सिद्धि सृजन - किशोरियों के सर्वांगीण विकास की राष्ट्रीय स्तर पर एक अनूठी पहल

अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन के तत्वावधान में संस्कारसिद्धा बाल एवं किशोरी विकास समिति द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर चार दिवसीय किशोरी आवासीय शिविर सिद्धि-सृजन का सफल आयोजन 25 से 28 अक्टूबर 2025 को संगमनेर के धू्रव ग्लोबल स्कूल में किया गया। इस शिविर में आठ प्रदेशों से 225 किशोरियों ने भाग लिया, जिसमें से 25 किशोरियों का रजिस्ट्रेशन महिला सेवा ट्रस्ट द्वारा किया गया। 

शिविर में बौद्धिक, शैक्षिक, कला-कौशल्य, संस्कार, विचारों का आदान-प्रदान आदि विविध कलाओं का व 24 शानदार प्रत्यक्ष सत्र और चार ऑनलाइन सत्रों के माध्यम से किशोरियों के भीतर आत्मविश्वास, संवेदना और संस्कृति की एक नई दिशा का संचार हुआ। सिद्धि सृजन नाम अपने आप में बहुत कुछ कहता है, जहां सिद्धि का अर्थ कौशल है और सृजन का अर्थ निर्माण। यह पहल किशोरियों को बहुमुखी प्रतिभा का धनी बनाने के उद्देश्य से की गई, ताकि वे समाज में अपनी विशेष पहचान बना सकें।

शिविर का उद्घाटन गीता परिवार के संस्थापक और राम जन्मभूमि न्यास के कोषाध्यक्ष परम पूज्य स्वामी गोविंद देव गिरी जी महाराज की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर उन्होंने माहेश्वरी समाज की घटती जनसंख्या पर चिंता व्यक्त की और समाधान के सूत्र भी बताए। सुचारू पारिवारिक व्यवस्था और भारतीय संस्कारों के सिंचन से ही उत्तम जीवन यापन संभव है, इस दृष्टि से सिद्धि सृजन जैसे उपक्रमों का आयोजन संपूर्ण भारत में विभिन्न स्थानों पर होना आवश्यक है, ऐसा प्रतिपादन किया।

शिविर का उद्घाटन मंचासीन मान्यवरों द्वारा महेश पूजन और दीप प्रज्वलन से हुआ, तद्पश्चात महेश वंदना और देवी स्तुति नृत्य हुआ। मंच पर स्वामी गोविंद देव गिरी जी के साथ अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन की अध्यक्ष श्रीमती मंजु बांगड़, महामंत्री श्रीमती ज्योति राठी, मुख्य अतिथि श्रीमती ममता मोदानी शिविर स्वागत अध्यक्ष श्रीमती ललिता मालपानी, शिविर मार्गदर्शक श्रीमती गीता मूंदड़ा, डॉ संजय मालपानी, श्रीमती सोनिया तोषनीवाल, श्रीमती उर्मिला गट्टानी, श्रीमती अरुणा लढ्ढा उपस्थित थे। किशोरियों को रजिस्ट्रेशन के समय बैग पैक श्रीमती कीर्ति काबरा द्वारा दिये गए।

इस अवसर पर मंजू जी बांगड़ ने गीता परिवार द्वारा चलाए जा रहे संस्कृति संवर्धन और बाल विकास कार्यों की मुक्त कंठ से प्रशंसा की और कहा कि बालकों में संस्कृति और संस्कार की नींव रखने का महत्वपूर्ण कार्य गीता परिवार के माध्यम से हो रहा है और राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित शिविर के शुभारंभ पर आज के दिन ही गीता परिवार को 40 वर्ष पूर्ण भी हो रहे हैं ... यह सुंदर संयोग भी है जिसके लिए राष्ट्रीय महिला संगठन की ओर से बधाई स्वरूप महाराज श्री को भेंट के रूप में गीता परिवार हेतु 51,000/- सहयोग राशि प्रदान की।

