीए योगेश बिड़ला के जोधपुर निवास पर हुई परिवार परिवेदना निवारण समिति की बैठक में इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई कि इन दिनों सामाजिक आंख का असर  कम क्यों हो रहा है? संयोजक हरिप्रकाश राठी ने इसके लिए इन समितियों में अधिकाधिक युवकों को सम्मिलित करने का आव्हान किया जिससे नयी पीढ़ी का मत जान सके। स्वाति जैसलमेरिया ने घरों में प्रेम एवं अनुशासन के सम्यक सामंजस्य की वकालात की। सभा में महेंद्र मालपानी, डॉ भरत माहेश्वरी, श्री विमल बूब ने भी अपने विचार रखे। मनोविद डॉ. सुशीला राठी ने कहा अब बच्चों के अभिभावक नहीं मित्र बनकर रहना होगा ताकि बच्चे मन की गिरह खोल सके। एडवोकेट नन्दकिशोर चण्डक ने कहा अहंकार एवं बढ़ती हठधर्मिता के चलते कोर्ट में अनुदिन ऐसे केसेज बढ़ रहे हैं। डॉ. सूरज माहेश्वरी ने इस हेतु महासभा स्तर पर व्यापक योजना बनाने की अनुशंसा की। उन्होंने कहा परिवार व्यक्ति एवं समाज दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण इकाई है पर आज आपसी भरोसा टूट रहा है। 
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