कोलकाता गणगौर महोत्सव में हँसपुकुर गवरजा माता मंडली ने मचाई धूम
कोलकाता गणगौर महोत्सव में हँसपुकुर गवरजा माता मंडली ने मचाई धूम
बड़ाबाजार कोलकाता के गणगौर मेले में अहम भूमिका निभाने वाली प्रमुख नौ गणगौर मंडलियों में से एक श्री श्री गवरजा माता हंसपुकुर मंडली ने इस वर्ष अपनी स्थापना के 70 वर्ष पूरे कर लिए। गौरवशाली यात्रा के निर्बाध जारी रहने का उत्साह इस बार के आयोजन में भी चरम पर दिखा। नव रूपों में ले अवतार आज आई है माँ गणगौर... और द्वितीय रचना के बोल - पूजण रौ दिन आयौ सुरंगों चोखो! लागै जी म्हौनै योई तींवार अनोखो!!... मायड़ भाषा में रचित दोनों गीतों को मंडली के सभापति नरेन्द्र कुमार बागड़ी 'एकलव्यÓ ने जितने सुंदर भावों के साथ लिखा उतने दुगुने उत्साह के साथ मंडली के सदस्यों ने इसे प्रस्तुत किया। उद्घाटन कार्यक्रम से लेकर दो दिवसीय शोभायात्रा मेला और तीसरे दिन नींबूतल्ला चौक में सम्मिलित गवरजा वंदना कार्यक्रम तक यह उत्साह किसी तरह से मंद नहीं पड़ा। मंडली के सभापति नरेन्द्र बागड़ी 'एकलव्य' के नेतृत्व में मंत्री बलदेव (बबलू) मोहता के सांगठनिक जिम्मेदारी और मनीष डागा के निर्देशन में संगीत मंत्री विशाल कोठारी व हेमंत मूंधड़ा के सुंदर संयोजन के साथ मंडली के सभी सदस्यों का अभूतपूर्व प्रदर्शन रहा। संयोजक गण बल्लभ शंकर दवे, गिरधर दास बागड़ी, श्याम रतन मूंधड़ा, प्रकाश दम्मानी, विजय कोठारी, सभापति नरेंद्र कुमार बागड़ी, उप सभापति रामजी मालू, राजेश मूंधड़ा, उपमंत्री अनुभव बागड़ी, कोष मंत्री सुनील मोहता, हिसाब परीक्षक बलदेव मोहता (सीए), जुलूस मंत्री राज दम्मानी, प्रकाश टवानी, प्रकाशन मंत्री बालकिशन कोठारी, योगेश मोहता, सजावट मंत्री राहुल मोहता, विकास चांडक, सम्मिलित सभा प्रतिनिधि नवरतन बिन्नानी, मनीष मंत्री और पर्दे के पीछे से चाँद रतन लखानी, विनय कोठारी, प्रह्लाद मोहता व गोपाल दम्माणी ने आयोजन को सफल बनाने में अपना पूरा पूरा साथ दिया। एक गीत देव किशन कोठारी ने भी लिखा।
पुरुष सदस्यों के साथ महिला सदस्याओं ने भी गीत गायन में भूमिका निभाई। सोलो गायक के रुप में कृष्णा मीमानी की मधुर आवाज ने गीतों के भाव में शहद घोलने का काम किया। गीत गायन की प्रस्तुति में डांडिया गरबा का मोहक मिश्रण काफी एनेर्जेटिक और उपस्थित हर एक व्यक्ति में उत्साह पैदा करने वाला था। युवा पीढ़ी को गणगौर उत्सव से जोडऩे के लिए पहली बार ऐसा किया गया। सभापति नरेंद्र बागड़ी के अनुसार मंडली की ओर से किया गया यह प्रथम प्रयास काफी कामयाब रहा। हम आगे भी इसे अमल में लाना चाहेंगे। श्री बागड़ी के अनुसार मंडली की स्थापना आज से 70 वर्ष पूर्व संस्थापक श्री गोपाल जी आचार्य (धूडिय़ा मारज़ा), स्व. छगनलाल मोहता व स्व. राधा किशन बाहेती, स्व. रूखमणी देवी मालू ने की। मंडली के प्रथम गीतकार मास्टर कुमार सलेमपुरी रहे। अन्य प्रमुख गीतकारों में चम्पा लाल मोहता 'अनोखा', विट्ठल शंकर दवे 'गुरू' का योगदान रहा। 2004 में मंडली ने अपना स्वर्ण जयंती उत्सव मनाया। इस दौरान पहली बार हंसपुकुर के बाहर उद्घाटन कार्यक्रम आयोजित किये जाने के बाद इस वर्ष का उद्घाटन कार्यक्रम भी आयोजन परिसर के बाहर डागा धर्मशाला में आयोजित किया गया। अब हर साल वहीं आयोजित किए जाने का निश्चय किया गया है।
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