मुख्य अतिथि श्रीमती ममता मोदानी ने किशोरियों को मार्गदर्शन देते हुए कहा कि किसी भी कार्यक्रम में हमें वक्तव्य देना हो तो सर्वप्रथम उसके बारे में जानकारी इक_ा करना और प्रमुख रूप से नोट्स लिखकर साथ में रखना चाहिए। मंचासीन अन्य अतिथियों ने भी अपनी शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर कार्यक्रम का प्रस्तावित शिविर मार्गदर्शक श्रीमती गीता मूंदड़ा और संचालन समिति की राष्ट्रीय प्रभारी और प्रकल्प प्रमुख श्रीमती अंजलि तापडिय़ा और प्रकल्प प्रमुख और दक्षिणांचल सहप्रभारी श्रीमती अनुराधा मालपानी ने किया। आभार ज्ञापन राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती ज्योति राठी ने किया।


तीन दिवसीय शिविर किशोरियों के लिए प्रतिदिन नई प्रेरणा से भरा रहा। प्रतिदिन सुबह 6:30 बजे जुंबा क्लास, स्विमिंग, हास्य योग, आत्मरक्षा के सूत्र से दिन की शुरुआत हुई।

प्रथम और द्वितीय दिवस में गीता परिवार के कार्य अध्यक्ष डॉ. संजय मालपानी ने विजय यात्रा सत्र में किशोरियों को जीवन में सफलता प्राप्त करने के कई सूत्र बताए। 

श्रीमती अनिष्का मालपानी ने पर्सनलिटी डेवलपमेंट सत्र में ड्रेसिंग सेंस, मेकअप, स्ट्रेस मैनेजमेंट और प्रभावी कम्युनिकेशन पर रोचक बातें सिखाईं।

ख्यातनाम वरिष्ठ पत्रकार और राष्ट्रवादी वक्ता श्री पुष्पेंद्र कुलश्रेष्ठ ने सनातन धर्म के अनादि काल से चले आ रहे स्वरूप और उसका वैज्ञानिक संबंध पर विस्तार से प्रकाश डाला। कौशल विकास अंतर्गत पॉट मेकिंग और रंगोली की कार्यशालाएं धू्रव ग्लोबल स्कूल के प्रशिक्षक को द्वारा ली गईं। प्रथम रात्रि में सांस्कृतिक कार्यक्रम 'नाद नर्तनÓ का संयोजन मध्यांचल सह प्रभारी श्रीमती ज्योति बाहेती और पूर्वोत्तर राजस्थान की प्रदेश अध्यक्ष श्रीमती पूनम दरगड द्वारा किया गया। जिसमें किशोरियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और अपने प्रतिभा का प्रदर्शन किया।

सिद्धि सृजन: द्वितीय दिवस

'सिद्धि सृजन' शिविर का दूसरा दिन, 26 अक्टूबर, नई ऊर्जा और ज्ञानवर्धक अनुभवों से भरा रहा। सुबह 6:30 बजे जुंबा, तद्पश्चात श्रीमती अंजलि तापडिय़ा ने हास्य योग के साथ दिन की शुरुआत की, यह बताते हुए कि हँसी सबसे अच्छी दवा है। उन्होंने किशोरियों को विभिन्न प्रकार के हास्य के प्रकार सिखाए। किशोरियों ने हँसते-हँसते इस सत्र का भरपूर आनंद लिया। वहीं, दूसरे समूह की किशोरियों ने आत्मरक्षा के गुर सीखे।

टॉक शो में सुप्रसिद्ध करियर काउंसलर और मोटिव्हेशनल स्पीकर  डॉ .अनुराधा जाजू ने करियर के चयन पर उपयुक्त मार्गदर्शन दिया। उन्होंने बताया कि जीवन में अपने लक्ष्य और उद्देश्यों के बारे में स्पष्टता होनी चाहिए।

रंगोली और कैलीग्राफी अंतर्राष्ट्रीय रंगोली कलाकार श्रीमती माधुरी और कु. प्रगति सुदा ने बहुत सरल तरीके से रंगोली बनाना सिखाया, वहीं दूसरे समूह की किशोरियों को कैलीग्राफी सीखने का अवसर मिला। श्रीमती अनुराधा मालपानी ने सुंदर नैपकिन फोल्डिंग और डाइनिंग टेबल सजाने के तरीके बताए। वर्कशॉप का आनंद लिया।

विजन बोर्ड वर्कशॉप वर्षा अग्रवाल ने इस सत्र में दृष्टि, कृतज्ञता और सकारात्मकता के संगम के साथ किशोरियों से विजन बोर्ड बनवाए। उन्होंने जीवन में सेलेब्रेट, एकनॉल्ड्ज, एंड अप्रेसिएट (उत्सव मनाना, स्वीकार करना और सराहना करना) के महत्व पर बल दिया। उन्होंने बताया कि खुली आँखों से देखे सपने साकार होते हैं और कृतज्ञता का भाव हमेशा सकारात्मक परिणाम लाता है।

सुप्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता श्काजल हिंदुस्तानी ने अपने सत्र में राष्ट्र और धर्म से जुड़े संवेदनशील विषय लव जिहाद पर अपने विचार व्यक्त किए, जिसने उपस्थित प्रत्येक किशोरी के मन को गहराई तक झकझोर दिया। उन्होंने किशोरियों को दुर्गा बन, तू काली बन, कभी न बुर्के वाली बन की शपथ दिलाई। राष्ट्रप्रेम से ओतप्रोत अपनी जोशीली वाणी में उन्होंने बताया कि संगठन से ही शक्ति आती है और स्त्रियाँ संस्कृति की वाहक हैं। हिंदुत्व को बढ़ावा देने के लिए उनका नारा था बी हिंदू, बाय फ्र्रॉम हिंदू एंड एम्प्लॉय हिंदू।

पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कल्पना गगड़ानी ने जोश के संग होश सत्र में किशोरियों को सजग रहते हुए किशोरावस्था में जोश के साथ होश बनाए रखने की आवश्यकता पर बल दिया, जो हर किशोरी की आँखें खोलने में कामयाब रहा।

सुप्रसिद्ध यंग एंटरप्रेन्योर श्री कृष्णा राठी ने बताया कि सफलता वही तय करता है जो त्याग की कीमत और सुविधा की सीमा समझता है। उन्होंने सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसिंग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की। उन्होंने समझाया कि कोई व्यक्ति जैक ऑफ ऑल होते हुए भी मास्टर ऑफ वन कैसे बन सकता है, साथ ही बाजार में अपने उत्पादों को कैसे बेचना और फॉलोअर्स बढ़ाना है, यह विस्तार से बताया।

ऐतिहासिक भ्रमण दूसरे दिन सुबह 10 बजे सभी राष्ट्रीय पदाधिकारी, प्रदेश अध्यक्ष और सचिव और आए हुए अतिथिगणों को संगठन की राष्ट्रीय कार्यसमिति सदस्य श्रीमती अरुणा लढ्ढा और नासिक जिला अध्यक्ष नैना हेड़ा द्वारा सिन्नर में स्थित 1000 साल पुराने गोंडेश्वर महादेव मंदिर और जेम्स म्यूजियम का भ्रमण करवाया गया। स्वादिष्ट भोजन के उपरांत सिन्नर माहेश्वरी महिला मंडल द्वारा आए हुए राष्ट्रीय पदाधिकारियों का सम्मान किया गया।

तृतीय दिवस - साइबर क्रांति इस सत्र में संचार समिति की राष्ट्रीय प्रभारी श्रीमती भाग्यश्री चांडक द्वारा आजकल अनेक प्रकार से जो डिजिटल फ्रॉड हो रहे हैं, उनके बारे में सजग किया गया। कई बार हम अपनी जिज्ञासा में अनजाने में धोखाधड़ी के शिकार बन जाते हैं, उससे सुरक्षा के तरीके बताए गए। ChatGPT और AI का ड्रॉबैक बताया गया। फोटो अपलोड, वाटरमार्क उपयोग और साइबर हेल्पलाइन की जानकारी दी गई।

श्रीमती भगवती देवी बल्दवा ने अपने जीवन का संघर्ष साझा करते हुए कहा कि एकनिष्ठ होकर काम करने पर कामयाबी प्राप्त होती ही है। उन्होंने संयुक्त परिवार की महत्ता विशेष कर आज के संदर्भ में क्यों आवश्यक है, इस पर प्रकाश डाला। कैरियर और फैमिली का संतुलन ही जीवन का सौंदर्य है, सिद्धि से ही प्रसिद्ध आती है, ऐसा प्रतिपादन किया।

मिसेज इंडिया यूनिवर्स श्रीमती रूपल मोहता ने छूना है आसमान सत्र में बताया कि छोटे शहरों में रहकर भी सपने पूरे किए जा सकते हैं। ऊंची उड़ान के साथ आसमान को छुआ जा सकता है। ससुराल में भी सभी सदस्यों को आदर देते हुए और उनके साथ से हम अपनी मंजिल पा सकते हैं। यह स्वयं के अनुभवों द्वारा समझाया। गीत और नृत्य करवा कर सबको फ्रेश कर दिया।

श्रीमती शोभा सादानी ने बताया कि किसी न किसी कला में पारंगत होना ही चाहिए। अपने इंटरएक्टिव सेशन में जीवन प्रबंधन मूल्यों को उन्होंने समझाया।

श्रीमती गीता मूंदड़ा ने रिश्तों की डोर को कैसे मजबूती से संभाल कर रखा जाए, इस पर अपने विचार रखें। अपने अहम् भाव और इच्छाओं को लगाम लगाने से संबंधों में मधुरता रखी जा सकती है, यह किशोरियों को समझाया।

समापन सत्र में प्रकल्प प्रमुख और दक्षिणांचल सहप्रभारी श्रीमती अनुराधा मालपानी ने तीन दिनों के हर सत्र का प्रतिवेदन प्रस्तुत कर हर पल को सभी के मन के पटल पर फिर से अंकित कर दिया।

मुख्य अतिथि के रूप में महासभा के कोषाध्यक्ष श्री राजकुमार काल्या ने अपने वक्तव्य में सिद्धि सृजन की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि यह तो प्रारंभ है किशोरियों के सर्वांगीण विकास हेतु। प्रदेश स्तर पर और आगे भी इस तरह के कार्यक्रम निरंतर होते रहने चाहिए, ऐसी अभिलाषा व्यक्त की।

अतिथि और रा. पूर्व अध्यक्ष श्रीमती सुशीला काबरा ने शिक्षा के साथ संस्कारों पर जोर दिया। अतिथि और निवर्तमान अध्यक्ष श्रीमती आशा माहेश्वरी ने कार्यक्रम की सफलता पर बधाई दी। उन्होंने किशोरियों से कहा कि हमारी वाणी में मां सरस्वती विराजित होती है, इसलिए जब भी बोलो, अच्छा बोलो, जिससे सब अच्छा होगा। किशोरियों द्वारा भावविभोर कर देने वाले मनोगत प्रस्तुत किए गए। उन्होंने बताया कि ये शिविर स्वर्णिम, प्रेरणादायक और यादगार दिन बन गए।

अध्यक्षीय उद्बोधन में राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती मंजू बांगड़ ने भिवविभोर शब्दों में शिविर की सफलता की बधाई दी। हर सत्र, हर गतिविधि, हर संवाद सिद्धि सृजन की सफलता का सूत्र बना। इन तीन दिनों में संपूर्ण वातावरण एक अद्भुत ऊर्जा का निर्माण कर केवल एक शिविर नहीं बल्कि एक नई सोच एक नए आरंभ का साक्षी बन संस्कारों की मंजुल ज्योति का दीप प्रज्वलित कर गया जहां हमारी बेटियों को शान के साथ विनम्रता, शक्ति के साथ करुणा, और अनुशासन के साथ आत्मविश्वास की प्रेरणा मिली। उन्होंने कहा...

संस्कार से बनता है व्यक्तित्व

संस्कार से खिलती मुस्कान

यही है तो है जीवन की सच्ची साधना

यही है मानवता की पहचान

सभी का धन्यवाद ज्ञापित किया। विशेष रूप से स्वागताध्यक्ष श्री ललिता मालपानी, संजय मालपानी, अनुराधा मालपानी, समस्त मालपानी परिवार, धू्रव ग्लोबल स्कूल की पूरी टीम, मार्गदर्शक श्रीमती गीता मूंदड़ा, श्रीमती ममता मोदानी, श्री राजकुमार काल्या, आदरणीय मां रत्नीदेवी काबरा, श्रीमती सोनिया तोषनीवाल, श्रीमती अरुणा लढ्ढा, श्रीमती सविता राठी, श्री राजेंद्र तापडिय़ा, श्री श्रीनिवास बाहेती, श्री श्यामसुंदर मूंदड़ा, श्रीमती उर्मिला गट्टानी, श्रीमती भगवती बल्दवा, जिनके सहयोग से कार्यक्रम सफल हो पाया, सभी का आभार व्यक्त किया।

प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े हुए सभी कार्यकर्ताओं का भी धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने बताया कि अध्यक्ष पद ग्रहण करने के बाद किशोरियों के लिए इस तरह का शिविर आयोजन करना उनका स्वप्न ही नहीं, एक उत्कट अभिलाषा थी, जो आज साकार हुई।

संस्कारसिद्धा की पूरी टीम, राष्ट्रीय समिति प्रदर्शक श्रीमती अनुसया मालु, राष्ट्रीय समिति प्रभारी और प्रकल्प प्रमुख श्रीमती अंजलि तापडिय़ा, दक्षिणांचल सह प्रभारी और प्रकल्प प्रमुख श्रीमती अनुराधा मालपानी, मध्यांचल सह प्रभारी श्रीमती ज्योति बाहेती, पश्चिमांचल सह प्रभारी श्रीमती हंसा चितलांगिया और कार्यवाहक श्रीमती आभा बेली और विशेष सहयोगी श्रीमती अरुणा लढ्ढा, श्रीमती शैला कलंत्री, श्रीमती भाग्यश्री चांडक का दुपट्टा ओढ़ाकर अभिनंदन किया।

श्री पुष्पक लढ्ढा, मुंबई राष्ट्रीय खेलमंत्री, युवा संगठन की विशेष उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन श्रीमती ज्योति जी बाहेती और श्रीमती हंसा चितलांगिया ने किया, तथा आभार ज्ञापन श्रीमती अंजलि तापडिय़ा ने किया।

समापन समारोह के अंत में भोजन के उपरांत रात्रि में फायर शो का आयोजन किया गया, जिसमें छत्रपति शिवाजी महाराज के समय शस्त्रास्त्र के प्रात्यक्षिक द्वारा शौर्यबल किशोरियों को दिखाया गया। अंत में कैम्पफायर के साथ नाच-गा कर धूम-धाम से कार्यक्रम संपन्न हुआ। उच्चकोटी के वक्ताओं से किशोरियों को अमूल्य, अप्रतिम, संस्कारवान, शिक्षाप्रद, रचनात्मक सानिध्य प्राप्त हुआ।


चतुर्थ दिवस - संगमनेर से शिर्डी तक का आनंदमय सफर शिविर का अंतिम दिन 28 अक्टूबर मस्ती और आनंद भरा रहा। अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन के पदाधिकारी और सहभागी 225 किशोरियों ने संगमनेर से शिर्डी प्रस्थान किया और वहां पर एक अविस्मरणीय दिन बिताया।

धार्मिक और आनंदमय गतिविधियाँ- इस दिन की शुरुआत शिर्डी साईं तीर्थ में सुस्वादु नाश्ते के साथ हुई, जिसके बाद धार्मिक थीम पार्क का आनंद लिया। जिसमें चारों धामों के दिव्य दर्शन, लंका दहन, कालीया मर्दन और मुशक जी के साथ सवाल-जवाब से सभी को बहुत मजा आया। अनुराधा मालपाणी ने मानो साक्षात साईं बाबा के दर्शन करवाए। पश्चात सभी ने वेट एंड जॉय वॉटर पार्क में दोपहर का भोजन कर विभिन्न राइड्स का आनंद लिया।

सकारात्मक अनुभव चार दिनों में नई मित्रताएँ, मीठी यादें और जीवन का सार प्रदान किया। सभी किशोरियों ने सकारात्मकता और नए संकल्पों के साथ अपने-अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान किया।

आभार और शुभकामनाएँ सिद्धि सृजन शिविर के माध्यम से किशोरियों के मन में संस्कारों की नींव रखी गई, साधना का मार्ग और लक्ष्य की ओर बढऩे का मार्ग प्रशस्त हुआ। यह न केवल एक शिविर था, बल्कि एक ऐसा अनुभव था, जिसने उन्हें अपने भीतर की असीमित क्षमताओं को पहचानने का और एक उज्जवल भविष्य की ओर कदम बढ़ाने का अवसर दिया। एक प्रकार से ज्ञान, प्रेरणा और सांस्कृतिक अनुभवों का त्रिवेणी संगम रहा। अखिल भारतवर्षीय माहेश्वरी महिला संगठन और संस्कारसिद्धा समिति की ओर से सभी को धन्यवाद ज्ञापित किया जाता है और आशा है कि सभी किशोरियाँ अपने जीवन में सफल और संस्कारित बनेंगी।


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